मेडॉल मामले पर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने लिया संज्ञान, कहा - जांच के बाद दोषियों पर होगी कार्रवाई
Updated at : 22 Nov 2018 4:02 AM (IST)
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जमशेदपुर : एमजीएम में चल रहे मेडॉल पैथोलॉजी लैब के संचालक द्वारा गलत बिल देने के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है. इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है और जल्द ही जांच कराने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की […]
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जमशेदपुर : एमजीएम में चल रहे मेडॉल पैथोलॉजी लैब के संचालक द्वारा गलत बिल देने के मामले को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है. इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव डॉ नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा है कि मामला उनके संज्ञान में है और जल्द ही जांच कराने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. गौरतलब है कि एमजीएम में गरीबों की जांच के लिए चयनित मेडॉल पैथोलॉजी लैब द्वारा हर महीने लाखों का बिल स्वास्थ्य विभाग को दिया जाता है.
पैथोलॉजी लैब बिना जांच किये ही विभाग से राशि की वसूली कर रहा है. साथ ही एमजीएम के रजिस्ट्रेशन स्लिप पर मनमाने तरीके से मरीजों के नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर लिख कीमती जांच दिखायी जा रही है. इन फर्जी रजिस्ट्रेशन स्लिप पर कुछ गरीबों को सामान्य रूप से बुखार और सिर दर्द से पीड़ित बताया गया है, लेकिन उनके भी लिवर, हेपेटाइटिस, किडनी, हेपेटाइटिस-बी, कोलेस्ट्रॉल आदि की जांच कराने की बात लिख दी गयी है. साथ ही एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर अलग-अलग मरीजों की जांच दिखायी गयी है. यही नहीं, एमजीएम के ओपीडी में आनेवाले मरीजों के रजिस्ट्रेशन भी अलग-अलग तिथि पर एक समान दिखा दिये गये हैं.
डॉ वीबीके चौधरी ने दिया शो-कॉज का जवाब
जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की संख्या कम रखकर ज्यादा का पैसा लेने के मामले में आउटसोर्स कर्मचारियों की जांच कर प्रमाण पत्र देने वाले अधिकारी डॉ वीबीके चौधरी ने मंगलवार को शोकॉज का जवाब अधीक्षक को सौंपा. उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की जितनी हाजिरी रहती थी उतनी के बिल पर उन्होंने साइन किये हैं.
उन्होंने कहा कि आउटसोर्स एजेंसी द्वारा दिये गये बिल की जांच में पाया गया कि मई से सभी एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या में कमी पायी गयी थी. लेकिन जितने कर्मचारी रहते थे उसी के अनुसार साइन किया. इसमें उनका कोई दोष नहीं है. ज्ञात हो कि उपायुक्त द्वारा इसकी जांच करायी गयी थी जिसमें आउटसोर्स एजेंसी द्वारा कम कर्मचारी रखकर ज्यादा कर्मचारियों का पैसा लिया जा रहा था. जांच के दौरान कर्मचारियों की संख्या कम पायी गयी थी.
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