झारखंड सरकार को हाईकोर्ट का झटका, सचिवालय सहायकों की तर्ज पर शिक्षकों के भी सुधरेंगे वेतन

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झारखंड हाईकोर्ट की तस्वीर

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने प्राथमिक शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए छठे वेतनमान के तहत 16,290 रुपये न्यूनतम एंट्री पे देने का आदेश जारी किया है. अदालत ने सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें इसे केवल सचिवालय कर्मियों तक सीमित बताया गया था. पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

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Jharkhand High Court, रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के मैट्रिक व इंटर प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों के पक्ष में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की एकलपीठ ने राज्य सरकार के उस आदेश (मेमो) को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसके तहत प्राथमिक शिक्षकों को छठे वेतन के बदलाव के अनुरूप 16,290 रुपये न्यूनतम वेतन (Entry Pay) निर्धारित करने के दावे को खारिज कर दिया गया था. अदालत ने सरकार को सख्त निर्देश दिया है कि प्रार्थी शिक्षकों को भी समान रूप से वही वित्तीय लाभ दिए जाएं, जो पूर्व में इसी तरह के मामलों में अन्य शिक्षकों को दिए जा चुके हैं. हाईकोर्ट के इस फैसले से राज्य के हजारों शिक्षकों के वेतनमान और एरियर (बकाया) का रास्ता साफ हो गया है.

जमशेदपुर के राजीव रंजन सहित 80 शिक्षकों ने दायर की थी याचिका

यह पूरा मामला जमशेदपुर के प्राथमिक शिक्षक राजीव रंजन पांडेय सहित कुल 80 शिक्षकों द्वारा दायर रिट याचिका पर आया है. याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें वित्त विभाग के संकल्प संख्या 660/एफ (660/F) का पूर्ण लाभ दिया जाए और 1 जनवरी 2006 से उनका न्यूनतम एंट्री पे 16,290 रुपये निर्धारित करते हुए पिछले बकाया वेतन (Arear) का भुगतान किया जाए.

क्या है पूरा मामला और क्यों फंसा था पेंच?

अदालत में सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह और अधिवक्ता शशांक कुमार ने मामले की बारीकियों से कोर्ट को अवगत कराया. राज्य सरकार के वित्त विभाग ने 28 फरवरी 2009 को संकल्प संख्या 660/एफ जारी किया था. इसके तहत 2006 से पहले नियुक्त व कार्यरत सरकारी कर्मचारियों को छठे वेतनमान के संशोधित नियमों के अनुसार न्यूनतम वेतन देने का स्पष्ट प्रावधान था.

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ग्रेड पे और पुराना स्केल

6500-10500 रुपये के बदले छठे वेतन आयोग के तहत पे-बैंड-2 और 4200 रुपये ग्रेड पे के बिल्कुल अनुरूप है, जिसका एंट्री पे तकनीकी रूप से 16,290 रुपये बनता है. इस स्पष्ट प्रावधान के बावजूद, राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 10 जून 2024 को मेमो संख्या-336 जारी कर शिक्षकों का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह लाभ केवल ‘झारखंड सचिवालय के सहायकों (Assistants) और निजी सहायकों (PA)’ पर लागू होता है, शिक्षकों पर नहीं. इसी आदेश को शिक्षकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी.

पूर्व के फैसलों को बनाया आधार

सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि यह कोई नया कानूनी बिंदु नहीं है. इससे पहले भी हाईकोर्ट डब्ल्यूपी (एस) संख्या 5897/2014 और कई अन्य समान प्रकृति के मामलों में शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना चुका है. बहस के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि वर्तमान मामला पूर्व में तय हो चुके मामलों जैसा ही है. हालांकि, सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि एकलपीठ के इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा हाईकोर्ट की खंडपीठ (Division Bench) में एलपीए (LPA) दायर किया गया है. दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पूर्व के न्यायिक दृष्टांतों के आधार पर याचिका का निष्पादन (Disposal) कर दिया. अदालत ने सरकार के रिजेक्शन ऑर्डर को रद्द करते हुए साफ किया कि शिक्षकों को तत्काल राहत दी जाए, लेकिन यदि राज्य सरकार खंडपीठ (LPA) में चल रही अपील में सफल होती है, तो खंडपीठ का जो भी अंतिम फैसला होगा, वह इन प्रार्थी शिक्षकों पर भी समान रूप से प्रभावी ढंग से लागू माना जाएगा. हाईकोर्ट के इस संवेदनशील और नीतिगत फैसले के बाद अब प्राथमिक शिक्षकों में हर्ष का माहौल है, क्योंकि इससे उनके वित्तीय अधिकारों और वेतन विसंगति के मामले को एक मजबूत विधिक आधार मिल गया है.

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