झारखंड के 8000 वित्तरहित शिक्षकों ने उपवास रखकर बच्चों को पढ़ाया, 10 अप्रैल को महाधरना

Updated at : 06 Apr 2026 9:00 PM (IST)
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Teachers Protest

बच्चों को क्लासरूम में पढ़ाते शिक्षक. एआई जेनरेटेड फोटो.

Teachers Protest: झारखंड में 8000 वित्तरहित शिक्षकों ने अनुदान रोकने के खिलाफ भूखे रहकर पढ़ाई कराई. शिक्षकों ने सरकार की दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए 10 अप्रैल को रांची में महाधरना का ऐलान किया. काला बिल्ला लगाकर विरोध जारी रहेगा और उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Teachers Protest: झारखंड में वित्तरहित शिक्षकों ने अपने हक की लड़ाई के लिए एक अनोखा और शांतिपूर्ण विरोध का रास्ता अपनाया है. सूबे के करीब 8000 शिक्षक और कर्मचारियों ने भूखे-प्यासे रहकर भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया. उन्होंने यह कदम सरकार की ओर से अनुदान राशि पर रोक लगाने के खिलाफ विरोध के तौर पर उठाया है. उनका कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे, लेकिन सरकार की दोहरी नीति के खिलाफ आवाज उठाना भी जरूरी है.

अनुदान रोकने के फैसले से बढ़ा आक्रोश

शिक्षकों का आरोप है कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 523 संस्थानों में से 223 का अनुदान रोक दिया है. इस फैसले से शिक्षकों और कर्मचारियों में भारी नाराजगी है. उन्होंने कहा कि साल में केवल एक बार मिलने वाला अनुदान भी अगर रोक दिया जाएगा, तो उनके लिए जीवन-यापन करना बेहद मुश्किल हो जाएगा.

भूखे रहकर भी जारी रखा पठन-पाठन

सोमवार को राज्य के विभिन्न इंटर कॉलेज, हाईस्कूल, संस्कृत स्कूल और मदरसों के शिक्षकों ने भूखे रहते हुए भी नियमित रूप से कक्षाएं संचालित कीं. यह विरोध का एक अनूठा तरीका था, जिसमें उन्होंने अपनी ड्यूटी भी निभाई और सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी भी जताई.

दोहरी नीति के खिलाफ उठी जांच की मांग

झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने सरकार पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया है. मोर्चा ने इस पूरे मामले की हाई लेवल जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के अनुदान रोकना शिक्षकों और छात्रों दोनों के भविष्य के साथ अन्याय है.

आंदोलन का अगला चरण: काला बिल्ला और महाधरना

मोर्चा ने अपने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है. सात अप्रैल को सभी शिक्षक काला बिल्ला लगाकर पढ़ाई करेंगे और विरोध दर्ज कराएंगे. इसके बाद 10 अप्रैल को रांची के लोक भवन के सामने महाधरना आयोजित किया जाएगा. इस महाधरने के माध्यम से राज्यपाल से उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी.

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने कई बार शिक्षा सचिव से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं. हर बार आश्वासन मिला, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इससे शिक्षकों में निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ते जा रहे हैं.

चार लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर

वित्तरहित संस्थानों में पढ़ने वाले करीब चार लाख छात्रों की शिक्षा भी इस विवाद से प्रभावित हो रही है. शिक्षकों का कहना है कि वे सीमित संसाधनों में भी बच्चों को पढ़ा रहे हैं, लेकिन अगर अनुदान नहीं मिला, तो शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

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आंदोलन को और तेज करने की दी चेतावनी

मोर्चा ने साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे और कड़े कदम उठाएंगे. यहां तक कि उन्होंने यह भी कहा है कि वे ऑनलाइन अपीलीय आवेदन भरने की प्रक्रिया का बहिष्कार कर सकते हैं. फिलहाल, राज्य में यह मुद्दा तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है और सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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