कोलपाड़ा टोला के लोग अंधेरे में जी रहे हैं जीवन

Updated at : 02 Apr 2026 9:10 PM (IST)
विज्ञापन
कोलपाड़ा टोला के लोग अंधेरे में जी रहे हैं जीवन

जामताड़ा. सदर प्रखंड की उदलबनी पंचायत अंतर्गत आसनचुआं गांव के कोलपाड़ा टोला में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है.

विज्ञापन

जिले का हाल. उदलबनी पंचायत के आसनचुआं गांव में अबतक नहीं पहुंची बिजली संवाददाता, जामताड़ा. सदर प्रखंड की उदलबनी पंचायत अंतर्गत आसनचुआं गांव के कोलपाड़ा टोला में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है. महज 10 घरों का यह छोटा सा टोला के लोगों का अब जीवन कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है. गांव में न तो नियमित बिजली है और न ही ढिबरी जलाने के लिए पर्याप्त केरोसिन. ऐसे में ग्रामीणों ने किसी तरह दूसरे स्थान से मोबाइल व टॉर्च चार्ज कर लाते हैं और एक बल्ब के सहारे रात बीता रहे हैं. उसी सीमित रोशनी में पूरा परिवार अपना दैनिक जीवन चलाता है. इसका सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, जो अंधेरे और सीमित रोशनी में पढ़ने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2006 में जोरिया पार कोलपाड़ा क्षेत्र में बिजली के खंभे गिराए गए थे. उस समय उम्मीद जगी थी कि जल्द ही गांव में बिजली पहुंचेगी. कुछ ग्रामीण चार-पांच खंभे अपने टोले तक भी ले आए, लेकिन बिजली आज तक नहीं आ सकी. परिणामस्वरूप आज भी शाम होते ही गांव अंधेरे में डूब जाता है. लोग टार्च के सहारे जीवन यापन करते हैं. टार्च भी वह पास के दूसरे टोले में जाकर चार्ज कराते हैं. ग्रामीण सुखदेव कोल, सूरज कोल, लक्ष्मी कुमारी और रीना देवी बताते हैं कि जब खंभे आए थे तो लगा था कि अंधेरा दूर होगा, लेकिन वह सपना अधूरा ही रह गया. आज भी वे बदतर स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं. गांव में पेयजल के लिए केवल एक चापानल है. सरकारी आवास योजना का लाभ तो मिला, लेकिन बिजली के अभाव में विकास अधूरा है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जल्द बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि उनके जीवन में भी उजाला आ सके. जल्द खंभा व तार लगाए जाएंगे : ईई मामले को संज्ञान में लिया गया है. कोलपाड़ा टोला में अब तक कोई उपभोक्ता नहीं था. इसी कारण बिजली कनेक्शन नहीं दिया जा सका. उन्होंने आश्वासन दिया कि एक-दो दिनों में खंभे गाड़कर तार खींच दिया जायेगा. ग्रामीणों को बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन देकर उपभोक्ता बनना होगा, तभी उनके घरों तक बिजली पहुंच सकेगी. – अभिषेक आनंद, ईई, बिजली विभाग ग्रामीणों ने कहा – वर्ष 2006 में गांव में बिजली के लिए खंभा आया था. सभी घरों को मीटर भी दिया गया था. कनेक्शन नहीं दिया गया. अब तक मुश्किल से रात बीता रहे हैं. कुछ लोग आए थे. बिजली देने का आश्वासन दिए हैं. -सुकदेव कोल, ग्रामीण गांव में बिजली नहीं रहने से बच्चों को रात में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं. हर काम दिन में ही निबटना पड़ता है. खंभा आने के बाद बिजली आने की उम्मीद थी. 20 वर्ष गुजर गए, देखिए कब बिजली का सपना पूरा होगा. -सूरज कोल, ग्रामीण – सोलर से बैटरी चार्ज करते हैं. घर में एक जगह बल्ब जला दिया जाता है. इससे भी को काम निबटाना पड़ता है. इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. रात में रसोई काम करने में परेशानी होती है. – लक्ष्मी कुमारी, ग्रामीण – मोबाइल चार्ज कराने के लिए दूसरे टोले पर निर्भर हैं, जब से इस गांव में आए है, बिजली नहीं देखे हैं. जंगल किनारे गांव है. प्रशासन से जल्द बिजली देने की मांग करते हैं. – रानी देवी, ग्रामीण

विज्ञापन
UMESH KUMAR

लेखक के बारे में

By UMESH KUMAR

UMESH KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola