कुल्हाड़ी व तीर-धनुष ले स्कूल में पढ़ रहे बच्चे
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Jan 2020 2:11 AM
दस जनवरी से बाघ को लेकर बीहड़ के ग्रामीण भयभीत, नौ दिन बाद भी दहशत कायम गालूडीह : झारखंड-बंगाल सीमा से सटे घाटशिला वन क्षेत्र के मिर्गीटांड़ के ग्रामीण बाघ और हाथी से खौफजदा हैं. वहीं शनिवार दोपहर घाटशिला के रेंजर दिनेश प्रसाद अन्य वनरक्षियों के साथ मिर्गीटांड़ गांव पहुंचे और चोंगा लेकर ग्रामीणों को […]
दस जनवरी से बाघ को लेकर बीहड़ के ग्रामीण भयभीत, नौ दिन बाद भी दहशत कायम
गालूडीह : झारखंड-बंगाल सीमा से सटे घाटशिला वन क्षेत्र के मिर्गीटांड़ के ग्रामीण बाघ और हाथी से खौफजदा हैं. वहीं शनिवार दोपहर घाटशिला के रेंजर दिनेश प्रसाद अन्य वनरक्षियों के साथ मिर्गीटांड़ गांव पहुंचे और चोंगा लेकर ग्रामीणों को अलर्ट किया. रेंजर ने कहा कि बेवजह भय में नहीं रहे. जंगल में नहीं जायें.
रात में सतर्कता बरते. अफवाह नहीं फैलायें न फैलने दें. मिर्गीटांड़ पहाड़ों से घिरा गांव है. गांव के पास पहाड़ की तलहटी पर मिर्गीटांड़ प्राथमिक विद्यालय है. यहां केजी से 5वीं तक में 24 बच्चे नामांकित हैं. स्कूल में दो पारा शिक्षक बंकीम चंद्र महतो और कृति वास महतो कार्यरत है.
शुक्रवार को भय से 24 में से सिर्फ सात बच्चे स्कूल आये थे. वहीं शनिवार को 16 बच्चे स्कूल पहुंचे थे. मिर्गीटांड़ गांव के गाड़ुपानी नामक टोला, जो स्कूल के कुछ दूर है. स्कूल आने का रास्ता जंगल व पहाड़ी से होकर है. वहां के कक्षा दो से पांचवीं तक के आठ बच्चे स्कूल में नामांकित हैं. उक्त बच्चे अपनी सुरक्षा के लिए स्कूल बैग के साथ-साथ हाथों में कुल्हाड़ी और तीर-धनुष लेकर स्कूल आ रहे हैं.
गाड़ूपानी के बच्चों के अभिभावक भी तीर-धनुष व कुल्हाड़ी-फरसा लेकर बच्चों को स्कूल तक पहुंचाते हैं. छुट्टी के बाद फिर अभिभावक बच्चों को साथ लेकर घर लौटते हैं. मिर्गीटांड़ के कई ग्रामीण पाली अनुसार स्कूल अवधि के दौरान पहरेदारी करते हैं. पहाड़ी इलाका होने के कारण इस गांव में ठंड भी काफी है.
इसके कारण शिक्षक स्कूल के बाहर दरी बिछा कर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. कक्षा जब चलती है, तो बच्चे अपने पास ही जमीन पर तीर-धनुष और कुल्हाड़ी रखकर पढ़ाई कर रहे हैं. मिर्गीटांड़ के रवि टुडू का कुछ दिन पहले हाथियों ने घर भी तोड़ दिया था. गांव के रामचंद्र किस्कू, रवि टुडू आदि ने बताया कि मिर्गीटांड़ में सालों भर हाथियों का आतंक रहता है. अब बाघ का भय भी सताने लगा है.
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