चेंबर में बैठे रहे डॉक्टर, तड़प तड़प कर मरीज की हुई मौत

Updated at : 13 Aug 2019 5:53 AM (IST)
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चेंबर में बैठे रहे डॉक्टर, तड़प तड़प कर मरीज की हुई मौत

एमजीएम अस्पताल का मामला. डॉक्टर वीके सिन्हा व डॉ धीरज की इमरजेंसी में थी ड्यूटी, बुलाने पर मरीज को देखने नहीं आये जमशेदपुर :एमजीएम अस्पताल में एक बार फिर सोमवार की शाम मानवीय संवेदना दम तोड़ती नजर आयी. सोमवार की शाम छह बजे दर्द से तड़पते कपाली, आशा डुगरी निवासी तुषार मुखी (40) की मौत […]

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एमजीएम अस्पताल का मामला. डॉक्टर वीके सिन्हा व डॉ धीरज की इमरजेंसी में थी ड्यूटी, बुलाने पर मरीज को देखने नहीं आये


जमशेदपुर :एमजीएम अस्पताल में एक बार फिर सोमवार की शाम मानवीय संवेदना दम तोड़ती नजर आयी. सोमवार की शाम छह बजे दर्द से तड़पते कपाली, आशा डुगरी निवासी तुषार मुखी (40) की मौत हो गयी, लेकिन परिजनों के बार-बार बुलाये के बावजूद उसे देखने कोई डॉक्टर नहीं आया.

तुषार को पेट दर्द की शिकायत पर शाम पांच बजे अस्पताल में लाया गया था. इमरजेंसी में डॉक्टरों ने उसे जमीन पर लिटाकर पानी चढ़ा दिया. इस बीच उसके पैर-हाथ में खिंचाव आने लगा. इसकी जानकारी परिजनों ने नर्स को दी. परिजनों के मुताबिक डॉक्टर ने उन्हें डांट कर भागा दिया. इसी बीच छह बजे तड़पता तुषार दुनिया से चल बसा.

मौत के बाद परिजनों ने किया हंगामा

तुषार की मौत से गुस्साये परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. परिजनों का आक्रोश देखकर इमरजेंसी में बैठे सभी डॉक्टर व नर्स भाग गये. परिजनों ने अस्पताल का मेन गेट बंद कर दिया. हालांकि बाद में होमगार्ड जवानों ने गेट खोल दिया. इसके बाद तुषार के परिजन इमरजेंसी में आकर हंगामा करने लगे. लगभग तीन घंटे तक अस्पताल में हंगामा चलता रहा. भयभीत नर्स और डॉक्टर इमरजेंसी में नहीं आये. मरीजों को देखने वाला कोई नहीं था. उस समय डॉक्टर वीके सिन्हा व डॉ धीरज की इमरजेंसी में थी ड्यूटी. सूचना मिलने पर साकची पुलिस पहुंची और लोगों को शांत कराकर शव को शीतगृह में रखवाया.

डॉक्टर चेंबर खाली, तड़पते रहे मरीज

हंगामे के बाद इमरजेंसी से डॉक्टर भाग गये. इस बीच जेम्को मछुआ बस्ती निवासी लखन मछुआ को परिजन गंभीर स्थिति में लेकर एमजीएम पहुंचे. उसके हाथ-पैर में खिंचाव था और मुंह से खून निकल रहा था. वह डॉक्टर चेंबर में जमीन पर पड़ा रहा. डॉक्टर नहीं होने के कारण उसका इलाज करने वाला कोई नहीं था. वह चेंबर में तड़पता रहा. तीन घंटे बाद तक डॉक्टर आये तो उसका इलाज शुरू हुआ.

बिना इलाज लौटे आधा दर्जन से ज्यादा मरीज

अस्पताल में हंगामे के दौरान कई मरीजों को बिना इलाज लौटना पड़ा. सरायकेला से अंजना महतो सांस लेने में परेशानी की शिकायत लेकर आयी थी. उसके साथ ही नीमडीह निवासी लक्खीकांत सर्पदंश की शिकायत पर आया था. उलीडीह निवासी मुस्कान सामंद समेत आधा दर्जन से अधिक मरीज अस्पताल के इमरजेंसी में आये थे जो हंगामा होते देख मरीज को लेकर चले गये. मरीज के परिजनों ने कहा कि अब वह प्राइवेट अस्पताल में इलाज करायेंगे.

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