जमशेदपुर : स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के स्वागत में ढाई घंटे जाम रहा जमशेदपुर, एंबुलेंस फंसी
Updated at : 03 Feb 2020 7:25 AM (IST)
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जमशेदपुर : स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद बन्ना गुप्ता पहली बार रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र जमशेदपुर पहुंचे. उनके स्वागत के लिए उमड़ी भीड़ से जमशेदपुर का मानगो चौक पूरी तरह जाम हो गया. इसमें कई एंबुलेंस भी फंस गयी थी. इसी दौरान वहां फंसी एंबुलेंस में एक मरीज की मौत की खबर आयी. एंबुलेंस […]
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जमशेदपुर : स्वास्थ्य मंत्री बनने के बाद बन्ना गुप्ता पहली बार रविवार को अपने विधानसभा क्षेत्र जमशेदपुर पहुंचे. उनके स्वागत के लिए उमड़ी भीड़ से जमशेदपुर का मानगो चौक पूरी तरह जाम हो गया. इसमें कई एंबुलेंस भी फंस गयी थी. इसी दौरान वहां फंसी एंबुलेंस में एक मरीज की मौत की खबर आयी.
एंबुलेंस के चालक ने मीडिया को बयान दिया कि वह लोगों से रास्ता मांगता रह गया, लेकिन लोगों ने रास्ता नहीं दिया और एंबुलेंस में ही मरीज की मौत हो गयी. इधर जब यह खबर तूल पकड़ने लगी, तो देर शाम बन्ना गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें उक्त चालक को लेकर वह पत्रकारों के सामने आये. इसमें चालक मो खालिद अपने पहले के बयान से पूरी तरह मुकर गया. उसने कहा कि एंबुलेंस में वह शव लेकर जा रहा था. मरीज की मौत एक दिन पहले ही हो गयी थी. जाम में जाने का रास्ता मिल जाये, इसलिए लोगों से एंबुलेंस में मरीज होने की झूठी बात कही और मीडिया को भी गलत बयान दिया.
क्या है मामला : रविवार को स्वास्थ्य मंत्री के स्वागत कार्यक्रम की वजह से मानगो-डिमना रोड करीब ढाई घंटे तक जाम रहा. इस दौरान शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी और वाहन जहां के तहां फंसे रहे. ऐसी परिस्थिति बन गयी कि एंबुलेंस चालक भी भीड़ से वाहन को बाहर नहीं निकाल पाये. इस बीच एंबुलेंस ( बीआर 16 इ 5922) का चालक मो खालिद सड़क पर निकल कर जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि उसके एंबुलेंस में गंभीर मरीज है. उसे अस्पताल ले जाने के लिए रास्ता दिया जाये. पर उसे रास्ता नहीं मिला. बाद में वह चालक जोर-जोर से चिल्लाने लगा कि एंबुलेंस में मरीज की मौत हो गयी.
वहां बताया गया कि सरायकेला से वृद्ध मरीज तापस को रविवार को दोपहर करीब 1.00 बजे एमजीएम अस्पताल लाया गया था. उसकी स्थिति काफी गंभीर थी. एमजीएम में डॉक्टरों ने मरीज को टीएमएच ले जाने के लिए कहा. परिजनों ने आपस में बातचीत करने के बाद तय किया कि टीएमएच ले जाने पर तत्काल 20 हजार रुपये लगेंगे, जो कि परिजन के पास नहीं थे. इसके बाद परिजनों ने निर्णय लिया कि मरीज को गंगा मेमोरियल अस्पताल ले जाया जाये. इसी क्रम में एंबुलेंस जाम में फंसी.
बेबस और लाचार नजर आयी पुलिस, नहीं थी कोई तैयारी
बन्ना गुप्ता के शहर पहुंचने की तिथि पूर्व से ही तय थी, जिसको लेकर अलग-अलग संगठनों के साथ ही राजनीतिक दलों के सदस्य व अन्य लोग उनके स्वागत के लिए सड़कों पर टेंट लगा कर बैठे थे. जब तय समय पर बन्ना गुप्ता पहुंचे, तो उनके स्वागत की होड़ मच गयी. इस दौरान ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए पुलिस की ओर से कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं की गयी थी. सामान्य दिनों की तरह ही पुलिसकर्मी ड्यूटी करते दिखे. हालांकि जाम खत्म होने के बाद उन्होंने मानगो पुल से पहले हेलमेट चेकिंग जरूर शुरू कर दी थी.
बन्ना गुप्ता के विजय जुलूस में पूर्व में भी हो चुकी है एक मौत
बन्ना गुप्ता ने पहली बार वर्ष 2009 में जमशेदपुर पश्चिमी सीट से जीत दर्ज की थी. इसके बाद उन्होंने विजय जुलूस निकाला था, जिसमें उत्साही युवकों ने फायरिंग की थी ओर गोली लगने से कदमा के बंटी रजक की मौत हो गयी थी. उस घटना से सबक लेते हुए बन्ना गुप्ता ने इस वर्ष जीतने के बाद किसी प्रकार का कोई विजय जुलूस नहीं निकाला था, लेकिन इस बार उनके स्वागत में लगी जाम में फंस कर मरीज की मौत हो गयी.
कहीं लड्डू से तौला गया, तो कहीं आतिशबाजी
शहर पहुंचने के बाद बन्ना गुप्ता का उनके समर्थकों ने खुले दिल से स्वागत किया. कहीं उन्हें लड्डू से तौला गया, तो कहीं उनके आगमन को लेकर आतिशबाजी हुई. उनके स्वागत के लिए खास तौर पर रामगढ़ से बैंड बाजा को बुलाया गया था. इस बैंड पर लोग थिरक रहे थे.
एंबुलेंस का रास्ता रोकनेवालों पर जुर्माना से लेकर सजा तक का प्रावधान
– मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस को किसी भी परिस्थिति में नहीं रोका जा सकता है.
– एंबुलेंस का रास्ता रोकने पर 10 हजार रुपये जुर्माना और छह माह कारावास की सजा, दोनों का प्रावधान है.
– किसी चौक पर रेड सिग्नल में एंबुलेंस के फंसे होने पर यह चौक पर तैनात पुलिस की जिम्मेवारी है कि वह ट्रैफिक नियमों में छूट देते हुए तत्काल एंबुलेंस को पार कराने की कार्रवाई करे.
– अगर किसी पुलिस पदाधिकारी या सरकारी सेवक ने एंबलेंस के जाम में फंसे होने की सूचना के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की, तो उसके खिलाफ आइपीसी की धारा 119 के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
1. जाम में एक एंबुलेंस का चालक निकल कर जोर-जोर से चिल्ला रहा था कि उसके वाहन में गंभीर मरीज है, उसे जाने दिया जाये. थोड़ी देर बाद वह चिल्लाने लगा कि एंबुलेंस में ही मरीज की मौत हो गयी.
(इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है)
2. देर शाम 10 बजे बन्ना गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस की. उसमें वह उस एंबुलेंस के चालक को लेकर पहुंचे. प्रेस कांफ्रेंस में चालक ने कहा कि मरीज की पहले ही मौत हो गयी थी. सिर्फ जाम से निकलने के लिए उसने वहां मरीज के गंभीर होने की बात कही
और मीडिया को मंत्री की चेतावनी…
मंत्री बन्ना गुप्ता ने देर शाम प्रेस कांफ्रेंस की. उन्होंने पूरे प्रकरण का ठीकरा मीडिया के मत्थे मढ़ा. कहा कि उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास कुछ लोगों द्वारा की गयी.
श्री गुप्ता ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है. बन्ना गुप्ता से किसी को व्यक्तिगत तौर पर परेशानी हो सकती है, लेकिन चीजों को फैबरिकेटे कर झूठी कहानी रचना गलत बात है. इस प्रकार यदि बन्ना गुप्ता और झारखंड सरकार को बदनाम करने की कोशिश की जायेगी, तो इसके बुरे परिणाम होंगे.
उठ रहे सवाल
1. मरीज की मौत एक िदन पहले हो गयी थी, तो उसका पोस्टमार्टम एक दिन बाद क्यों कराने भेजा गया था.
2. मरीजों के लिए इस्तेमाल होनेवाली एंबुलेंस में शव रखकर कैसे भेजा जा रहा था.
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