30 से 300 हुए कोचिंग संस्थान

Published at :30 Jan 2017 12:26 AM (IST)
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30 से 300 हुए कोचिंग संस्थान

रवींद्र कुमार सिंह हजारीबाग : अलग झारखंड राज्य बनने के साथ ही हजारीबाग शिक्षा के क्षेत्र में नया आयाम गढ़ने लगा है. करीब डेढ़ दशक पहले इस शहर में गिने-चुने ही कोचिंग सेंटर हुआ करते थे. हालांकि संत कोलंबस जैसे चर्चित कॉलेज की स्थापना बिहार में सबसे पहले हुई थी. वर्ष 2001 में यूपीएससी व […]

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रवींद्र कुमार सिंह
हजारीबाग : अलग झारखंड राज्य बनने के साथ ही हजारीबाग शिक्षा के क्षेत्र में नया आयाम गढ़ने लगा है. करीब डेढ़ दशक पहले इस शहर में गिने-चुने ही कोचिंग सेंटर हुआ करते थे. हालांकि संत कोलंबस जैसे चर्चित कॉलेज की स्थापना बिहार में सबसे पहले हुई थी.
वर्ष 2001 में यूपीएससी व इंजीनियरिंग की तैयारी दो कोचिंग संस्थान की ओर से करायी जाती थी, लेकिन वर्तमान में यहां कई कोचिंग संस्थान हैं. अब यहां के छात्र-छात्राओं को मेडिकल, इंजीनियरिंग या सिविल सेवा की परीक्षाओं की तैयारी के लिए दूसरे राज्यों का रूख करने की जरूरत नहीं है.
हजारीबाग समेत झारखंड के अन्य जिलों व दूसरे प्रदेशों से करीब ढाई लाख विद्यार्थी यहां रह कर तैयारी कर रहे हैं. साथ ही हजारीबाग जिले के भी करीब दो से ढाई लाख छात्र अपनी पढ़ाई व विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी यहां कर रहे हैं. 10 वर्ष पहले यहां करीब 30 कोचिंग संस्थान थे. पढ़ाई के प्रति छात्रों की रुचि देख कोचिंग संस्थानों की संख्या में वृद्धि होने लगी. वर्ष 2003 से यहां संस्थान खुलने लगे. 2007-08 से कोचिंग की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि हुई. वर्तमान में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर यहां 300 से अधिक कोचिंग संस्थान खुल चुके हैं.
इन विषयों की होती है तैयारी
यूपीएससी, जेपीएससी, बीपीएससी, इंजीनियरिंग, मेडिकल, एसएससी, होटल मैनेजमेंट, बैंक, रेलवे, माइक्रो बायोलॉजी, नेट, सीए, सीपीटी, बीबीए, एमबीए, बीसीए, एमसीए, एनडीए, आर्मी, मर्चेंट नेवी, एसएसबी, क्लैट, एनसीएचएमसीटी, कैप्टन, सी-मैट, जैट, सीडीएस, मास कम्युनिकेशन, कंप्यूटर साइंस, सीडीपीओ, नर्सिंग, डेंटल, एयरफोर्स, आरआरबी, सीआइएसएफ, पीएचडी, एम-फील, एमटेक, बीटेक, बीएड, एमएड, 11वीं , 12वीं, स्नातक, बायो कमेस्ट्री, नवोदय, नेतरहाट, सैनिक स्कूल आदि की तैयारी होती है.
कोचिंग की तैयारी से संतुष्ट हैं छात्र
कोचिंग संस्थानों में तैयारी कराये जाने से छात्र संतुष्ट हैं. जहां उन्हें कुछ कमी दिखती है, वे प्रबंधन से बात कर दूसरे शिक्षकों की मांग करते हैं. यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र सौरभ कुमार, विकास महतो, धरनीधर प्रसाद, कृष्णकांत पांडेय, आइसा रहमान व तारा प्रसाद बताते हैं कि पढ़ाई से वे संतुष्ट हैं. यहां यूपीएससी की तैयारी में किसी न किसी कारणों से सफल नहीं होनेवाले छात्र क्लास लेते हैं. उन्हें यह जानकारी भी होती है कि कहां पर कमी रहने के कारण वे सफलता से चूक गये. उन्हें पढ़ाने का अनुभव भी होता है. यदि कोई शिक्षक उन्हें सही से समझा नहीं पाते हैं, तो वे प्रबंधन के सामने बातों को रखते हैं और उनके स्थान पर दूसरे शिक्षक को लाया जाता है. यहां छात्र स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ तैयारी भी करते हैं.
विद्यार्थियों को मिल रही है सफलता
कोचिंग संस्थानों से तैयारी करनेवाले छात्रों को सफलता भी मिल रही है. कमोबेश सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में छात्र सफल हो रहे हैं. कोचिंग संस्थानों व शिक्षाविदों के आंकलन को मानें, तो सफलता के लिए शिक्षा में और भी गुणवत्ता की जरूरत है. यहां मेडिकल में 50, आइआइटी 20, जी मेंस 300, जेपीएससी 50 से 60, यूपीएससी पांच से 10, कैट में 30 से 40, क्लैट में 30 से 40, नेट 20, सीए 15, बायो टेक्नोलॉजी में 150, सीएंडी में 40, विभिन्न विभागों में क्लर्क में 500, बैंक पीओ 25, आयुर्वेद 50, होमियोपैथिक 50, एनडीए 50, होटल मैनेजमेंट 500 के अलावा नर्सिंग, सीडीपीओ व अन्य परीक्षाओं में भी छात्र-छात्राओं को सफलता मिलती है.
देश में चर्चित है विनोबाभावे विवि
विनोबाभावे विवि शिक्षा के मामले में देश भर में चर्चित है. यहां देसी-विदेशी भाषाओं की पढ़ाई होती है. शैक्षिक मूल्यांकन में बी प्लस मिला है. यहां पर इसी साल इंटरनेशनल सेमिनार भी हुआ, जिसमें बाहर से बड़े-बड़े विद्वान भी आये. दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी शामिल हुए थे.
ऐतिहासिक कॉलेज है संत कोलंबस
संत कोलंबस कॉलेज की स्थापना 1899 में हुई थी. वैसे तो इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी सिटी ऑफ डबलिन ने 1895 में संत विनोबाभावे यूनिवर्सिटी के रूप में किया था, जिसे मिशन कॉलेज के रूप में भी जाना जाता था. 1896 में कोलकाता यूनिवर्सिटी से संबद्धता प्राप्त हुआ. 1899 में इसका सरकारीकरण हुआ.
1904 में कॉलेज को ए ग्रेड का दर्जा मिला. 1906-07 में संत कोलंबस कॉलेज के रूप में नाम पड़ा. संयुक्त बंगाल का यह पहला आवासीय कॉलेज बना, जहां विषय वार पांच छात्रों पर एक शिक्षक होते थे. शिक्षक भी आयरलैंड से आते थे. अभी इस कॉलेज में करीब 15 हजार छात्र-छात्राएं हैं. कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर एस के टोप्पो के अनुसार वर्तमान में यहां 21 विषयों की पढ़ाई होती है.
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