डॉ कौशल और मुखिया पूनम ने अनाथ बेटी का कराया विवाह, अब तक 22 कन्याओं का कर चुके हैं कन्यादान
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 21 May 2026 9:10 PM
पलामू में अनाथ बेटी की शादी कराते डॉ कौशल और मुखिया पूनम. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू के पाटादोहर गांव में डॉ कौशल किशोर जायसवाल और मुखिया पूनम जायसवाल ने अनाथ बेटी का विवाह कराकर मानवता की मिसाल पेश की. दंपति अब तक 22 गरीब और अनाथ बेटियों के विवाह में सहयोग कर कन्यादान करा चुके हैं. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड अंतर्गत सुदूरवर्ती पाटादोहर गांव में बुधवार की रात मानवता, समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण का अनोखा संगम देखने को मिला. वन राखी मूवमेंट के प्रणेता और ट्री मैन के नाम से प्रसिद्ध डॉ कौशल किशोर जायसवाल तथा उनकी पत्नी सह डाली पंचायत की मुखिया पूनम जायसवाल ने एक अनाथ युवती का विवाह कराकर समाज के सामने मिसाल पेश की. अनाथ युवती बरती कुमारी, स्वर्गीय सुकुल सिंह की पुत्री हैं. उनका विवाह पूरे रीति-रिवाज और सामाजिक सहभागिता के साथ अर्जुन सिंह के साथ संपन्न कराया गया. विवाह समारोह में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली.
नवदंपति को भेंट किए पौधे और घरेलू सामान
विवाह के दौरान डॉ कौशल किशोर जायसवाल और मुखिया पूनम जायसवाल ने नवविवाहित जोड़े को घरेलू उपयोग के बर्तन, वस्त्र और आशीर्वाद स्वरूप अमरूद एवं कपूर के पौधे भेंट किए. इसके साथ ही बारातियों और ग्रामीणों के बीच भी पौधों का वितरण किया गया. इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया गया. समारोह में मौजूद लोगों ने इस पहल की सराहना की और कहा कि सामाजिक कार्य के साथ पर्यावरण बचाने का ऐसा संदेश प्रेरणादायक है.
गरीबों की सेवा ही सच्ची पूजा: डॉ कौशल
ट्री मैन डॉ कौशल किशोर जायसवाल ने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर पूजा है. उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना जीवन समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण को समर्पित कर दिया है. उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई गरीब और अनाथ बेटियों के विवाह में आर्थिक कठिनाइयां सबसे बड़ी समस्या बनती हैं. ऐसे परिवारों की मदद करना सामाजिक जिम्मेदारी है.
जिला पार्षद भी करते हैं सहयोग
छतरपुर पूर्वी के जिला पार्षद अमित कुमार जायसवाल भी लगातार जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में सहयोग करते रहे हैं. ग्रामीणों के अनुसार वे गरीब परिवारों को चावल और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराते हैं, ताकि किसी बेटी का विवाह आर्थिक अभाव के कारण प्रभावित न हो. हालांकि, बुधवार को पंचायत क्षेत्र में हुई दो अलग-अलग दुखद घटनाओं के कारण वे विवाह समारोह में शामिल नहीं हो सके.
घायल और पीड़ित परिवारों की भी की मदद
मुखिया पूनम जायसवाल ने बताया कि उसी दिन पंचायत क्षेत्र में दो दुखद घटनाएं सामने आई थीं. पहली घटना में इमामुद्दीन अंसारी पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे. उनके इलाज के लिए 5100 रुपये की आर्थिक सहायता दी गई. वहीं दूसरी घटना में उषा देवी आग से झुलस गई थीं. बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची भेजा गया और तत्काल सहायता के रूप में 5100 रुपये उपलब्ध कराए गए. पूनम जायसवाल ने कहा कि जरूरतमंद लोगों की सहायता करना समाज का कर्तव्य है और पंचायत स्तर पर हर संभव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है.
22 बेटियों का करा चुके हैं कन्यादान
डॉ कौशल किशोर जायसवाल और मुखिया पूनम जायसवाल अब तक 22 अनाथ और गरीब बच्चियों के विवाह में आर्थिक सहयोग देकर कन्यादान करा चुके हैं. ग्रामीणों का कहना है कि दंपती लगातार समाज सेवा, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के कार्यों से जुड़े हुए हैं. यही कारण है कि क्षेत्र में लोग उन्हें सम्मान और भरोसे की नजर से देखते हैं.
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बड़ी संख्या में शामिल हुए ग्रामीण
विवाह समारोह में बरती कुमारी की चाची शंभू कुंवर, अदरु सिंह, बीना कुमारी, बिला देवी, फूला देवी, सुधीर सिंह, मुन्ना सिंह, चनारिक सिंह, राजकुमार सिंह, भोला सिंह, महेंद्र सिंह, अरुण सिंह, विनय सिंह और सुमित समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मौजूद रहे. ग्रामीणों ने नवदंपती को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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