झारखंड हाईकोर्ट में जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की आयु सीमा को चुनौती, सरकार से जवाब तलब

Updated at : 06 Apr 2026 6:06 PM (IST)
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JPSC Age Limit

झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार.

JPSC Age Limit: जेपीएससी 2026 परीक्षा की अधिकतम आयुसीमा को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है. अभ्यर्थियों ने 2017 को आधार वर्ष बनाने की मांग की है, जबकि आयोग ने 2022 तय किया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और जेपीएससी से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

JPSC Age Limit: झारखंड लोकसेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा 2026 की अधिकतम आयुसीमा को लेकर विवाद गहरा गया है. इस मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आयोग के निर्णय को चुनौती दी है. मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया है, जिससे अभ्यर्थियों के बीच उम्मीद और चिंता दोनों बनी हुई है.

अभ्यर्थियों ने उठाया आयुसीमा का मुद्दा

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रतियोगिता परीक्षा के लिए अधिकतम आयुसीमा की गणना 1 अगस्त 2017 के आधार पर होनी चाहिए. उनका तर्क है कि लंबे समय से परीक्षा नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थी आयुसीमा से बाहर हो गए हैं. वहीं, जेपीएससी ने आयुसीमा 1 अगस्त 2022 के आधार पर निर्धारित की है, जिसे लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है.

हाईकोर्ट ने सरकार और आयोग से मांगा जवाब

इस मामले की याचिका चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में दायर की गई थी, जिसे एकल पीठ में भेज दिया गया. एकल पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद झारखंड सरकार और जेपीएससी को इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है.

अगली सुनवाई 21 अप्रैल को

हाईकोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तारीख तय की है. इस दिन कोर्ट में दोनों पक्षों के जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. अभ्यर्थियों की नजर अब इस सुनवाई पर टिकी हुई है, क्योंकि इससे उनके भविष्य पर असर पड़ सकता है.

45 पदों पर निकली है भर्ती

बताया जा रहा है कि जेपीएससी ने कुल 45 पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन जारी किया है. ऐसे में आयुसीमा को लेकर चल रहा विवाद भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है. यदि कोर्ट कोई निर्देश देता है, तो इससे परीक्षा के नियमों में बदलाव संभव है.

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अदालत में पक्ष रखने वाले अधिवक्ता

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखा, जबकि झारखंड सरकार की ओर से अधिवक्ता राजीव रंजन ने दलीलें प्रस्तुत कीं. यह याचिका अमित कुमार एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई है. फिलहाल सभी की निगाहें कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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