बेटी ने कर लिया लव मैरिज तो पिता ने जीते जी कर दिया पिंडदान, पूरा इलाका है अचंभित

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हजारीबाग के चौपारण में पिंडदान करते पिता.

झारखंड के हजारीबाग में एक पिता ने अपनी 18 वर्षीय बेटी के प्रेम विवाह से आहत होकर जीते जी उसका पिंडदान कर दिया। श्मशान घाट पर पिता, भाई और चाचा ने मुंडन कराकर अपना दुख और रोष व्यक्त किया। यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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चौपारण से अजय ठाकुर की रिपोर्ट

Hazaribagh News: जिस बेटी को पिता ने उंगली पकड़कर चलना सिखाया, सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और बड़े अरमानों से पाला, उसी बेटी के जीते-जी उसका पिंडदान करने का मामला सामने आया है. झारखंड के हजारीबाग जिले के चौपारण स्थित पाण्डेयबारा-आरापगार में गुरुवार को एक पिता ने अपनी 18 वर्षीय बेटी का हिंदू रीति-रिवाज से श्राद्धकर्म और पिंडदान किया. बेटी के प्रेम विवाह से आहत पिता ने यह कदम उठाया. श्मशान घाट पर मुंडन कराये खड़े पिता की आंखों में गुस्से और दर्द के मिले-जुले आंसू दिखाई दे रहे थे. पिता के साथ बेटी के भाई और चाचा ने भी अपना सिर मुंडवाया. परिवार की ओर से कहा गया कि अब उनके लिए बेटी इस दुनिया में नहीं रही. घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है.

अचानक घर से लापता हुई थी युवती

जानकारी के अनुसार खेमन चंद्रवंशी की 18 वर्षीय पुत्री अचानक घर से लापता हो गयी थी. परिवार के लोगों ने उसकी काफी तलाश की. बाद में परिजनों को जानकारी मिली कि वह पास के गांव नरैना निवासी पवन साव, पिता स्वर्गीय अशोक साव, के साथ चली गयी है. बेटी के अचानक घर से गायब होने के बाद परिजनों ने चौपारण थाना में लिखित आवेदन देकर पुलिस से मदद की गुहार लगायी थी. परिवार अपनी बेटी की तलाश और उसके वापस लौटने की उम्मीद कर रहा था. हालांकि बाद में उसके एक युवक के साथ चले जाने की जानकारी सामने आयी.

प्रेम विवाह से नाराज हुआ परिवार

बताया जा रहा है कि युवती ने पवन साव के साथ प्रेम विवाह कर लिया है. विवाह की जानकारी मिलने के बाद परिवार में नाराजगी फैल गयी. पिता बेटी के इस फैसले से बेहद आहत बताए जा रहे हैं. इसी नाराजगी में उन्होंने बेटी के जीवित रहते उसका श्राद्धकर्म और पिंडदान करने का निर्णय लिया. गुरुवार को श्मशान घाट पर हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार कर्मकांड किया गया. पिता, भाई और चाचा ने मुंडन कराया. इस दौरान पिता भावुक नजर आये. उनके चेहरे पर बेटी के फैसले को लेकर नाराजगी के साथ गहरा दुख भी साफ दिखाई दे रहा था.

पिता ने समाज के सामने जताया अपना विरोध

परिवार की ओर से किये गये इस कर्मकांड को बेटी के प्रेम विवाह के प्रति विरोध के तौर पर देखा जा रहा है. परिजनों का कहना है कि बेटी के इस फैसले के बाद उन्होंने उससे अपना संबंध समाप्त मान लिया है. श्मशान घाट पर पिता और परिवार के अन्य सदस्यों का मुंडन और श्राद्धकर्म किये जाने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों में भी इसकी चर्चा शुरू हो गयी. बड़ी संख्या में लोग इस घटनाक्रम को देखने के लिए पहुंचे.

पुलिस से लगायी थी मदद की गुहार

बेटी के घर से लापता होने के बाद परिवार ने चौपारण थाना में आवेदन देकर पुलिस से मदद मांगी थी. परिजनों की ओर से युवती की तलाश और उसके संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गयी थी. बाद में उसके पवन साव के साथ चले जाने की जानकारी सामने आयी. फिलहाल इस पूरे मामले में परिवार की नाराजगी और युवती के अपने जीवन को लेकर लिये गये फैसले ने गांव में चर्चा छेड़ दी है. एक ओर पिता ने सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर बेटी से संबंध खत्म करने का प्रतीकात्मक फैसला लिया है, वहीं दूसरी ओर 18 वर्षीय युवती ने अपने जीवन को लेकर अपना फैसला किया है.

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रिश्तों के टूटने की दर्दनाक तस्वीर

यह घटना केवल एक परिवार की नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक रिश्तों और पीढ़ियों के बीच पसंद तथा फैसलों को लेकर पैदा होने वाले टकराव की भी तस्वीर सामने रखती है. जिस बेटी को परिवार ने बचपन से पाला-पोसा, उसके जीवन के फैसले पर असहमति इतनी गहरी हुई कि पिता ने उसके जीवित रहते ही अंतिम संस्कार जैसी रस्में पूरी कर दीं. पाण्डेयबारा-आरापगार की यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. पिता के लिए यह फैसला गुस्से और पीड़ा का प्रतीक है, जबकि बेटी के जीवन से जुड़ा यह घटनाक्रम परिवार और समाज के सामने कई सवाल भी छोड़ गया है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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