PM Kisan: हजारीबाग में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे किसान, बैरंग लौटा दे रहे कर्मचारी
Published by : Guru Swarup Mishra Updated At : 15 Jul 2024 8:17 PM
PM Kisan Samman Nidhi Yojana
PM Kisan: झारखंड के हजारीबाग जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना से कई किसान वंचित हैं. योजना का लाभ लेने के लिए वे अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी उन्हें बैरंग लौटा दे रहे हैं.
PM Kisan: कटकमसांडी(हजारीबाग): पीएम किसान सम्मान निधि योजना का लाभ हजारीबाग जिले के कटकमसांडी प्रखंड के कई किसानों को नहीं मिल पा रहा है. तमाम प्रयास के बाद भी अंचल कर्मियों का ध्यान इस ओर नहीं है, जबकि झारखंड सरकार का निर्देश है कि किसानों के लिए खास इस योजना से वंचित किसानों के घर-घर जाकर उन्हें जोड़ें. अंचल कार्यालय का चक्कर लगाकर किसान थक चुके हैं, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
योजना का लाभ लेने के लिए किसान लगा रहे चक्कर
सरकार का निर्देश है कि पीएम किसान के लिए कर्मचारी किसानों से घर-घर जाकर संपर्क करें और ईकेवाइसी, एनपीसीआई बैंक खाते से आधार सेटिंग व भूलेख अंकन करें, लेकिन इस आदेश की अंचल कर्मियों द्वारा अनदेखी की जा रही है. किसान इस योजना में नाम जोड़ने के लिए अंचल कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. इसके बाद भी कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा टाल-मटोल कर उन्हें बैरंग लौटा दिया जा रहा है.
कर्मचारियों की लापरवाही से किसान परेशान
केंद्र सरकार जहां किसानों की मदद के लिए यह योजना चला रही है, वहीं कटकमदाग के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण एक साल से किसान अंचल कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं. किसान सुखाड़ की आशंका से परेशान हैं, वहीं किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी उन्हें नहीं मिल पा रहा है. इससे भी उनकी परेशानी बढ़ी हुई है.
इन कारणों से किसानों को नहीं मिल पाता योजना का लाभ
कटकमदाग कृषि पदाधिकारी घनश्याम प्रसाद ने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना का लाभ तीन कारणों से रुक सकता है. पहला कारण ई केवाइसी, दूसरा बैंक एकाउंट का आधार लिंक और तीसरा कारण लैंड सेंडिंग है. ई केवाइसी और बैंक एकाउंट का आधार लिंक कराकर किसान अंचल कार्यालय में जमा करते हैं, लेकिन लैंड सेंडिंग (जमीन संबंधी कागजात) करने में कर्मी आनाकानी करते हैं. इस कारण किसानों का पैसा रुक जाता है. लगातार इस प्रकार की शिकायत उन्हें मिलती रहती है. अंचल कार्यालय का मामला होने के कारण वे इसमें कुछ नहीं कर पाते हैं.
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लेखक के बारे में
By Guru Swarup Mishra
मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.
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