लीड ़ विभावि ़़ ़ रोजगार के लिए युवाओं में कौशल विकास जरूरी

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लीड ़ विभावि ़़ ़ रोजगार के लिए युवाओं में कौशल विकास जरूरी युवाओं की संख्या ज्यादा लेकिन कौशल के कारण रोजगार नहीं उद्योग जगत में रोजगार है लेकिन युवाओं में कौशल नहींहजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय में इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन का राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ. 68वां ऑल इंडिया कॉमर्स कांफ्रेंस 2015 के तीन दिवसीय सेमिनार […]

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लीड ़ विभावि ़़ ़ रोजगार के लिए युवाओं में कौशल विकास जरूरी युवाओं की संख्या ज्यादा लेकिन कौशल के कारण रोजगार नहीं उद्योग जगत में रोजगार है लेकिन युवाओं में कौशल नहींहजारीबाग. विनोबा भावे विश्वविद्यालय में इंडियन कॉमर्स एसोसिएशन का राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ. 68वां ऑल इंडिया कॉमर्स कांफ्रेंस 2015 के तीन दिवसीय सेमिनार के दूसरे दिन मुख्य विषय मेक इन इंडिया पर 70 शोध पत्र पढ़े गये. इसमें 110 शोध पत्र आये थे. दूसरे दिन मेक इन इंडिया के अलावे तीन अन्य विषय इ रिटेलिंग, सोशल मीडिया, व्यवहारिक वित्त विषय पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया. जिसमें कुल 105 शोध पत्र पढ़े गये. मेक इन इंडिया : मेक इन इंडिया विषय पर विभावि के विवेकानंद सभागार में सेमिनार आयोजित हुआ. जिसमें पूरे देश भर से 110 शोध पत्र स्वीकृत किये गये थे. इसमें 70 शोध पत्र सभागार में पढ़े गये. इस सत्र के चेयरमैन प्रो के इरेस बैंगलूरु एवं को चेयरमैन डॉ आशीष जे दबे गुजरात थे. इन्होंने बताया कि भारत में युवाओं की संख्या ज्यादा है. लेकिन कौशल अभाव में इन्हें रोजगार नहीं मिल पाता है. इनमें कौशल के विकास से मेक इन इंडिया का उद्देश्य सफल होगा. विदेशों से तकनीक और पूंजी आ सकती है. लेकिन काम करनेवाले नहीं आ सकते. भारत के युवा ही काम करेंगे. इसलिए इनमें कौशल विकास जरूरी है. इ रिटेलिंग : वैश्विक परिदृष्य में इ रिटेलिंग की चुनौतियां एवं अवसर विषय पर देश भर से 180 पेपर आये. जिसमें 80 पेपर पढ़े गये. तकनीकी सत्र विवेकानंद सभागार में चला. इस सत्र के चेयरमैन प्रो एके तिवारी यूपी एवं को चेयरमैन जी राजेश्वरी मुंबई थी. इन्होंने बताया कि इ रिटेलिंग का भारत में भविष्य अच्छा है. भारत के ग्रामीण परिवेश में आधारभूत संरचनाओं की कमी के कारण विकास प्रभावित हो रहा है. ग्रामीण परिवेश में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत करने की जरूरत है. शोध पत्र पढ़ने वालों में प्रो परिमल एच व्यास बड़ौदा, डॉ राजकुमार गिरधारी आइजोल, चंदन कश्यप असम सहित 40 विद्वान शामिल थे. व्यवहारिक वित्त : विभावि के राधा कृष्णन सभागार में व्यवहारिक वित्त विषय पर तकनीकी सत्र चला. जिसमें 110 शोध पत्र आये. 35 शोध पत्र सभागार में पढ़े गये. इसमें चेयरमैन डॉ डी राजू केरल एवं को चेयरमैन डॉ के निर्मला बैंगलुरु थे. इन्होंने बताया कि इस विषय में शेयर बाजार से संबंधित पहलुओं पर चर्चा की गयी. उद्योग जगत में लेन-देन के पहलुओं पर भी चर्चा हुई. लेन-देन में उचित समन्वय होने से उद्योग जगत का विकास होगा. इसमें मुख्य रूप से डॉ विजय व्रत टी संगमा मेघालय, डॉ केएस ठाकुर ग्वालियर डॉ नरेंद्र कुमार रोहतक, अभिनव कुमार पांडेय सिलचर, डॉ प्रमोद कुमार उपाध्याय लखनऊ, डॉ वंदना सोनकर बीएचयू का शोध पत्र प्रभावी रहा. सोशल मीडिया : विभावि के आर्यभट्ट सेमिनार हॉल में सोशल मीडिया विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया. इसमें 30 शोध पत्र पढ़े गये. इसके चेयरमैन डॉ एएम गौरव महाराष्ट्र एवं को चेयरमैन डॉ शुभ्रो माइकल गोम्स भुटान थे. इन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया व्यवसायिक जगत में विशेष स्थान रख रहा है. पहले सोशल मीडिया को तरजीह नहीं दी जाती थी. लेकिन अब विशेष ध्यान रखते हुए उद्योग जगत आसपास के क्षेत्रों को कैसे विकसित किया जाये इस पर योजना बना कर काम करती है. शोध पत्र पढ़ने वालों में डॉ पूजा सिंह बीएचयू, डॉ सिसमा कुशवाहा दिल्ली, डॉ प्रवीण नागपुर, डॉ ओमप्रकाश शर्मा राजस्थान, नरेंद्र कुमार हरियाणा समेत 30 डेलीगेट्स शामिल हुए.

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