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पिता के साये के बिना भी नहीं टूटा हौसला, मां की प्रेरणा से बिहार के लाल ने UPSC में पाई सफलता

Updated at : 07 Mar 2026 7:26 PM (IST)
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gaurav kumar upsc news

अपनी मां के साथ गौरव कुमार

Success Story: पटना के गौरव कुमार ने यूपीएससी परीक्षा में 338वां रैंक हासिल कर अपने परिवार और इलाके का नाम रोशन किया है. पिता के निधन के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और मां की प्रेरणा व अपनी मेहनत के दम पर यह बड़ी सफलता हासिल की.

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Success Story: कड़ी मेहनत, मजबूत इरादे और मां की प्रेरणा के सहारे पटना के बेऊर जेल रोड इलाके के रहने वाले गौरव कुमार ने यूपीएससी की परीक्षा में 338वां स्थान हासिल कर अपने परिवार और पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया है.

कठिन परिस्थितियों के बावजूद गौरव ने कभी हार नहीं मानी. पिता के निधन के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा और लगातार मेहनत करते रहे. उनकी इस सफलता की कहानी कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है.

पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला

गौरव कुमार के पिता स्वर्गीय अरविन्द्र कुमार घोष अब इस दुनिया में नहीं हैं. पिता के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. लेकिन गौरव ने इस कठिन समय को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. उन्होंने अपने पिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. परिवार की जिम्मेदारियों और भावनात्मक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे.

मां बनी सबसे बड़ी ताकत

गौरव की सफलता के पीछे उनकी मां सोनामती कुमारी का बहुत बड़ा योगदान है. पिता के नहीं रहने के बाद उन्होंने ही बेटे को हर कदम पर हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया. जब भी गौरव निराश होते, उनकी मां उन्हें फिर से संभालतीं और हौसला देतीं. मां के इसी विश्वास और समर्थन ने गौरव को मुश्किल समय में भी मजबूत बनाए रखा.

कई वर्षों की मेहनत लाई रंग

बताया जाता है कि गौरव कुमार पिछले कई वर्षों से यूपीएससी की तैयारी कर रहे थे. पढ़ाई के प्रति उनका अनुशासन और समर्पण काबिले-तारीफ है. उन्होंने अपनी पढ़ाई को ही अपना लक्ष्य बना लिया था. लगातार मेहनत और धैर्य के साथ तैयारी करते रहे. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.

इलाके में खुशी का माहौल

गौरव कुमार का घर बेऊर जेल रोड, पाटलीपुत्र केंद्रीय विद्यालय के पीछे, शिवाजीनगर, पटना में है. उनकी सफलता की खबर मिलते ही पूरे इलाके में खुशी का माहौल बन गया. स्थानीय लोगों और परिचितों ने गौरव को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की.

युवाओं के लिए बनी प्रेरणा

परिवार के लोगों का कहना है कि गौरव की इस उपलब्धि में उनकी मां की मेहनत और त्याग की बड़ी भूमिका है. कठिन समय में भी उन्होंने बेटे का हौसला नहीं टूटने दिया. गौरव कुमार की कहानी यह सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार का साथ मिले, तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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