झारखंड में सरेंडर पॉलिसी क्या है, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली को कितना मिलेगा पैसा?

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रांची में पुलिस के सामने सरेंडर करते झारखंड के नक्सली. फोटो: प्रभात खबर

Naxalite Surrender: झारखंड की सरेंडर पॉलिसी के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को इनामी राशि, हथियार जमा करने का पैसा, जमीन, प्रशिक्षण और परिवार के पुनर्वास की सुविधा दी जाती है. हजारीबाग ओपन जेल में रहने, बच्चों की पढ़ाई और कानूनी सहायता का भी प्रावधान है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से प्रणव की रिपोर्ट

Naxalite Surrender: झारखंड में गुरुवार को दो दर्जन से अधिक नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद राज्य सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है. लोग जानना चाहते हैं कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से कौन-कौन सी सुविधाएं दी जाती हैं और उन्हें कितनी आर्थिक सहायता मिलती है.

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इनामी राशि परिवार को देने का प्रावधान

झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत नक्सली अगर पुलिस या सुरक्षा बलों के सामने सरेंडर करते हैं, तो उनके ऊपर घोषित इनामी राशि का लाभ दिया जाता है. सरकारी प्रावधान के अनुसार, जिस नक्सली पर जितनी इनामी राशि घोषित होती है, आत्मसमर्पण के बाद उतनी राशि उसके परिवार या निर्धारित लाभार्थी को दी जाती है. उदाहरण के तौर पर यदि किसी नक्सली पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है, तो सरेंडर के बाद यह राशि सरकार की नीति के तहत उपलब्ध कराई जाती है.

हथियार जमा करने पर अलग से मिलता है पैसा

सरेंडर करने वाले नक्सलियों को केवल इनामी राशि ही नहीं, बल्कि हथियार और विस्फोटक जमा कराने पर भी अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाती है. यदि कोई नक्सली आत्मसमर्पण के दौरान हथियार, गोली-बारूद, वॉकी-टॉकी या अन्य उपकरण जमा कराता है, तो सरकार की ओर से तय मानकों के अनुसार अलग से भुगतान किया जाता है. हथियार की श्रेणी और गुणवत्ता के आधार पर यह राशि तय होती है.

जमीन और पुनर्वास की सुविधा

सरकार की नीति में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है. इसके तहत उन्हें गांव या शहर में बसाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने का प्रावधान है. नक्सली की इच्छा के अनुसार तय किया जाता है कि वह गांव में रहना चाहता है या शहर में. इसके अलावा सरकार उन्हें स्वरोजगार और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी देती है ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें.

बच्चों की पढ़ाई और बेटी की शादी में मदद

सरकार की पुनर्वास नीति में परिवार को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देने पर भी ध्यान दिया गया है. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च सरकार उठाती है. इसके अलावा बेटियों की शादी के लिए भी आर्थिक सहायता देने का प्रावधान रखा गया है. सरकार का उद्देश्य यह है कि सरेंडर के बाद परिवार सामान्य जीवन की ओर लौट सके और दोबारा उग्रवाद की राह पर न जाए.

हजारीबाग ओपन जेल में रखा जाता है

झारखंड में आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को हजारीबाग स्थित ओपन जेल में रखा जाता है. यहां वे अपने परिवार के साथ रह सकते हैं. ओपन जेल में ही उन्हें रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण अवधि के दौरान हर महीने स्टाइपेंड भी दिया जाता है. इसके साथ ही छोटे मामलों में प्ली बार्गेनिंग और निःशुल्क कानूनी सहायता की सुविधा भी सरकार उपलब्ध कराती है.

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सरेंडर करने वाले नक्सली को मिलेगा कितना पैसा

  • करण उर्फ डांगुर: 2 लाख रुपये और एक इंसास राइफल का पैसा
  • गादी मुंडा: 5 लाख रुपये और एक इंसास राइफल का पैसा
  • नागेंद्र मुंडा: 5 लाख रुपये और एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • रेखा मुंडा: 5 लाख रुपये और वॉकी-टॉकी का पैसा
  • सागेन आंगारिया: 5 लाख रुपये
  • दर्शन उर्फ बिंज हासदा: एक एसएलआर का पैसा
  • सुलेमान हासदा: 5 लाख रुपये और एक इंसास राइफल का पैसा
  • बैजनाथ मुंडा: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • बासुमति जेराई: एक लाख रुपये और एक .303 राइफल का पैसा
  • रघु कायम: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • किशोर सिरका: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • रामदयाल मुंडा: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • वंदना: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • सुनीता सरदार: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • डांगुर बोईपाई: एक .303 राइफल का पैसा
  • बसंती देवगत: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • मुन्नीराम मुंडा: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • अनिशा कोड़ा: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • सपना: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • सुसारी: एक देसी कट्टा का पैसा
  • बिरसा कोड़ा: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • नुअस: एक वॉकी-टॉकी का पैसा
  • बुमली तियू: एक इंसास राइफल का पैसा
  • नीति माई उर्फ नीति हेंब्रम: एक एसएलआर राइफल का पैसा
  • लादू तिरिया: एक एसएलआर राइफल का पैसा

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