बर्न मरीजों के इलाज पर हाइकोर्ट सख्त, जिलों के अस्पतालों में यूनिट बनाने का आदेश

Updated at : 04 Apr 2026 9:15 AM (IST)
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Jharkhand High Court News

झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार.

Jharkhand High Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने बर्न मरीजों के इलाज पर सख्त रुख अपनाते हुए 120 दिनों में सभी जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट शुरू करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि सही इलाज और सम्मानजनक जीवन नागरिकों का अधिकार है. सरकार को संसाधन और स्टाफ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court News: झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर रूप से जले मरीजों के इलाज की खराब व्यवस्था पर सख्त रुख अपनाया है. एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ अस्पताल की इमारत खड़ी कर देना पर्याप्त नहीं है, जब तक वहां जरूरी मशीनें और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद न हों. यह मामला राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी कमी को उजागर करता है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि आदेश की तारीख से 120 दिनों के भीतर सभी जिला अस्पतालों और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बर्न यूनिट पूरी तरह से चालू किए जाएं. कोर्ट ने कहा कि ये यूनिट सिर्फ नाम के लिए नहीं, बल्कि पूरी सुविधाओं के साथ कार्यरत होनी चाहिए.

जीवन के अधिकार की व्यापक व्याख्या

हाइकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जीवन का अधिकार केवल जीवित रहने तक सीमित नहीं है. इसमें सम्मानजनक जीवन और उचित चिकित्सा सुविधा का अधिकार भी शामिल है. कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि समय पर सही इलाज न मिलना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.

बर्न इंजरी को बताया गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या

खंडपीठ ने माना कि भारत में बर्न इंजरी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है. हर साल हजारों लोगों की मौत होती है और लाखों लोग स्थायी रूप से विकलांग हो जाते हैं. खासकर महिलाओं में इस तरह की घटनाओं का खतरा अधिक होता है. ऐसे में राज्य की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करे.

सिर्फ इमारत नहीं, पूरी सुविधा जरूरी

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बर्न यूनिट केवल औपचारिकता बनकर न रह जाएं. इनमें प्रशिक्षित डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जरूरी उपकरण और सहायक ढांचा होना अनिवार्य है. साथ ही दवाओं और जरूरी सामग्रियों की पर्याप्त उपलब्धता हर समय बनी रहनी चाहिए.

अलग और सुरक्षित बर्न यूनिट में होगा इलाज

हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि बर्न मरीजों का इलाज सामान्य वार्ड में नहीं किया जाना चाहिए. उनके लिए अलग और सुरक्षित बर्न यूनिट होनी चाहिए, जहां संक्रमण का खतरा कम हो. इसके साथ ही 24 घंटे इलाज और इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा.

90 दिनों में स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण

कोर्ट ने यह भी कहा कि बर्न मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है. इसके लिए 90 दिनों के भीतर प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करने का निर्देश दिया गया है, ताकि इलाज की गुणवत्ता बेहतर हो सके.

मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तरीय कमेटी

निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने का आदेश दिया गया है. यह कमेटी हर तीन महीने में समीक्षा करेगी. झारखंड के डायरेक्टर इन चीफ हेल्थ सर्विसेज को इस व्यवस्था का नोडल अधिकारी बनाया गया है.

सरकार को संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश

हाइकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी निर्देश दिया कि बर्न यूनिट के लिए पर्याप्त बजट और प्रशासनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. कोर्ट ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाए और नागरिकों को बेहतर इलाज दे.

पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि बर्न पीड़ित या उनके परिवार मुआवजा मांग सकते हैं. इसके लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) उनकी सहायता करेगा. यह कदम पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

जनहित याचिका पर आया फैसला

यह पूरा मामला प्रार्थी ओंकार विश्वकर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका से जुड़ा है. उन्होंने राज्य के सभी सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक सुविधाओं से लैस बर्न यूनिट शुरू करने की मांग की थी. 26 मार्च को सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब जारी कर दिया गया है.

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स्वास्थ्य व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा कदम

हाइकोर्ट का यह आदेश झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. यदि इन निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो राज्य में बर्न मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा, जिससे कई जिंदगियां बचाई जा सकेंगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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