Jamshedpur News : टीबी उन्मूलन में मेडिकल कॉलेजों का अहम रोल : डॉ कमलेश
Published by : RAJESH SINGH Updated At : 27 May 2026 1:37 AM
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देश में टीबी को खत्म करने के लिए मेडिकल कॉलेज का अहम रोल साबित हो सकता है. इसको देखते हुए मेडिकल कॉलेजों को अब रिसर्च और सामुदायिक भागीदारी का बड़ा केंद्र बनाया जायेगा.
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Jamshedpur News :
देश में टीबी को खत्म करने के लिए मेडिकल कॉलेज का अहम रोल साबित हो सकता है. इसको देखते हुए मेडिकल कॉलेजों को अब रिसर्च और सामुदायिक भागीदारी का बड़ा केंद्र बनाया जायेगा. उक्त बातें मंगलवार को साकची स्थित एक होटल में आयोजित स्टेट टास्क फोर्स ऑन टीबी की बैठक में उपस्थित स्टेट टीबी पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार ने कही. उन्होंने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेज न सिर्फ गंभीर टीबी मरीजों के इलाज और जांच पर फोकस करेंगे, बल्कि आसपास के गांवों को गोद लेकर उन्हें टीबी मुक्त बनाने की दिशा में भी काम करेंगे. 24 मार्च से 100 दिवसीय विशेष अभियान भी जारी है. उन्होंने बताया कि पीजी छात्रों और युवाओं को टीबी रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा. छात्र अपनी रिसर्च का विषय चुनकर स्टेट टास्क फोर्स को प्रस्ताव देंगे. विषय चयनित होने पर रिसर्च में होने वाला पूरा खर्च विभाग उठायेगा. इससे नयी दवाओं, संक्रमण के कारणों, ग्रामीण इलाकों में फैलाव और रोकथाम के बेहतर तरीकों पर शोध हो सकेगा. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के सभी विभाग अगर मिलकर काम करेंगे, तो टीबी को आसानी से हराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि फिलहाल झारखंड की 4345 पंचायतों में से 455 टीबी मुक्त घोषित हो चुके हैं. इसके पहले इस कार्यक्रम का उद्घाटन सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल, एसीएमओ डॉ. अजय कुमार सिन्हा, जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. जोगेश्वर प्रसाद और डब्ल्यूएचओ कंसल्टेंट डॉ. सतीश मांझी, डॉ. मनोज कुमार ने संयुक्त रूप से किया. इस कार्यक्रम में झारखंड के सभी 11 मेडिकल कॉलेजों के टीबी एवं चेस्ट विभाग, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों के साथ स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल थे.एमजीएम 12 बेड का चल रहा है एमडीआर टीबी वार्ड
डॉ कमलेश ने कहा कि एमजीएम अस्पताल में एमडीआर टीबी मरीजों के लिए 12 बेड का अलग वार्ड तैयार किया गया है. वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ट्रूनेट मशीन और पोर्टेबल एक्सरे मशीन उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अति कुपोषित और बीसीजी का टीका नहीं लेने वाले बच्चों में टीबी का खतरा अधिक रहता है. ऐसे बच्चों की पहचान और समय पर जांच बेहद जरूरी है.जनआंदोलन से हो सकता है जिला टीबी मुक्त
कार्यक्रम में शामिल सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल ने कहा कि टीबी गंभीर बीमारी है, लेकिन समय पर इलाज होने से यह पूरी तरह से ठीक हो सकता है. उन्होंने कहा, जब युवा सही जानकारी लेकर आगे आयेंगे, तभी टीबी उन्मूलन एक जनआंदोलन का रूप ले सकेगा. वहीं रिम्स के डॉ मनोज कुमार ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान तभी सफल होगा, जब सभी मेडिकल कॉलेज सक्रिय भागीदारी निभायेंगे.प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
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