सिरका परियोजना की खुली खदान में घुसा बंद भूमिगत खदान का पानी, बाल-बाल बचे मजदूर, उत्पादन ठप
इसी खदान में घुसा पानी
Hazaribagh: हजारीबाग की सिरका परियोजना में बड़ा हादसा होते-होते टल गया. बंद भूमिगत खदान का पानी अचानक खुली खदान में प्रवेश कर गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई. हालांकि समय रहते मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. पूरी खबर नीचे पढ़ें...
Hazaribagh: सिरका परियोजना की खुली खदान में रविवार शाम पांच बजे अचानक लगभग दो-तीन मीटर से अधिक पानी घुस जाने से अफरा-तफरी मच गयी है. जिस समय यह घटना हुई, उस वक्त खदान में लगभग एक दर्जन मजदूर काम कर रहे थे. अचानक पानी घुसने पर सभी मजदूरों को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला गया, वहीं खदान से चार डंपर और एक पोकलेन मशीन को सुरक्षित स्थान पर हटा दिया गया. घटना के बाद परियोजना में उत्पादन कार्य पूरी तरह ठप हो गया. इससे सीसीएल को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.
देखते ही देखते खदान में भर गया पानी
जानकारी मिली है कि जिस क्षेत्र में फिलहाल सिरका परियोजना की खुली खदान चल रही है, वहां पहले चानक भूमिगत खदान संचालित होती थी. खनन के दौरान बंद भूमिगत खदान की गैलरी टूट गयी, जिसके बाद वहां जमा पानी खुली खदान में प्रवेश कर गया. देखते-देखते काफी जल भराव हो गया. सिरका परियोजना में प्रतिदिन लगभग 2500 मीट्रिक टन कोयला तथा पांच हजार क्यूविक मीटर ओबी का उत्पादन किया जा रहा है. यह विभागीय और ओबी आउटसोर्सिंग से किया जा रहा है.
पानी निकालने का काम जोर-शोर से जारी
सीसीएल प्रबंधन ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए सिरका परियोजना को छह लाख मीट्रिक टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य दिया है. ऐसे में इस घटना से उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है. घटना के बाद कोलियरी प्रबंधन ने स्थिति का निरीक्षण किया और पानी निकालने के लिए पंपिंग की व्यवस्था शुरू कर दी है. काफी जल भराव के कारण कोयला उत्पादन पूरी तरह से प्रभावित हो गया है. जानकार मजदूरों का कहना है कि खदान से पानी हटाने में काफी समय लग सकता है. यह बात जाहिर है कि पानी निकासी के बाद ही खनन का कार्य सामान्य हो सकेगा.
परियोजना पदाधिकारी ने क्या कहा
घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने पुराने भूमिगत खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों व नियमित तकनीकी निगरानी आवश्यकता की खामी को एक बार फिर उजागर कर दिया है. सिरका परियोजना पदाधिकारी एएन सिंह ने कहा कि परियोजना की खुली खदान में पानी काफी घुस गया है. इस पानी को निकालने में समय लगेगा. उत्पादन के लिए वैकल्पिक रास्ता तलाशा जा रहा है.
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By AmleshNandan Sinha
अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.
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