2 फरवरी को आ सकता है अहम फैसला, जिओ ग्रेड के भविष्य को लेकर टेल्को वर्कर्स यूनियन की याचिका पर टिकी उम्मीदें

Published by : ASHOK JHA Updated At : 30 Jan 2026 10:12 PM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

टाटा मोटर्स में यूनियन विवाद और जिओ ग्रेड का मामला अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है. कानूनी स्थितियों ने हजारों मजदूरों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है.

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हाइकोर्ट ने छह कर्मियों की रिट याचिका की खारिज, कहा- निजी पक्ष के विरुद्ध प्रत्यक्ष आदेश संभव नहीं

वरीय संवाददाता, जमशेदपुर

टाटा मोटर्स में यूनियन विवाद और जिओ ग्रेड का मामला अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुका है. हाइकोर्ट के रुख और बदलती कानूनी स्थितियों ने हजारों मजदूरों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है. हाइकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच कर्मियों की नजरें अब 2 फरवरी के फैसले पर टिकी हैं. यूनियन की सदस्यता के पेच और जिओ ग्रेड के भविष्य के बीच झारखंड हाइकोर्ट में सरगर्मी चरम पर है. गुरुवार को अदालत में दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हुई. जिसके बाद औद्योगिक गलियारे में चर्चाओं का बाजार गर्म है. एक ओर व्यक्तिगत रूप से दायर याचिका को अदालत ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया. वहीं, टेल्को वर्कर्स यूनियन (रजि. 98) की याचिका पर 2 फरवरी 2026 को आने वाले संभावित फैसले ने कर्मचारियों की उम्मीदें जगा दी हैं.

निजी याचिका खारिज, अनुच्छेद 12 बना आधार

झारखंड हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने टाटा मोटर्स के बाइ-सिक्स कर्मचारी अशोक कुमार अहिर और छह अन्य द्वारा दायर रिट याचिका (डब्ल्यूपीसी 2292/2024) को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया. अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत रिट न्यायालय केवल संवैधानिक या वैधानिक प्राधिकरणों के विरुद्ध ही आदेश जारी कर सकती है. किसी निजी प्रतिष्ठान या पक्ष को प्रत्यक्ष आदेश देना रिट कोर्ट के क्षेत्राधिकार में नहीं आता. इस याचिका में जिओ ग्रेड को पुराने वेतन ढांचे में शामिल करने और बैक वेजेज की मांग की गयी थी.

2 फरवरी के फैसले पर टिकी हैं निगाहें

टेल्को वर्कर्स यूनियन के प्रवक्ता हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि व्यक्तिगत याचिका भले ही खारिज हुई हो, लेकिन टेल्को वर्कर्स यूनियन की याचिका (डब्ल्यूपीसी 7038/2017) पर बहस अंतिम दौर में है. इस मामले में 2 फरवरी को फैसला आने की संभावना है. यह याचिका यूनियन की सदस्यता और संविधान संशोधन की वैधता को लेकर है. यदि फैसला यूनियन के पक्ष में आता है, तो जिओ ग्रेड कर्मचारियों के लिए पुराने वेतन ढांचे और बकाया राशि के रास्ते खुल सकते हैं.

समझौते के नाम पर हुआ मजदूरों का अहित

यूनियन के महामंत्री प्रकाश कुमार, उपाध्यक्ष आकाश दुबे और प्रवक्ता हर्षवर्धन सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में बनी टीएमएल ड्राइव लाइन कंपनी का 2017 में टाटा मोटर्स में विलय हुआ था. जिसके साथ ही पुरानी यूनियन का अस्तित्व खत्म हो गया था, लेकिन कुछ लोगों ने अवैध तरीके से संविधान संशोधन कर नयी यूनियन बनायी और ड्राइव लाइन के सदस्यों को शामिल कर लिया.

कानूनी लड़ाई जारी रहेगी

टेल्को वर्कर्स यूनियन ने दोहराया कि उन्होंने याचिका संख्या ( डब्ल्यूपीसी 3209/2024) में डीएलसी और एलसी को पक्षकार बनाया है. जो कि वैधानिक संस्थाएं हैं. यूनियन के नेताओं ने कहा कि वे मजदूरों के अधिकारों की रक्षा और जिओ ग्रेड को न्याय दिलाने के लिए अंतिम सांस तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे. 2 फरवरी 2026 को आने वाला फैसला तय कर सकता है कि जिओ ग्रेड का भविष्य क्या होगा.

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