जमशेदपुर : एमजीएम व पीएमसीएच में सुधार संबंधी रिपोर्ट तैयार हो: सरयू राय

Updated at : 01 Feb 2019 7:55 AM (IST)
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जमशेदपुर :   एमजीएम व पीएमसीएच में सुधार संबंधी रिपोर्ट तैयार हो: सरयू राय

जमशेदपुर : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से अनुरोध किया है कि वह विभागीय सचिव के माध्यम से एमजीएम, जमशेदपुर व पाटलिपुत्र, धनबाद की स्थिति में सुधार की कार्यवाही संबंधी िरपोर्ट तैयार करायें. यह कार्यवाही इस मुद्दे पर सीएम के साथ 28 जनवरी को हुई बैठक के निर्णय के आलोक […]

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जमशेदपुर : खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी से अनुरोध किया है कि वह विभागीय सचिव के माध्यम से एमजीएम, जमशेदपुर व पाटलिपुत्र, धनबाद की स्थिति में सुधार की कार्यवाही संबंधी िरपोर्ट तैयार करायें. यह कार्यवाही इस मुद्दे पर सीएम के साथ 28 जनवरी को हुई बैठक के निर्णय के आलोक में होगी.

सरयू ने लिखा है कि कार्यवाही तैयार हो जाने से इसकी मासिक प्रगति की समीक्षा की जा सकेगी. गौरतलब है कि दो वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री ने एमजीएम की स्थिति में सुधार के लिए जमशेदपुर में एक उच्च स्तरीय बैठक की थी. इसमें प्राचार्य, अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारी तथा टाटा मेन हॉस्पिटल के अध्यक्ष भी शामिल थे.

इसमें न तो मुझे शामिल किया गया था और न ही स्वास्थ्य मंत्री को. वहीं न तो इस बैठक की कार्यवाही का विवरण उपलब्ध है अौर न ही कोई रिकाॅर्ड. तब टाटा मेन अस्पताल के तत्कालीन अध्यक्ष सुनील भास्करन को उस बैठक में एमजीएम की कार्यप्रणाली सुधारने के लिये एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया था.

उन्होंने रिपोर्ट सौंप भी दी, पर इसके बाद हुआ क्या यह किसी को पता नहीं है. यदि दो दिन पूर्व इस बारे में हुई बैठक की पुख्ता कार्यवाही भी तैयार नहीं की गयी तो इसका अंजाम भी वही हो सकता है. अत: इस बारे में लगातार समीक्षा जरूरी है.

मानव संसाधन की कमी स्तब्ध करनेवाली : इन अस्पतालों में सीनियर-जूनियर डॉक्टर, रेजिडेंट,ट्यूटर तथा तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों की भारी कमी का आंकड़ा स्तब्ध करने वाला है. आउट सोर्सिंग वाले कर्मियों की समस्या सहित अन्य के बारे में बैठक में विस्तार से चर्चा हुई. ऐसी स्थिति में ये अस्पताल चल रहे हैं, यही बड़ी बात है.
बैठक में तय हुआ कि इन अस्पतालों के विभिन्न रिक्त पदों पर बहाली शीघ्र की जाये. प्रशासनिक पद वर्ग समिति इस पर निर्णय ले. रोस्टर का मामला कार्मिक विभाग की बजाय स्वास्थ्य विभाग ही तय करे. दवा सहित सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जाये. प्राचार्य व अधीक्षक को उपकरणों की मरम्मत व दवाओं की खरीद के लिए एक सीमा तक वित्तीय अधिकार दिये जाएं.
परंतु मुख्यमंत्री कार्यालय के सूचना प्रसार कोषांग से जारी संक्षिप्त प्रेस विज्ञप्ति में इनका जिक्र नहीं था. इसलिए आवश्यक है कि स्वास्थ्य विभाग बैठक में हुए निर्णय का विवरण तथा इनके क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार कर उपलब्ध कराये.
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