मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 16 जून को दिखायी जायेगी संताली शॉर्ट फिल्म 'आंगेन', सभी कलाकार जमशेदपुर के

Updated at : 10 Jun 2024 9:37 PM (IST)
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संताली शॉर्ट फिल्म आंगेन

संताली शॉर्ट फिल्म आंगेन

मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 16 जून को जमशेदपुर की संताली शॉर्ट फिल्म 'आंगेन' दिखायी जाएगी. इसमें सभी कलाकार जमशेदपुर के हैं.

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जमशेदपुर, दशमत सोरेन: 18वें मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जमशेदपुर की संताली फिल्म ‘आंगेन’ को भी एंट्री मिली है. 15 से 21 जून तक मुंबई में फेस्टिवल का आयोजन किया जायेगा. इसमें दिखाई जाने वाली फिल्मों का प्रदर्शन दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और पुणे में भी किया जायेगा. संताली फिल्म ‘आंगेन’ को 16 जून को दिखायी जायेगी. मुंबई समेत उक्त चारों महानगरों में भी यह फिल्म दिखायी जायेगी. मुंबई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पहली बार किसी संताली फिल्म को जगह मिली है. ‘आंगेन’ 12 मिनट की शॉर्ट फिल्म है.

जमशेदपुर से सटे आदिवासी गांवों में हुई है शूटिंग

फिल्म के निर्माता-निर्देशक रविराज मुर्मू हैं. वे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे के छात्र रहे हैं. रविराज ने बताया कि ‘आंगेन’ फिल्म की शूटिंग जमशेदपुर से सटे आदिवासी बहुल इलाकों करनडीह, तुरामडीह, छोलागोड़ा और कीनूटोला में की गयी है. फिल्म में रामचंद्र मार्डी, सलोनी, जितराई व फूलमनी ने बेहतरीन अभिनय किया है. ये सभी कलाकार जमशेदपुर के हैं. साहित्यकार, गीतकार व लोक गायक दुर्गा प्रसाद मुर्मू ने धुन तैयार किया है तथा नूनाराम ने फिल्म को संगीत दिया है. फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर निशांत राम टेके हैं.

दो कंपनियों ने मिलकर किया है काम

झारखंड की जनजातीय फिल्मों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने और पहचान दिलाने का बीड़ा कोल्हान के ही पांच युवाओं ने उठाया है. इनमें रविराज मुर्मू, संजय कुमार टुडू, सेराल मुर्मू, कृष्णा सोरेन और राहुल बिरूली शामिल हैं. फिल्मों के निर्माण के लिए इन्होंने दो कंपनी दलमा मोशन पिक्चर्स और सांवता स्टूडियो बनाया है. इन दोनों कंपनियों के बैनर तले ही संताली फिल्म ‘आंगेन’ का निर्माण हुआ है.

संताली लोककथा पर आधारित है फिल्म

रविराज मुर्मू ने बताया कि गांवों में कई लोक कथाएं प्रचलित हैं. इनमें जनजातीय समुदाय के अनुभव और संघर्ष के सार छिपे होते हैं. सांस्कृतिक विरासत के साथ ऐतिहासिक तथ्य भी होते हैं. लोक कथाएं सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सामूहिक सफर की जटिलताओं को भी दर्शाती हैं. फिल्म की कहानी धरती और देवलोक की है. देवलोक की एक सुंदरी को धरती के एक चरवाहे से प्रेम हो जाता है. वह अपनी दिव्य शक्ति से चरवाहा युवक को सम्मोहित कर लेती है और अपने साथ देवलोक में ले जाती है. लेकिन जब वह युवक सम्मोहन से जागता है, तो महसूस करता है कि वह देवी के प्रेम में बंधकर उसके लोक में चला आया है. फिर वह वहां से धरती लोक पर चला आता है. कहानी में कई रोचक मोड़ हैं, जो लोगों में उत्सुकता जगाते हैं. कहानी पर बारीकी से काम किया गया है, जो दर्शकों को बांधे रखता है.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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