आर्थिक विकास दर से ही दूर हो पायेगी बेरोजगारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 May 2017 9:34 AM (IST)
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हजारीबाग : लोक नीति शोध केंद्र के तत्वावधान में विभावि में एकदिनी सेमिनार का आयोजन गुरुवार को हुआ. विवेकानंद सभागार में आयोजित ग्रोथ रेट ऑफ इंडिया विषय पर सेमिनार में मुख्य संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि विवि की लोक नीति शोध केंद्र में कई माह से ग्रोथ रेट एवं किसानों […]
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हजारीबाग : लोक नीति शोध केंद्र के तत्वावधान में विभावि में एकदिनी सेमिनार का आयोजन गुरुवार को हुआ. विवेकानंद सभागार में आयोजित ग्रोथ रेट ऑफ इंडिया विषय पर सेमिनार में मुख्य संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि विवि की लोक नीति शोध केंद्र में कई माह से ग्रोथ रेट एवं किसानों की आय पर शोध चल रहा है. इन्होंने विकास दर के महत्व पर चर्चा की.
कहा: किसी भी देश की आर्थिक विकास दर तभी आदर्श माना जा सकता है, जब वहां के निवासियों की जीवनशैली में देश की आर्थिक विकास दर सुधार हो. आर्थिक विकास दर से जनता को कोई लेना-देना नहीं है. जनता को रोजमर्रा की चीज उपलब्ध होनी चाहिये. आर्थिक विकास दर से ही रोजमर्रा की चीजों को उपलब्ध कराया जा सकता है. वर्तमान वर्ष में देश का आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर रहा. अगले दो वर्षों में विकास दर और बढ़ेगा. विकास दर के लिए पूंजी निवेश जरूरी है. आर्थिक विकास दर ऐसा हो, ताकि बेरोजगारी दूर हो. विदेशी पूंजी पर समाधान जरूरी है. जनता के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क व बिजली का समाधान जरूरी है. अध्यक्षीय भाषण में विभावि कुलपति प्रो गुरदीप सिंह ने कहा कि विवि में लोक नीति शोध केंद्र की स्थापना से शोध को गति मिली है.
आनेवाले समय में इस केंद्र से जनता के लिए कई कारगर शोध होंगे. स्वागत भाषण प्रतिकुलपति प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने दिया. विषय प्रवेश सेमिनार के समन्वयक डॉ पूजा पाठक ने किया. इन्होंने विषय से संबंधित सभी पहलुओं की जानकारी दी. मंच संचालन डॉ कनुप्रिया गुप्ता ने किया. धन्यवाद ज्ञापन वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ एमके सिंह ने किया. तकनीकी सत्र में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ सजल मुखर्जी, रांची विवि के डॉ रमेश शरण, संत जेवियर्स कॉलेज रांची के डॉ हरिश्वर दयाल, पूर्व आइएएस डॉ केके भगत ने अपने-अपने विचार रखे. कार्यक्रम में मिलारानी सिंह, संजीव शर्मा, इंदर कुजूर, अशेष आनंद, डॉ सरोज रंजन, एमवीए के विद्यार्थी, शोधार्थी, शिक्षक उपस्थित थे.
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