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संताल के इस गांव ने महिला सशक्तीकरण का दिया संदेश, रश्मि बनीं माझी आयो और बाहामाई को जोग माझी आयो की जिम्मेदारी

Updated at : 28 Jan 2025 12:15 PM (IST)
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डीबाडीह गांव में डीबा किसुन की मूर्ति के पास खड़ी माझी आयो एवं जोग माझी आयो एवं अन्य ग्रामीण

डीबाडीह गांव में डीबा किसुन की मूर्ति के पास खड़ी माझी आयो एवं जोग माझी आयो एवं अन्य ग्रामीण

संताल समाज में महिला सशक्तीकरण की दिशा में शहीद ग्राम डीबाडीह ने ऐतिहासिक कदम उठाया है. डीबाडीह गांव में रश्मि मार्डी माझी आयो और बाहामाई मार्डी जोग माझी आयो बनी हैं.

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जमशेदपुर: संताल समाज में परंपरागत रूप से पुरुष प्रधानता रही है, लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड के डीबाडीह गांव ने एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत की है. ग्राम सभा ने रश्मि मार्डी को माझी आयो (महिला ग्राम प्रधान) और बाहामाई मार्डी को जोग माझी आयो (सह महिला ग्राम प्रधान) के रूप में चयनित किया. यह पहली बार है जब किसी महिला को इस जिम्मेदारी के लिए चुना गया है. डीबाडीह गांव का यह निर्णय महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है. मातकोमबेड़ा से अलग होकर डीबाडीह गांव में संताल समाज के परंपरागत नियमों का पालन करते हुए नयी ग्राम सभा का गठन किया गया. ग्राम सभा में नायके बाबा के रूप में परमेश्वर मुर्मू, पारानिक बाबा के रूप में कंदरु टुडू और बुद्धिजीवियों के रूप में इंद्राय हांसदा, सकला सोरेन, निमय मार्डी और मधु हांसदा का चयन किया गया. पारंपरिक रीति-रिवाजों और संविधान के अनुसार सभी को शपथ दिलायी गयी. शहीद ग्राम डीबाडीह का यह कदम सामाजिक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ाया गया एक ऐतिहासिक प्रयास है. यह न केवल संताल समाज बल्कि अन्य समुदायों के लिए भी एक मिसाल बनेगा.

महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा


डीबाडीह गांव में महिलाओं को ग्राम प्रधान के रूप में चुना जाना संताल समाज के लिए नयी उम्मीद की किरण है. जहां पहले यह पद केवल पुरुषों तक सीमित था, वहां इस पहल ने यह साबित किया है कि महिलाएं भी नेतृत्व की भूमिका बखूबी निभा सकती हैं. यह पहल न केवल महिलाओं के अधिकारों को सशक्त कर रही है, बल्कि समाज को नयी दिशा भी दे रही हैं. डीबाडीह का यह कदम अन्य गांवों और समाजों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा.

ग्रामसभा में ये थे मौजूद


रविवार को डीबाडीह गांव में हुई ग्रामसभा में मालती हांसदा, तिलोका कर्मकार, जसमी सोरेन , कविता मुर्मू , पोमा मार्डी , लखिमुनी सोरेन , पानी सोरेन, रुकमणि हांसदा, शिल्पा कर्मकार, सालगे सोरेन, जोबा हांसदा, आरती हांसदा, गाजी बेसरा, जीतेन्द्र हांसदा, , होपना सोरेन, चैतन सोरेन, डूपू मुर्मू, बाबुराम बास्के, संजय सोरेन, कारा चोड़े, बानगी किस्कू, साहील हांसदा, प्रधान मार्डी, धुनु मार्डी, बुधुराम मुर्मू, मधु बास्के, सोमबरी सोरेन, रांवदे सोरेन, कपरा सोरेन, छिता मार्डी, सुशिल सोरेन, राकेश सोरेन, जीतराय हांसदा, धनु हांसदा समेत काफी संख्या में ग्रामवासी मौजूद थे.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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