भीषण गर्मी से भीम बराज का जलस्तर घटा, चार दिनों में 1.2 मीटर कम हुआ पानी
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 21 May 2026 9:28 PM
पलामू के मोहम्मदगंज का भीम बराज. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू के मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज में भीषण गर्मी के कारण चार दिनों में 1.2 मीटर पानी कम हो गया है. बांयी नहर में रिसाव और लगातार बढ़ती गर्मी से जलस्तर घट रहा है, जिससे पलामू और गढ़वा के कई गांवों में जल संकट की चिंता बढ़ गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
मोहम्मदगंज से कुंदन चौरसिया की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब जलस्रोतों पर साफ दिखाई देने लगा है. पिछले चार दिनों की तेज गर्मी के कारण मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज का जलस्तर तेजी से घटा है. अधिकारियों के अनुसार बराज में पानी का स्तर करीब 1.2 मीटर तक कम हो गया है. भीम बराज का जल भंडारण पलामू और गढ़वा जिले के कई गांवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. बराज में पर्याप्त पानी रहने से आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर संतुलित बना रहता है और सिंचाई व्यवस्था को भी राहत मिलती है.
अपस्ट्रीम में दर्ज हुआ 1.2 मीटर जल भंडारण
गुरुवार को बराज के अपस्ट्रीम क्षेत्र में 1.2 मीटर जल भंडारण दर्ज किया गया. लगातार घटते जलस्तर को देखते हुए विभागीय अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है. जल भंडारण को बचाने और पानी के अनावश्यक बहाव को रोकने के लिए बराज में लगे सभी 40 गेट बंद कर दिए गए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यह कदम पानी के स्टॉक को बनाए रखने के लिए जरूरी था.
बिहार और झारखंड के अभियंताओं की संयुक्त पहल
भीम बराज के संचालन और निगरानी में बिहार और झारखंड के जल संसाधन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. अभियंताओं के संयुक्त प्रयास से फिलहाल जलस्तर को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है. मेदिनीनगर जल संसाधन विभाग के रूपांकन प्रमंडल टू की ओर से बराज की देखरेख की जाती है. विभागीय कर्मियों का कहना है कि वर्तमान गर्मी के मौसम में जल संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.
बांयी नहर में रिसाव से बढ़ी परेशानी
जानकारी के अनुसार भीम बराज की बांयी नहर के मुख्य फाटक में छेद हो गया है, जिससे लगातार पानी का रिसाव हो रहा है. इस कारण जरूरत से ज्यादा पानी बांयी नहर में पहुंच रहा है और बराज के अपस्ट्रीम का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो आने वाले दिनों में जल संकट और गहरा सकता है. विभागीय सूत्रों के अनुसार छह मई को बराज का जलस्तर लगभग 1.5 मीटर दर्ज किया गया था, लेकिन रिसाव और भीषण गर्मी के कारण इसमें लगातार गिरावट आ रही है.
निगरानी में लापरवाही का भी आरोप
भीम बराज नियंत्रण कक्ष के कर्मियों ने बताया कि रबी फसल के मौसम में बराज की निगरानी के लिए झारखंड जल संसाधन विभाग के अभियंता नियमित रूप से ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहते हैं. बताया गया कि कई अधिकारी मेदिनीनगर में रहकर मोबाइल के माध्यम से ही स्थिति की जानकारी लेते हैं. इससे बराज के संचालन और जलस्तर को नियंत्रित रखने में दिक्कतें बढ़ जाती हैं. कर्मचारियों का कहना है कि नियमित निगरानी नहीं होने से छोटी तकनीकी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन जाती हैं.
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15 जून के बाद बिहार विभाग संभालता है संचालन
स्थानीय सूत्रों के अनुसार हर वर्ष 15 जून के बाद भीम बराज के संचालन और नियंत्रण की जिम्मेदारी बिहार जल संसाधन विभाग के उत्तर कोयल परियोजना को सौंप दी जाती है. ऐसे में दोनों राज्यों के विभागों के बीच समन्वय बेहद जरूरी माना जाता है. क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की नजर अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी है, क्योंकि आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है. यदि जल संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सिंचाई और पेयजल संकट गहरा सकता है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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