जमशेदपुर : 70 लोगों के कृत्रिम अंगों का सफल प्रत्यारोपण
Updated at : 14 Oct 2019 9:32 AM (IST)
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जयपुर फुट यूएसए व केके एजुकेशन फाउंडेशन के कैंप में दिव्यांगों को मिली नयी रोशनी ट्राइ साइकिल व ह्वील चेयर भी बांटे गये जमशेदपुर : रेड क्रास भवन में आयोजित राज्य स्तरीय मेगा दिव्यांग कैंप में रविवार को कुल 70 लोगों के कृत्रिम अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया गया. रविवार को जमशेदपुर के अलावा आसपास […]
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जयपुर फुट यूएसए व केके एजुकेशन फाउंडेशन के कैंप में दिव्यांगों को मिली नयी रोशनी
ट्राइ साइकिल व ह्वील चेयर भी बांटे गये
जमशेदपुर : रेड क्रास भवन में आयोजित राज्य स्तरीय मेगा दिव्यांग कैंप में रविवार को कुल 70 लोगों के कृत्रिम अंगों का सफल प्रत्यारोपण किया गया. रविवार को जमशेदपुर के अलावा आसपास के दिव्यांगों ने ही हिस्सा लिया. जयपुर फुट यूएसए व केके एजुकेशन फाउंडेशन की अोर से संयुक्त रूप से आयोजित इस कैंप में दिव्यांगों को उनकी जरूरतों के मुताबिक ट्राइ साइकिल के साथ ही ह्वील चेयर भी वितरित किये गये.
केके एजुकेशन फाउंडेशन के चेयरमैन विकास सिंह व उनकी टीम ने कैंप का जायजा लिया अौर सभी दिव्यांगों से मुलाकात भी की. कैंप के जरिये करीब 1000 दिव्यांगों के कृत्रिम अंगों का प्रत्यारोपण किया जायेगा. इधर, जयपुर फुट यूएसए के चेयरमैन डॉ प्रेम भंडारी शनिवार को ही जोधपुर के लिए रवाना हो गये. प्रभात खबर से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि उनकी मां को पारालाइसिस अटैक आया हुआ था. लेकिन वे इस कैंप में शामिल होने के लिए उसके बावजूद पहुंचे. यही कारण था कि कैंप के उद्घाटन के बाद वे वापस लौट गये. अगर सारा कुछ ठीक रहा, तो वे दुबारा कैंप में शामिल होंगे.
1. पटरी पार करते वक्त कट गया पैर, लेकिन पांव पाकर जीवन बनेगा सरल : राजू
बात 2013 की है. परसूडीह का रहने वाला राजू प्रमाणिक सालगाझुड़ी के पास रेल पटरी पार कर रहा था. उसने रिस्क लेकर सोचा कि रेल आने से पहले वह पटरी पार कर जायेगा, लेकिन किसी कारण वह पटरी पार नहीं कर सका अौर उसका दायां पैर कट गया.
राजू प्रमाणिक ने बताया कि उसके 80 फीसदी पांव कट गये. जब यह घटना हुई उसके बाद लगा कि अब जीवन ही नहीं है. लेकिन किसी प्रकार वेल्लोर में इलाज करवाया गया. कृत्रिम पांव के सहारे किसी प्रकार चलना शुरू किया. लेकिन वे पांव काफी भारी थे, अौर लगातार इस्तेमाल करने से पांव में घाव हो जाता. राजू ने बताया कि वह नाई का काम करता है. इस कैंप के बारे में अखबार के जरिये जानकारी मिली थी. यहां आने के बाद उसका कृत्रिम पांव लगाया गया.
2. जन्म से ही बायां पांव नहीं था, मिला नया पांव : अभिषेक कुमार
साकची जेल चौक का रहने वाला अभिषेक कुमार विवेकानंद हाइस्कूल में 10वीं का छात्र है. रविवार को जब वह रेड क्रास भवन पहुंचा तो उसके चेहरे में एक उम्मीद थी. उम्मीद कि वह पहले से बेहतर तरीके से चल सकेगा. इस उम्मीद को चार चांद तब लग गये जब जयपुर फुट यूएसए के सदस्यों ने उसके नाम के कृत्रिम पैर को उसके सामने तैयार किया अौर उसका प्रत्यारोपण किया, तो वह पूरी तरह फिट बैठ गया. जो अभिषेक काफी कठिनाई से चल रहा था वह दौड़ने को तैयार था. उसकी मां गुड़िया ने बताया कि अभिषेक के पिता सिक्यूरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं.
3. दवा रिएक्शन किया, दोनों पांव काम करना बंद कर दिया : रवि कुमार
हरहरगुट्टू के रहनेवाले रवि कुमार ने कहा कि जब वे दो-तीन साल के थे उस वक्त एक दवा का रिएक्शन हो गया अौर बचपन में ही उनके पांव ने काम करना बंद कर दिया. काफी इलाज कराया, समय बीतता गया, लेकिन मर्ज जस की तस रहा. बकौल रवि उन्हें चलने में काफी कठिनाई हो रही थी. मेगा कैंप की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने यहां आकर लाभ लिया. एक्सपर्ट से मुलाकात की. जिसके बाद उन्हें कैलिपर लगाया गया. कैलिपर की मदद से वह चल पा रहे हैं. रवि स्टूडेंट हैं, अौर प्रतियोगी परीक्षाअों की तैयारी कर रहे हैं.
4. चार में तीन मर गये, मैं बच गया था : महेंद्र मोहन साहू
सोनारी के रहनेवाले महेंद्र मोहन साहू रविवार की दोपहर करीब तीन बजे अपने कृत्रिम पांव लगा कर चलने की प्रैक्टिस कर रहे थे. इस दौरान काफी स्पीड चलने की प्रैक्टिस कर रहे थे. वे बार-बार हॉल का चक्कर काट रहे थे, यह देखने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें चलने में दिक्कत भी हो रही है नहीं.
इसी बीच हम पर नजर पड़ने के बाद उन्होंने कहा कि शानदार पांव मिला है. बताया कि इससे पूर्व भी उनके पास पांव थे, लेकिन वे काफी भारी थे. नये सिरे से सामान्य तरीके से चलने की उत्सुकता ऐसी थी कि वे एक सांस में पूरी घटना भी बता गये. महेंद्र मोहन साहू ने कहा कि 1981 में वे अोड़िसा के बालासोर गये थे. वहां वे एक बस में सवार थे. जिस बस में वे सवार थे उस वक्त उसमें चार लोग थे. लेकिन अचानक एक ट्रक से टक्कर हो गयी.
इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गयी थी. महेंद्र मोहन बच गये. लेकिन उनका दायां पांव कट गया. पांव कटने के बाद उन्होंने सोचा कि अब वे सामान्य तरीके से चल नहीं सकेंगे. महेंद्र साहू ने कहा कि सरकार की अोर से 600 रुपये मिलता है, उससे गुजर बसर होती है. लेकिन इस पैसे से अच्छे पांव लगवा पाना संभव नहीं था. लेकिन इस प्रकार के आयोजन से अब उन्हें नि:शुल्क पांव मिल गये.
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