अमित शाह ने कहा- बस्तर हुआ नक्सलमुक्त, लेकिन कांग्रेस ने इस अभियान में हमारा साथ नहीं दिया

Edited by Rajneesh Anand
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अमित शाह

Amit Shah : हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का जो संकल्प लिया था, वो पूरा हो चुका है. वर्तमान स्थिति यह है कि 19 मई, 2026 तक, जो क्षेत्र कभी नक्सलवाद की गिरफ्त में थे, वहां व्यापक विकास की एक नई दृष्टि आकार लेती नजर आ रही है. उक्त बातें गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में मीडिया के सामने कही.

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Amit Shah : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को बस्तर में कहा कि तय तारीख 31 मार्च 2026 से पहले ही देश से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो गया. यह हम सबके लिए खुशी की बात है कि बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है.

बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने में कांग्रेस सरकार ने साथ नहीं दिया

मैं 31 मार्च, 2026 के बाद पहली बार बस्तर आया हूं. यहां सेंट्रल रीजनल काउंसिल की 26वीं मीटिंग हुई. बस्तर के लोगों में भविष्य को लेकर उत्साह, आत्मविश्वास का माहौल हर जगह दिख रहा है. कई गैर-बीजेपी सरकारों ने हमारे नक्सल-मुक्त अभियान का समर्थन किया है. लेकिन छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने नक्सल-मुक्त अभियान में हमारा साथ नहीं दिया. 13 दिसंबर, 2023 को यहां बीजेपी की सरकार बनने के तुरंत बाद हमने बस्तर में बचे हुए नक्सलियों को निशाना बनाया.

200 सुरक्षा कैंपों को सेवा डेरा में बदला जाएगा

अमित शाह ने कहा कि कल ही मैंने शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा का उद्घाटन किया. बस्तर में जो 200 सुरक्षा कैंप हैं, उन्हें सेवा डेरा में बदला जाएगा. अमित शाह ने कहा कि पूरे जिले नक्सलवाद से मुक्त करने के लिए भारत सरकार यहां लगभग 200 सुरक्षा कैंप बनाए थे.सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवान इन कैंपों में रहकर इलाके की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे. लेकिन अब बस्तर नक्सल-मुक्त है, इसलिए हमने यह तय किया है कि पहले चरण में इन 200 कैंपों में से 70 या उनमें से लगभग एक-तिहाई को वीर शहीद गुंडाधुर सेवा डेरा में बदल दिया जाएगा.

बस्तर के लोगों ने अपना दर्द साझा किया

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मीडिया से कहा कि बस्तर के लोगों ने अपना दर्द हमसे साझा किया. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार बनने के बाद हमें लगातार उनका गाइडेंस मिला है. बस्तर को नक्सल मुक्त करने का जो संकल्प लिया गया था, उसे जमीन पर उतारना बहुत मुश्किल काम था, लेकिन 31 मार्च, 2026 की तय तारीख तक, सभी नक्सल कैडर खत्म कर दिए गए हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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