अचानक बूढ़ा पहाड़ पहुंचे झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, उग्रवादियों को दिया सख्त संदेश

Updated at : 04 Apr 2026 8:56 AM (IST)
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Budha Pahad Visit

बूढ़ा पहाड़ पर पैदल जाते वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर (बाएं ऊपर), सुरक्षा बलों से बात करते (ऊपर दाएं और नीचे बाएं) और नक्सलियों के जन-चौपाल वाली जगह का दौरा करते (नीचे दाएं). फोटो: प्रभात खबर

Budha Pahad Visit: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बूढ़ा पहाड़ का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था और विकास कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने उग्रवादियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि विकास के जरिए ही नक्सलवाद खत्म होगा. उन्होंने क्षेत्र के लोगों को सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं बढ़ाने का भरोसा दिया. वित्त मंत्री के बूढ़ा पहाड़ दौरे से संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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बूढ़ा पहाड़ से लौटकर चंद्रशेखर सिंह

Budha Pahad Visit: झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शुक्रवार को उग्रवादियों का बहुचर्चित शरणस्थली बूढ़ा पहाड़ पहुंच गए. उनका यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. वित्त मंत्री दुर्गम रास्तों से होते हुए सड़क मार्ग, पैदल और बाइक के सहारे दोपहर करीब दो बजे बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित रहे इस इलाके में उनका दौरा सरकार की जमीनी सक्रियता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

वित्त मंत्री ने बूढ़ा पहाड़ का लिया जायजा

बूढ़ा पहाड़ पहुंचने के बाद वित्त मंत्री ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने पिकेट पर तैनात अधिकारियों और जवानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को जाना. साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया दौरे के बाद क्षेत्र में आए बदलावों की समीक्षा की. मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही क्षेत्र में उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो पाया है. इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बीडीओ, सीओ और संबंधित पंचायत के मुखिया बिंको उरांव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अब तक हुए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और ग्रामीणों की जरूरतों के बारे में विस्तृत जानकारी ली. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाय, ताकि आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके.

नक्सलियों के जन-अदालत वाले स्थान का किया निरीक्षण

दौरे के क्रम में वित्त मंत्री ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां कभी नक्सली नेता जन-अदालत लगाया करते थे. यह निरीक्षण क्षेत्र में बदलते हालात और शांति स्थापना की दिशा में उठाए गये कदमों का प्रतीक माना जा रहा है. स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी.

सड़क, अस्पताल और स्कूल बनवाने का आश्वासन

वित्त मंत्री ने कुल्ही से बूढ़ा पहाड़ तक सड़क निर्माण, हेसातु में हाई स्कूल की स्थापना और कुल्ही में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने गढ़वा के उपायुक्त को निर्देश दिया कि अगले 10 दिनों के अंदर एक विशेष बैठक आयोजित कर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की जाए और आगे की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए.

नियंत्रण में है उग्रवाद

उन्होंने स्पष्ट कहा कि उग्रवाद अभी नियंत्रित स्थिति में है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.ऐसे में बुढ़ा पहाड़ क्षेत्र से सीआरपीएफ कैंप हटाना जल्दबाजी होगा. जब तक ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है. कुल मिलाकर, यह दौरा सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

विकास के बदौलत उग्रवाद होगा खत्म: वित्त मंत्री

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर शुक्रवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. इस दौरान उन्होंने न केवल विकास योजनाओं का जायजा लिया, बल्कि मुख्य धारा से भटके हुए उग्रवादियों को परोक्ष रूप से संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि उग्रवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया गया है. विकास के बदौलत ही उग्रवाद को समूल खत्म किया जा सकता है. इसलिए बूढ़ा पहाड़ के लोगों का विकास हो सके, इसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. केंद्र और राज्य की पुलिस ने उग्रवाद पर नियंत्रण करने में कामयाबी हासिल की है. इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं.

मानवीय है बूढ़ा पहाड़ का दौरा

उन्होंने कहा कि बूढ़ा पहाड़ का यह दौरा राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय है. यहां आने पर उन्हें धरातल पहुंचने वाली योजनाओं के बारे में वास्तविक जानकारी मिली है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बूढ़ा पहाड़ के कुछ समय पहले दौरा करने के बाद ही यहां आने की इच्छा थी. हालांकि, 21 वर्ष पहले वह यहां आ चुके थे. उन्होंने कहा कि यहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तो पहुंचाया गया है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ अभी नहीं मिल सका है. यहां के लोग अभी भी सड़क ,बिजली, शौचालय, हाई स्कूल आदि की आस लगाए बैठे हैं. इसके लिए प्रयास किया जाएगा कि यहां समुचित विकास हो सके. इसके गढ़वा और पलामू डीसी को स्थिति से अवगत कराया जाएगा.

मंईयां सम्मान योजना का मिल रहा लाभ

उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही पेयजल और स्वच्छता विभाग, आपूर्ति विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के साथ बैठकर बूढ़ा पहाड़ के लिए योजनाओं के पैकेज के लिए समीक्षा करेंगे. यहां एक किलोमीटर तक आरसीसी सड़क बनाया जाना बेहद जरूरी है. यहां विकास की गति को तेज किया जाएगा. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मंईयां सम्मान योजना का लाभ यहां के लोगों को मिला है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके क्रय शक्ति को बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत है.

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भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उग्रवाद कभी स्वीकार्य नहीं

उन्होंने कहा कि मैं पलामू के छतरपुर इलाके से रहा हूं. इसलिए मैंने उग्रवाद को करीब से देखा है. मैं बूढ़ा पहाड़ से उग्रवादियों को को संदेश देना चाहता हूं कि जो गलत निर्णय लिया है, उसे भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देकर कुछ पैसे की वसूली से आत्मनिर्भर नहीं बना जा सकता है. इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था जरूरी है. इसलिए उग्रवादी विचारधारा को खत्म कर भारतीय लोकतंत्र के मुख्य धारा से जुड़ें.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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