हजारीबाग में ‘रूआर 2026’ अभियान की शुरुआत, हर बच्चे को स्कूल से जोड़ने का लक्ष्य

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :14 Apr 2026 8:14 AM (IST)
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Hazaribagh News

जिला स्तरीय कार्यशाला में शिक्षा कर्मियों को रूआर कार्यक्रम की जानकारी देते डीएसई आकाश कुमार. फोटो: प्रभात खबर

Hazaribagh News: हजारीबाग जिले में एक अप्रैल से सत्र शुरू होने के साथ ही सभी सरकारी स्कूलों में रूआर कार्यक्रम शुरू किया गया है. यानी स्कूल से दूर रहने वाले पांच से 18 उम्र के बच्चे शिक्षा से जुड़ेंगे. डीएसई आकाश कुमार ने कार्यशाला आयोजित कर समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े कर्मियों को टास्क दिया है. इसमें एक-एक बच्चे को शिक्षा के मुख्य धारा से जोड़ना लक्ष्य है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग जिले में एक अप्रैल से नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही प्रारंभिक सरकारी स्कूलों में ‘रूआर 2026’ (बैक-टू-स्कूल) अभियान शुरू कर दिया गया है. जिले के 1400 से अधिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक इस कार्यक्रम को लागू किया गया है. इस पहल का मुख्य उद्देश्य हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना और शिक्षा की मुख्यधारा में लाना है. शिक्षा विभाग इस अभियान को मिशन मोड में चला रहा है ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रह जाए.

डायट में हुई जिला स्तरीय कार्यशाला

इस अभियान की बेहतर तैयारी और प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई. कार्यशाला की अध्यक्षता जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) आकाश कुमार ने की. इस दौरान समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े अधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए. बैठक में यह तय किया गया कि रूआर कार्यक्रम को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा और हर स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी.

आंगनबाड़ी से बच्चों को स्कूल में जोड़ने पर जोर

रूआर कार्यक्रम के तहत सबसे पहला कदम आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करना है. इन बच्चों को उनके नजदीकी प्राथमिक विद्यालयों में दाखिला दिलाया जाएगा. इसके अलावा पांच से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. जो बच्चे किसी कारणवश स्कूल से दूर हैं, उन्हें चिन्हित कर फिर से शिक्षा से जोड़ा जाएगा.

ड्रॉप-आउट फ्री जिला बनाने का लक्ष्य

समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले को ड्रॉप-आउट फ्री बनाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए प्रत्येक बच्चे की पहचान कर उसे स्कूल से जोड़ने की योजना बनाई गई है. शिक्षाकर्मी अपने-अपने पोषक क्षेत्र में घर-घर जाकर बच्चों की गिनती करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे. नये नामांकन के साथ-साथ पहले से नामांकित बच्चों की उपस्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा.

कई संस्थाओं और संगठनों की भागीदारी

इस अभियान को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग के साथ कई सहयोगी संस्थाएं भी जुड़ी हुई हैं. कार्यशाला में एडीपीओ, बीईईओ, एपीओ, डायट संकाय सदस्य, बीपीओ, बीपीएम, बीआरपी, सीआरपी और एमआईएस कर्मियों के अलावा पंचायती राज प्रतिनिधि भी मौजूद थे. इसके साथ ही पिरामल फाउंडेशन, गांधी फेलोज, रूम टू रीड और सी-थ्री जैसे एनजीओ के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित की. सभी ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया.

16 प्रखंडों में चलेगा विशेष जागरूकता अभियान

डीएसई आकाश कुमार ने बताया कि जिले के सभी 16 प्रखंडों (सदर, दारू, टाटीझरिया, इचाक, विष्णुगढ़, पदमा, बरही, बड़कागांव, केरेडारी, कटकमदाग, कटकमसांडी, बरकट्ठा, चौपारण, चलकुसा, डाडी और चुरचू) में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा. बीआरपी और सीआरपी को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस कार्यक्रम को बेहतर ढंग से संचालित करें.

हर बच्चे तक पहुंचेगी शिक्षा की रोशनी

रूआर 2026 अभियान के तहत शिक्षा अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के हर बच्चे तक पहुंचें और उसे स्कूल से जोड़ें. शिक्षाकर्मी एक-एक बच्चे की पहचान कर उसे पोषक क्षेत्र के विद्यालय में नामांकित करेंगे. इस अभियान का उद्देश्य न केवल नामांकन बढ़ाना है, बल्कि बच्चों की नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी सुनिश्चित करना है.

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शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की पहल

यह अभियान जिले की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. प्रशासन और शिक्षा विभाग की कोशिश है कि हजारीबाग को शिक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल जिला बनाया जाए. यदि यह अभियान सफल होता है, तो आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी यह एक उदाहरण बन सकता है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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