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एथलेटिक्स में सदानंद कुमार ने बनायी पहचान

Updated at : 24 May 2024 10:01 PM (IST)
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एथलेटिक्स में सदानंद कुमार ने बनायी पहचान

हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के ग्राम चंदौल निवासी 24 वर्षीय सदानंद कुमार एथलेटिक्स में देश स्तर में अलग पहचान बनायी है

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24हैज्23में- सदानंद

संजय सागर

बड़कागांव. हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड के ग्राम चंदौल निवासी 24 वर्षीय सदानंद कुमार एथलेटिक्स में देश स्तर में अलग पहचान बनायी है. सदानंद कुमार अपने गांव चंदौल से प्रत्येक दिन पांच किमी पैदल चलकर संत मेरी स्कूल पहुंचता था. कभी कभार देर होने पर वह दौड़कर स्कूल जाया करता था. वहीं से उसकी शुरूआत हुई.

खेलो इंडिया गेम में स्वर्ण पदक जीता

खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2021 में वह स्वर्ण पदक जीता. इस पदक के लिए उन्होंने 100 मीटर दौड़ में नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ा था. सदानंद का गांव पहाड़ों एवं नदियों से घिरा हुआ है. आज भी उनका गांव जन समस्याओं से ग्रसित है. इस गांव के पंसस प्रतिनिधि सुरेश चौधरी गांव के विकास के लिए अथक प्रयास करता रहा है. सदानंद कुमार को मानसिक रूप से सहयोग भी करता है. उन्होंने बताया कि सदानंद कुमार कोलकाता में रहकर ओलंपिक खेल में भाग लेने के लिए तैयारी कर रहा है.

पिता की मृत्यु के 21 दिन बाद सदानंद का जन्म हुआ था

सदानंद का जन्म उनके पिता विजय कुमार रजवार की मृत्यु के 21 दिन बाद हुआ था. उस समय से उनकी माता मसोमात चंपा, दादा बेचन रजवार, दादी पुसनी देवी ने उनका लालन-पालन किया. सदानंद कुमार चंदौल प्राथमिक विद्यालय में एक साल पढ़ा. इसके बाद संत मैरी स्कूल बड़कागांव में उन्होंने 2011 से लेकर 2013 तक पढ़ाई की. इसके बाद हजारीबाग के संत स्टीफन स्कूल में 2013 में पांचवीं कक्षा में दाखिला लिया. संत स्टीफन स्कूल हजारीबाग से ही सदानंद ने 12वीं तक की पढ़ाई की. उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा 2019 में पास की. इंटर की पढ़ाई 2021 में पूरी की. वर्तमान में कोलकाता में इनकी पढ़ाई चल रही है.

दादा ने हमेशा सदानंद को प्रोत्साहित किया

सदानंद के दादा बेचन रजवार चंदोल प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य थे. उन्होंने कहा कि मैंने कभी भी अपने पोते सदानंद और पोती किरण कुमारी को पिता की कमी नहीं खलने दी. अपने पोते की प्रतिभा को देखकर मैं जानता था कि मेरा पोता एक दिन खेल में जरूर नाम रोशन करेगा. मैंने उसे हमेशा प्रेरित किया. सदानंद की मां चंपा ने बताया कि सदानंद बचपन से ही दौड़ने में काफी तेज था. वह तीन साल की उम्र से ही काफी तेज दौड़ता था, मुझे उसे पकड़ने में काफी मुश्किल होती थी. मुझे पता था कि वह आगे जाकर बड़ा खिलाड़ी बनेगा. आज सपना पूरा होता देख मैं काफी खुश हूं. बड़ी बहन किरण कुमारी ने भी खुशी जाहिर की.

सदानंद राष्ट्रीय स्तर पर 2017 में हुआ था प्रसिद्ध

सदानंद कुमार ने 2017 में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित अंडर-14 इंडिया ओलिंपिक दौड़ में 100 मीटर की दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था. उनके खेल को देखते हुए संत स्टीफन स्कूल प्रबंधक सदानंद को एक रुपये मासिक फीस में पढ़ाया. स्कूल ने उन्हें 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी थी. असम के गुवाहाटी में आयोजित खेलो इंडिया यूथ गेम्स 2020 में भी उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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