निवेशकों ने कोल्हान में 1000 करोड़ का निवेश रोका

Published at :05 Aug 2018 3:22 AM (IST)
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निवेशकों ने कोल्हान में 1000 करोड़ का निवेश रोका

एनएच 33 की दुर्दशा व हवाई सेवा शुरू नहीं होने से हुआ मोहभंग जमशेदपुर : कोल्हान के तीनों जिले खनिज संपदा से लेकर उद्योग व्यापार के मामले में काफी मजबूत हैं. जमशेदपुर में टाटा स्टील व टाटा मोटर्स कंपनियां से जुड़ी कंपनियां हैं तो सरायकेला-खरसावां में आदित्युपर से गम्हरिया और कांड्रा से लेकर सरायकेला तक […]

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एनएच 33 की दुर्दशा व हवाई सेवा शुरू नहीं होने से हुआ मोहभंग

जमशेदपुर : कोल्हान के तीनों जिले खनिज संपदा से लेकर उद्योग व्यापार के मामले में काफी मजबूत हैं. जमशेदपुर में टाटा स्टील व टाटा मोटर्स कंपनियां से जुड़ी कंपनियां हैं तो सरायकेला-खरसावां में आदित्युपर से गम्हरिया और कांड्रा से लेकर सरायकेला तक कई औद्योगिक प्रतिष्ठान हैं. पश्चिमी सिंहभूम को माइंस के लिए जाना जाता है. लेकिन, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से अब निवेशक इस क्षेत्र से मुंह मोड़ने लगे हैं. सात ऐसी कंपनियां जिन्होंने करीब एक हजार करोड़ रुपये पूंजी निवेश का निर्णय पूर्व में लिया था, उन्होंने निवेश पर रोक लगा दी है. इन कंपनियों में विदेशों के साथ मिलकर आदित्यपुर और अासपास के इलाके में निवेश करने वाली कंपनियां हैं, जिनका कारोबार यहां से जुड़ा हुआ है.
जापान की एक कंपनी क्योसेरा सीटीसी लिमिटेड ने एक सर्कुलर जारी कर अपने कर्मचारियों को कहा है कि वे खतरनाक हो चुके एनएच 33 में सफर न करें. इसी तरह जमशेदपुर से जर्मनी तक में कारोबार करने वाली आरएसबी कंपनी से जुड़े लोगों ने भी जर्मनी से जमशेदपुर आने से इनकार कर दिया है. अब यहां से उद्यमी को पुणे जाकर अपना कारोबार करना पड़ रहा है. मोमेंटम झारखंड के तहत निवेश का समझौता करने वाले उद्यमी भी परेशान हैं.
(फोटो है फाइल से इंडस्ट्रियल एरिया से लगा सकते हैं)
फोटो ::4 रमेश अग्रवाल 1, 4 बेहरा 1, 4 विकास मुखर्जी 1
हवाई सेवा शुरू होने तक नहीं करेंगे विस्तार
कई कंपनियों ने अपना विस्तार रोक दिया है. इनका तर्क है कि अब तक यहां हवाई सेवा शुरू नहीं हो पायी है. इस वजह से उद्यमियों को परेशानी हो रही है. कोलकाता से हवाई यात्रा करने पर अतिरिक्त छह से सात घंटे खर्च होते हैं. एनएच खस्ताहाल है इसलिए रांची एयरपोर्ट पहुंचना मुश्किल है.
सरकार से मिली निराशा
वर्तमान सरकार ने पूरे राज्य में पूंजी निवेश को लेकर एक माहौल बनाया था. बाहर के उद्यमियों को झारखंड में निवेश करने का न्योता दिया था. आश्वासन दिया था कि इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सभी तरह की अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध करायेंगे. सरकार के आश्वासन पर कुछ निवेशक आये भी, लेकिन खस्ताहाल एनएच, हवाई यात्रा की सुविधा अब तक बहाल नहीं हो पाने के साथ-साथ अन्य परेशानियों की वजह से निवेशक मुंह मोड़ने लगे.
300 करोड़ का निवेश करने के काम को सीटीसी क्योसेरा ने सस्पेंड किया
जापानी कंपनी के साथ मिलकर काम करने वाले रमेश अग्रवाल की क्योसेरा सीटीसी प्रीसिसन लिमिटेड तीन साल में करीब 300 करोड़ रुपये निवेश करने वाली थी. एनएच की बदतर स्थिति और हवाई सुविधा नहीं होने के कारण फिलहाल इन्होंने निवेश को रोक दिया है. उनके मुताबिक जापान से लोगों ने आकर यहां काम करने से मना कर दिया है. जो लोग हैं, उनको भी एनएच 33 पर जाने से रोक दिया गया है. ऐसे में कारोबार कहां से संचालित कर सकेंगे? रमेश अग्रवाल ने बताया कि अमेरिकी डेलीगेट्स भी 14 अगस्त को यहां आने वाले था, लेकिन उन लोगों ने भी आने से मना कर दिया है.
एनएचएआइ के जीएम आये, निरीक्षण किया
रांची. एनएचएआइ के जीएम महावीर सिंह शनिवार को रांची पहुंचे. उन्होंने एनएचएआइ द्वारा यहां चल रहे कार्यों की जानकारी ली. इसके बाद वह टीम के सदस्यों के साथ रांची-रामगढ़ रोड (एनएच 33) की स्थिति देखने गये. वहां चुटुपालू घाटी की हालत देखी. वहां हाल ही में बड़ी दुर्घटना हुई थी. सड़क की स्थिति देखने के बाद उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिया. अब इस सड़क को फोर लेन से और ज्यादा चौड़ा करने पर बातें हो रही हैं. इस पर भी बातें हो रही हैं कि इसे दुर्घटना मुक्त जोन कैसे बनाया जाये. इस दिशा में भी अधिकारियों को निर्देश दिये गये.
टाटा रोड की मरम्मत शुरू
रांची . रांची-जमशेदपुर सड़क की मरम्मत होने लगी है. बरसात की वजह से कई जगहों पर गड्ढे हो गये हैं. वाहनों का परिचालन मुश्किल हो गया है. स्थिति को देखते हुए पिछले वर्ष के नियुक्त संवेदक द्वारा यह काम किया जा रहा है. मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड की अोर से जो कार्य कराया गया, वह भी क्षतिग्रस्त हो गया है. हालांकि उसे दुरुस्त कराने के लिए टेंडर आमंत्रित किया गया है. जानकारी के मुताबिक सड़क निर्माण के मामले की जांच सीबीआइ को दी गयी है. उच्च न्यायालय के आदेश में इसकी जांच सीबीआइ कर रही है.
जापान व जर्मनी के डेलीगेट्स ने आने से किया इनकार कर्मचारियों को एनएच 33 में जाने पर लगायी रोक
कई कंपनियों ने निवेश रोका
अतुल दुआ करीब सौ करोड़ का निवेश करने वाले थे, जिसको उन्होंने रोक दिया है. तीन सौ करोड़ रुपये का निवेश क्योसेरा सीटीसी करने वाली थी, उसने भी अपनी रफ्तार रोक दी है. ऑटो प्रोफाइल ने भी 50 करोड़ रुपये का निवेश रोक दिया है.
वॉल्वो बसों का बंद हो गया परिचालन
झारखंड सरकार के कहने पर 10 वाॅल्वो बस परिचालन शुरू किया था. एनएच 33 की बदहाली के कारण इन बसों का परिचालन रोक दिया गया है. बस एसोसिएशन के अध्यक्ष उपेंद्र शर्मा ने बताया कि सड़क हादसे की आशंका से ऐसा किया गया है.
लैंड एलॉटमेंट पॉलिसी नहीं, एयरपोर्ट व एनएच नहीं, क्या निवेश होगा : आरएसबी
आरएसबी कंपनी के एमडी एसके बेहरा ने बताया कि लैंड एलॉटमेंट को लेकर लॉटरी की जा रही है. पुराने निवेशकों को आगे नहीं लाया जा रहा है. अगर मैं अपनी कंपनी की बात करूं तो जर्मनी से मेरा कारोबार चलता है. लेकिन यहां से आना जाना ही मुश्किल है. हमारी मीटिंग के लिए लोग आने वाले थे. यहां भी निवेश होना था. लेकिन एनएच नहीं है, एयरपोर्ट और हवाई सेवा की सिर्फ बातें हो रही है, धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा. ऐसे में कैसे निवेश करेंगे.
50 करोड़ में कंपनी लगानी थी, अब निवेश मुश्किल : विकास मुखर्जी
ऑटो प्रोफाइल कंपनी के मालिक विकास मुखर्जी ने कहा कि वे करीब 50 करोड़ का निवेश करने वाले थे. लेकिन एनएच की हालत देखकर लगता है कि यहां माल भी आ पाना मुश्किल होगा. इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है तो इंडस्ट्री कैसे चल सकती है. पुरानी कंपनी भी चला पाना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में नया निवेश किस उम्मीद पर करूं?
सीबीआइ ने जांच की तैयारी शुरू की
रांची. सीबीआइ ने रांची-जमशेदपुर-महुलिया रोड निर्माण मामले की जांच की तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए सीबीआइ के अफसरों ने मामले से जुड़े लोगों से संपर्क किया. सीबीआइ इसके लिए कागजात जुगाड़ कर रही है. मामले पर जरूरी दस्तावेज की मांग की जा रही है. सारा कुछ हाथ में आने के बाद सीबीआइ मामले की जांच शुरू कर देगी.
टर्मिनेट हो सकता है मधुकॉन : इस मामले में सड़क निर्माण का काम लेनेवाली एजेंसी मधुकॉन को टर्मिनेट किया जा सकता है. शुरू से इस कंपनी को टर्मिनेट करने की बात हो रही है. यहां तक कि केंद्रीय पथ, परिवहन मंत्री से भी एजेंसी को टर्मिनेट करने की मांग की गयी थी. एनएचएआइ के साथ ही राज्य सरकार भी कंपनी को टर्मिनेट करने के पक्ष में है. मामला हाइकोर्ट में जाने के बाद पूरे मामले की सीबीआइ जांच कराने का आदेश हुआ है.
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