दुनिया के खेतों को उर्वर बना रहे मानगो के रणवीर, तैयार की फार्म बीट्स टेक्नोलॉजी, 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी उत्पादकता
Updated at : 20 Aug 2019 3:26 AM (IST)
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जमशेदपुर :भोजन की जरूरत हर किसी को है, लेकिन कोई खेती नहीं करना चाहता है. किसान बनने की चाहत भी लोगों में दिन प्रतिदिन कम हो रही है. ऐसी स्थिति में पूरी दुनिया के समक्ष खाद्यान्न संकट की स्थिति उत्पन्न होने वाली है. माइक्रोसॉफ्ट की अोर से किये गये एक रिसर्च के अनुसार यह बात […]
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जमशेदपुर :भोजन की जरूरत हर किसी को है, लेकिन कोई खेती नहीं करना चाहता है. किसान बनने की चाहत भी लोगों में दिन प्रतिदिन कम हो रही है. ऐसी स्थिति में पूरी दुनिया के समक्ष खाद्यान्न संकट की स्थिति उत्पन्न होने वाली है. माइक्रोसॉफ्ट की अोर से किये गये एक रिसर्च के अनुसार यह बात उभर कर सामने आयी है कि खेती करने में 2050 तक 70 फीसदी की तेजी लाने की आवश्यकता है.
तभी हम आबादी की जरूरतों के अनुसार कृषि उत्पादों का उत्पादन कर सकेंगे. इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं, जमशेदपुर के मानगो के रणवीर चंद्रा ने फार्म बीट्स टेक्नोलॉजी का ईजाद किया है, जिसके जरिये खेतों की उर्वरा शक्ति को करीब 40 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है.
रणवीर चंद्रा ने ‘प्रभात खबर’ से खास तौर पर बात करते हुए कहा कि अमेरिका के वाशिंगटन सीएफएल के पास फार्म बीट्स टेक्नोलॉजी को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जा रहा है. इंटरनेट व सैटेलाइट के माध्यम से जिन किसानों के पास हाइस्पीड इंटरनेट सेवा नहीं है, वे भी अपने स्मार्ट फोन के माध्यम से यह जान सकेंगे कि आखिर मिट्टी में नमी कितनी है, उसमें कब उर्वरक डालनी है, बीज बोने के सही समय के साथ ही मिट्टी में पीएच वैल्यू की भी जानकारी उक्त तकनीक के माध्यम से किसान आसानी से ले सकते हैं.
इससे किसान मिट्टी के मिजाज के अनुसार उक्त भूमि में खेती कर करीब 30 फीसदी तक उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं. फार्म बीट्स माइक्रोसॉफ्ट का प्रोजेक्ट है, जिसे चीफ रिसर्चर रणवीर चंद्रा लीड कर रहे हैं. रणवीर चंद्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया कैंपेन के जबरदस्त प्रशंसक हैं.
पांच प्रमुख आविष्कार : 1. टीवी ह्वाइट स्पेस, 2. स्पेक्ट्रम अॉब्जेक्ट्री, 3. एग्रीकल्चर सेंसर ( स्मार्ट डस्ट), 4. सॉफ्टवेयर डिफाइन बैटरी, 5. फार्मबीट्स.
कौन हैं रणवीर
रणवीर चंद्रा जमशेदपुर के मानगो विजया ग्रीन अर्थ कॉलोनी रहने वाले हैं. फिलहाल माइक्रोसॉफ्ट कंपनी में चीफ रिसर्चर हैं. एलएफएस से 1995 में 12वीं पास करने के बाद इन्होंने आइआइटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग की. 2005 में कॉरनेल से पीएचडी की. रणवीर को अमेरिका में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी गयी थी. उनके पिता रमेश चंद्र तिवारी टेल्कॉन के पूर्व सीनियर मैनेजर हैं. उनकी पत्नी मीनाक्षी गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा की बेटी है.
मोबाइल बैटरी डाउन नहीं होने की तकनीक पर कर चुके हैं रिसर्च
मोबाइल स्मार्ट हो गया है. छोटे से मोबाइल में कंप्यूटर की सारी चीजों को समाहित किया गया है. पिछले 15 वर्षों से मोबाइल की बैटरी में सिर्फ एक बार ही बदलाव हुआ है. फिलहाल एक ही बैटरी से सारा कुछ चल रहा है. यही कारण है कि स्मार्ट फोन की बैटरी जल्द खत्म हो जाती है. इसे लेकर मल्टीपल बैटरी डिफरेंट केमेस्ट्री की तकनीक ईजाद किया गया है. इसमें एक एप या फिर एक चीज के लिए अलग-अलग बैटरी मोबाइल के इंटरनल मेमोरी में फिट रहेंगे. अगर मोबाइल का स्क्रीन ऑफ रहेगा, तो उसकी बैटरी बची रहेगी. अगर एप का इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उस एप की बैटरी खर्च नहीं होगी. इससे बैटरी की लाइफ करीब सात गुणा बढ़ सकती है.
कैसे काम करेगी तकनीक
फार्म बीट्स में सोलर पैनल की मदद से खेतों में छोटे-छोटे सेंसर लगाये जाते हैं. हर 100 मीटर पर एक सेंसर लगाया जाता है. किसान अपने स्मार्ट फोन के कैमरे का फेस ड्रोन या फिर हीलियम बैलून की तरफ रखेगा. सेंसर की मदद से कैमरा व ड्रोन खेत का एरियल मैप बना देंगे. इसके बाद ड्रोन या हीलियम बैलून का सेंसर ट्रांसमीट करने लगेगा, जिससे किसान को स्क्रीन पर मिट्टी की वास्तविक स्थिति की जानकारी होने लगेगी. आने वाले दिनों में प्रोजेक्ट लांच किया जायेगा.
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