ताजदार सहित तीन गये जेल, मिलने कोर्ट पहुंची निशा कोड़ा ने कहा-गलती हो गयी, जल्द छुड़ा लूंगी
Updated at : 29 Jul 2019 8:04 AM (IST)
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जमशेदपुर : निशा कोड़ा का अपहरण और लूट की घटना को आजादनगर के कुख्यात अपराधी चौड़ा राजू गिरोह ने अंजाम दिया था. इसकी सुपारी निलंबित भाजपा नेता ताजदार आलम ने दी थी. निशा से 50 लाख रुपये लेने थे, जिसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा चौड़ा राजू का गिरोह लेता, बाकी ताजदार आलम को मिलना था. […]
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जमशेदपुर : निशा कोड़ा का अपहरण और लूट की घटना को आजादनगर के कुख्यात अपराधी चौड़ा राजू गिरोह ने अंजाम दिया था. इसकी सुपारी निलंबित भाजपा नेता ताजदार आलम ने दी थी. निशा से 50 लाख रुपये लेने थे, जिसमें से 60 प्रतिशत हिस्सा चौड़ा राजू का गिरोह लेता, बाकी ताजदार आलम को मिलना था.
इसके लिए चौड़ा राजू ने अपने गिरोह के मोनू, विजय तिर्की, कयामउद्दीन अंसारी, मो कादिर मोमिन और सरफराज को घटना को अंजाम देने के लिए तैयार किया था. पुलिस ने ताजदार, कयाम और कादिर को गिरफ्तार कर लिया है.
यह जानकारी रविवार को एसएसपी कार्यालय में सिटी एसपी सुभाष चंद्र जाट ने दी. उन्होंने बताया कि ताजदार ने निशा के बारे में चौड़ा राजू को बताया था कि उसके पास बहुत ज्यादा रुपये और गहने हैं. इसके बाद दोनों ने मिलकर 14 जुलाई को साजिश रची और कपाली में जमीन दिखाने के बहाने निशा को ताजदार ने 24 जुलाई को बुलाया था.
मामले में निशा ने पुलिस से बताया था कि उसके पास से छह लाख रुपये और चार मंगलसूत्र, दो कान की बाली, सोना की चेन, सोना की अंगूठी भी छीन लिया था. साथ ही निशा का स्कोडा गाड़ी भी आरोपियों ने छीन लिया था. लेकिन पुलिस अभी तक सामान बरामद नहीं कर पायी है.
ऐसे दिया घटना को अंजाम : ताजदार ने पुलिस को दिये बयान में बताया कि 24 जुलाई को निशा कोड़ा को कार से वह जमीन का सौदा कराने के लिए पहले बैंक ले गया, वहां रुपये निकलवाये, फिर निशा छगनलाल गयी. वहां जेवर खरीदी. इसके बाद वह निशा को लेकर जमीन दिखाने डोबो ले गया. कार का नंबर चौड़ा राजू को पहले दिया था और जहां जमीन थी, वहां पहले से ही चौड़ा राजू गिरोह के सदस्यों के साथ इंतजार कर रहा था.
डोबो के पास कार को देखते ही चौड़ा राजू, मोनू, विजय तिर्की, कयामुद्दीन, मो कादिर और सरफराज दो बाइक से मुंह बांधकर आये और प्लान के अनुसार उसे और निशा को पिस्टल दिखा पिछली सीट पर बैठा दिया. उनके साथ विजय और कयामउद्दीन बैठ गये. आगे सीट पर मो कादिर और ड्राइविंग सीट पर चौड़ा राजू बैठा था.
कार को पटमदा की तरफ से बंगाल की लेकर जाया गया. पीछे बाइक से मोनू और सरफराज आ रहा था. रास्ते में योजना के अनुसार निशा तथा उसके साथ मारपीट की गयी अौर गहने ले लिये गये. इसके बाद दोनों को छोड़ने के एवज में 50 लाख रुपये मांगे गये. इस पर निशा ने कहा कि घर पर जेवर है. सब मिलाकर 20 लाख रुपये होंगे. कुछ एफडी को भी वह तुड़वा देगी.
10 लाख रुपये वहां से आ जायेंगे. निशा ने अपराधियों के सामने आइसीआइसीआइ बैंक की पदाधिकारी शबनम से एफडी तोड़ने की बात फोन पर कर ली और घर से जेवर लाने के लिए अपने भाई को फोन कर बच्चों को फ्लैट से सीतारामडेरा ट्यूशन ले जाने को कहा. निशा ने भाई को कहा कि फ्लैट की चाबी गार्ड को दे दे और जबतक वह न बोले घर पर कोई नहीं आये. इसके बाद वह मोनू के साथ पटमदा वाले रोड में चला गया, जहां सभी को आना था.
कोर्ट में पहले से ही मौजूद थी निशा
ताजदार को जेल भेजने के पूर्व जब पुलिस जब उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने ले गयी, तो वहां पहले से ही निशा कोड़ा मौजूद थीं. निशा ताजदार से बोल रही थी कि उससे गलती हो गयी है. वह उसे (ताजदार को) जल्द जेल से बाहर निकलवा लेगी. वहीं, कोर्ट में मीडिया को देखते ही वहां से तेजी से जाने लगी. उसके कोर्ट आने का कारण पूछने पर निशा ने बताया कि वह ताजदार से अपने रुपये और गहने लौटाने की बात बोलने आयी थी. निशा के साथ जेएमएम नेता कमलजीत गिल भी मौजूद थीं.
नीरु ने ताजदार को निशा से मिलवाया था
ताजदार ने पुलिस को दिये बयान में बताया कि उसका रांची के हरमू में नशेमन रिदम प्राइवेट लिमिटेड नामक कंस्ट्रक्शन कंपनी है. धंधा मंदा होने के कारण उसको कार्यालय बंद करना पड़ा. उसका एक एनजीओ है तथा वर्तमान में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का वह प्रदेश कोषाध्यक्ष है. उसकी शादी वर्ष 2017 में शबीना से हुई थी.
उसने शादी घरवालों की मर्जी के बिना रुपये वसूलने के लिए की थी. उसके दाे साला सऊदी में काम करते हैं. एक साला ट्रांसपोर्टर है. शादी के दो माह बाद तक ससुराल की तरफ से उसे कोई फायदा नहीं हुआ.
ताजदार ने बताया कि नीरु नाम की एक महिला के जरिये उसका निशा कोड़ा से परिचय हुआ था. उसे जानकारी मिली कि निशा अपने पति से अलग रहती है तथा उसके पास काफी पैसे हैं. राजनीति से जुड़े रहने के कारण दोस्ती की और कुछ मदद करने के बाद उसके करीब चला गया.
तलाक का पेपर बनवा निशा से वसूला था 10 लाख
निशा को उसके पति और परिवार वालों की तरफ से हर माह लाखों रुपये मिलते थे. उसने निशा को कुंवारा बताकर शादी करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन उसे पता चल गया कि मैं शादीशुदा हूं. इसके बाद तलाक का पेपर बनवा कर निशा से 10 लाख रुपये वसूले. इधर, कुछ दिनों से निशा के व्यवहार में परिवर्तन अा गया. रुपये बहुत कम देने लगी. तब 14 जुलाई को मानगो चेपापुल के पास अब्दुल्ला उर्फ चौड़ा राजू से मुलाकात की, जहां घटना को अंजाम देने को लेकर योजना बनी.
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By Prabhat Khabar Digital Desk
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