एड्स की शक्ल में तेजी से पंजे फैला रही है मौत

Updated at :30 Nov 2015 8:52 PM
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एड्स की शक्ल में तेजी से पंजे फैला रही है मौत

एड्स की शक्ल में तेजी से पंजे फैला रही है मौत विश्व एड्स दिवस पर विशेषकोडरमा बाजार. जिले में भी बड़े शहरों की तरह एड्स के मरीज बढ़ रहे हैं. 2012 से अब तक 292 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. 2012 में 68, 2013 में 85, 2014 में 68 व 2015 में अबतक […]

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एड्स की शक्ल में तेजी से पंजे फैला रही है मौत विश्व एड्स दिवस पर विशेषकोडरमा बाजार. जिले में भी बड़े शहरों की तरह एड्स के मरीज बढ़ रहे हैं. 2012 से अब तक 292 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. 2012 में 68, 2013 में 85, 2014 में 68 व 2015 में अबतक 71 लोग एचआइवी पॉजिटीव पाये गये हैं. जबकि इससे पूर्व 2008 से 2011 तक एड्स पीड़ितों की संख्या 447 है. यह आकंड़ा सदर अस्पताल के आइसीटीसी केंद्र का है. मरकच्चो व जयनगर प्रखंड में संचालित एफआइ सीटीसी केंद्र से अब तक आकंड़ा प्राप्त नहीं हुआ है. अगर उक्त दोनों प्रखंड का आकंड़ा इसमें जुड़ता तो, 2015 में पीड़ितों की संख्या अधिक हो सकती है. इसके अलावा डोमचांच व सतगांवा में एड्स की जांच का कोई केंद्र नहीं है. आइसीटीसी में कार्यरत महिला काउंसलर सुनीता कुमारी ने बताया कि 1 जनवरी 2015 से अबतक 1003 पुरुषों की एचआइवी जांच की गयी. इसमें 36 पॉजिटीव पाये गये. वहीं 1364 महिलाओं की जांच में 27 पॉजिटीव पायी गयीं. जबकि 1369 गर्भवती महिलाओं की जांच में सात एचआइवी पॉजिटीव पायी गयीं. कुल 3735 लोगों की जांच में 71 एचआइवी पॉजिटीव पाये गये. कैसे होता है यह रोगकाउंसलर सुनीता कुमारी ने बताया कि एड्स एक लाइलाज बीमारी है. असुरक्षित यौन संबंध के अलावा सेक्स वर्करों से संबंध स्थापित करने, असुरक्षित तरीके से सुई लगाने एवं संक्रमित व्यक्ति का खून लेने से यह रोग होता है. जांच का तरीकाकाउंसलर ने बताया कि एड्स की जांच त्रिस्तरीय होती है. पॉजिटीव पाये जाने पर मरीज को हजारीबाग स्थित एआरटी सेंटर भेजा जाता है. वहां सीडी 4 टेस्ट होता है. इस टेस्ट में 350 से नीचे सीडी 4 रहने पर एआरडी (एंटी रेट्रो वाइरल ट्रीटमेंट) शुरू किया जाता है. पीड़ित को हर छह माह पर चेक कराना पड़ता है. साथ ही पौष्टिक आहार व नियमित दवा लेनी पड़ती है. उन्होंने बताया कि इसकी दवा व जांच नि:शुल्क उपलब्ध है. जांच नहीं कराते हैं लोगकाउंसलर ने बताया कि जागरूकता के अभाव व शर्म के कारण कई लोग जांच नहीं कराते. जबकि बड़े शहरों में लोग रूटीन में इसकी जांच कराते हैं. अगर जिले में लोग सही तरह से जांच करायें, तो मरीजों की संख्या बढ़ सकती है. कुछ लोग तो गुपचुप तरीके से स्थानीय क्लिनिक व दूसरे जिले में जांच कराते हैं. पॉजिटीव पाये जाने पर इलाज कराया जाता है. उन्होंने बताया कि रोजगार के लिए जो लोग दूसरे प्रदेशों में जाते हैं, उनमें से कई यह रोग अपने परिवार वालों को भी दे देते हैं. ऐसे में जागरूकता जरूरी है.

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