तेलंगाना में सरेंडर करने वाले नक्सलियों का झारखंड से है कनेक्शन, चाईबासा में फैला रखा था नेटवर्क
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 21 May 2026 3:36 PM
रांची में सरेंडर करता एक नक्सली.
Naxalite Surrender: तेलंगाना में सरेंडर करने वाले दो नक्सलियों का झारखंड के चाईबासा और सारंडा क्षेत्र से गहरा संबंध सामने आया है. दोनों पर जंगल क्षेत्रों में नक्सली नेटवर्क फैलाने और संगठनात्मक गतिविधियां चलाने के आरोप रहे हैं. पुलिस ने इसे बड़ी सफलता बताया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से प्रणव की रिपोर्ट
Naxalite Surrender: तेलंगाना में आत्मसमर्पण करने वाले दो बड़े नक्सलियों का झारखंड से गहरा संबंध सामने आया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार दोनों लंबे समय तक पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा और आसपास के इलाकों में सक्रिय रहे थे. इनका नेटवर्क सारंडा और कोल्हान क्षेत्र तक फैला हुआ था.
चाईबासा में फैला रखा था नेटवर्क
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में विश्वनाथ उर्फ संतोष उर्फ सिलाय उर्फ डोंगा उर्फ गंगाधर उर्फ नरसन्ना का नाम शामिल है. वह आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले का रहने वाला बताया गया है. नक्सली संगठन में वह स्पेशल एरिया कमेटी का सदस्य था और चाईबासा क्षेत्र में सक्रिय रहकर संगठन को मजबूत करने का काम करता था. दूसरी नक्सली पूनम उर्फ जोभा उर्फ भवानी उर्फ सुजाता है. उसका भी संबंध आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले से बताया गया है. पुलिस के अनुसार वह रीजनल कमेटी स्तर पर सक्रिय थी और चाईबासा तथा सारंडा क्षेत्र में संगठनात्मक गतिविधियों में शामिल रही.
जंगल क्षेत्रों में बनायी थी पकड़
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक दोनों नक्सलियों ने लंबे समय तक जंगल और सीमावर्ती इलाकों में नेटवर्क तैयार किया था. ग्रामीणों के बीच संपर्क बढ़ाकर संगठन के लिए सूचना तंत्र मजबूत करने का प्रयास किया गया. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि चाईबासा और सारंडा के दुर्गम जंगलों का इस्तेमाल नक्सली संगठन सुरक्षित ठिकाने के रूप में करता था. यहां से झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में गतिविधियां संचालित की जाती थीं.
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आत्मसमर्पण को पुलिस ने बताया बड़ी सफलता
तेलंगाना में दोनों नक्सलियों के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं. लगातार सुरक्षा अभियान, दबाव और सरकार की पुनर्वास नीति के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ते जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ दिया जाएगा ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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