jamshedpur news : दलमा में मिले मांसाहारी पौधे, हैबिटेट होगा बेहतर

कम पोषक तत्व, अम्लीय और नम मिट्टी वाले क्षेत्र में उगते हैं ये पौधे
कम पोषक तत्व, अम्लीय और नम मिट्टी वाले क्षेत्र में उगते हैं ये पौधे
कीट, लार्वा, प्रोटोजोआ जैसे जीवों से प्राप्त करते हैं पोषक तत्व
jamshedpur news :
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को वैसे तो हाथियों के अभ्यारण्य के रूप में जाना जाता है. लेकिन, इस जंगल में मांसाहारी पौधे भी मिले हैं. नये पौधे मिलने से खुशी का माहौल है, क्योंकि ये वहां के कई सारे कीड़ों को खाते हैं. इससे हैबिटेट (पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव का प्राकृतिक घर) बेहतर होगा. वन विभाग के स्तर पर लगातार क्षेत्र में गश्ती और वन संरक्षण में लगे कर्मचारियों के कारण इस तरह के मांसाहारी पौधे की पहचान हो पायी है. अब इसको संरक्षित करने का प्रयास शुरू किया गया है. मांसाहारी पौधा ड्रोसेरा बर्मानी है. इसको दलमा के पटमदा वाले क्षेत्र में पाया गया है, जबकि बालीगुमा क्षेत्र में भी कई सारे पौधे मिले हैं. यह पौधे कम पोषक तत्व, अम्लीय और नम मिट्टी वाले क्षेत्र में उगते हैं और मिट्टी से जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन न मिलने के कारण कीटों को खाकर अपने पोषण की पूर्ति करते हैं. इसे दलदली और पोषक तत्व-रहित जगहें (जैसे भारत के कई हिस्सों, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया) पनपने में मदद करती हैं. यह अपने पत्तों पर मौजूद चिपचिपी बूंदों से कीटों को फंसाकर प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व प्राप्त करता है. इसे ऐसी मिट्टी चाहिए, जिसमें पानी रुकता हो और पोषक तत्व कम हों, जैसे पीट मॉस या रेत-मिश्रित मिट्टी, ताकि इसकी जड़ें सड़े नहीं और यह कीटों का शिकार कर सके.इसी तरह दलमा के कोंकादाशा में भी मांसाहारी पौधा दिखा. इसमें यूटिकुलेरिया, यानी ब्लैडरवॉर्ट पाया गया है. यह पानी या नम मिट्टी में पाया जाता है और छोटे जीवों जैसे कीट, लार्वा, प्रोटोजोआ को अपने छोटे-छोटे ब्लैडर (थैलीनुमा संरचनाएं) जैसे जाल में फंसाकर खाता है, जो इसे नाइट्रोजन की कमी पूरी करने में मदद करता है. इसके ब्लैडर में एक दरवाजा होता है. जब कोई छोटा जीव पास आता है, तो दरवाजा खुलता है और पानी के साथ जीव अंदर खींच लेता है और फिर बंद हो जाता है. हाल ही में यह पौधा राजस्थान के केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में भी देखा गया है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
पौधों के संरक्षण में जुटा वन विभाग
डीएफओ सबा आलम अंसारी ने कहा कि दलमा क्षेत्र में मांसाहारी पौधे मिलना यह बताता है कि किस तरह का हैबिटेट यहां विकसित है. इस तरह की कई ऐसी दुर्लभ प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं, जिसको विशेष तौर पर दलमा में संरक्षित किया जा रहा है. इसको लेकर वन विभाग की पूरी टीम काम कर रही है.
कई जगहों पर मिले हैं मांसाहारी पौधे
फॉरेस्ट गार्ड सह शोधार्थी राजा घोष ने बताया कि दलमा के जंगल में मांसाहारी पौधे कई जगहों पर पाये गये हैं. इस तरह की कई प्रजातियों के पौधे मिले हैं. इसकी जानकारी वन विभाग के वरीय अधिकारियों की दी गयी है, ताकि उन इलाकों में मानव की इंट्री को रोक कर ऐसे पौधों का संरक्षण किया जा सके.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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