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बड़कागांव : सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद तलाक..तलाक..तलाक, घर से निकाला

Updated at : 27 Aug 2017 10:26 AM (IST)
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बड़कागांव : सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद तलाक..तलाक..तलाक, घर से निकाला

मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले से भले देश खुश है. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का मुस्लिम महिलाओं समेत तमाम बुद्धिजीवियों ने स्वागत किया, लेकिन न्यायालय के फैसले के ठीक एक दिन बाद यानी 23 अगस्त को बड़कागांव के बादम निवासी फातमा सुरैया पर उस वक्त गमों […]

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मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये फैसले से भले देश खुश है. सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का मुस्लिम महिलाओं समेत तमाम बुद्धिजीवियों ने स्वागत किया, लेकिन न्यायालय के फैसले के ठीक एक दिन बाद यानी 23 अगस्त को बड़कागांव के बादम निवासी फातमा सुरैया पर उस वक्त गमों का पहाड़ टूट पड़ा, जब उसके शौहर कैफी आलम ने उसे तलाक.. तलाक.. तलाक.. कहा और घर से निकाल दिया.
इस वाकया के बाद फातमा ने इसकी जानकारी अपने मायकेवालों को दी. घटना के बाद सामाजिक पहल का प्रयास किया गया, लेकिन नतीजा नहीं निकला. इसके बाद मामला बड़कागांव थाना पहुंचा. थाने में फातमा सुरैया ने न्याय की गुहार लगायी है.
क्या है मामला
चितरपुर निवासी मो मस्सिउल्लाह की पुत्री फातमा सुरैया ने बताया कि बादम निवासी फखरे आलम के पुत्र कैफी आलम से उसका निकाह आठ जून 2012 में हुआ था. निकाह के दौरान शौहर को दो लाख रुपये नकद के साथ फ्रिज, कूलर एवं छह लाख के जेवरात व सामग्री दी गयी थी.
निकाह के एक साल बाद पुत्र का जन्म हुआ. दोनों चितरपुर में रह रहे थे. इस बीच चितरपुर में जमीन खरीदने के लिए शौहर ने परिजनों से अप्रैल में पांच लाख रुपये लिया. बाद में वह मुकर गया. बाद में आठ अगस्त को दोनों बादम आ गये. 23 अगस्त को अचानक शाम पांच बजे जबरन तलाक, तलाक, तलाक कहा और घर से निकाल दिया. फातमा के अनुसार उसके शौहर का संबंध अन्य लड़की से है. सूचना मिलने पर परिवार के लोग बादम पहुंचे और समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने. कमेटी में भी मामले को सुलझाने का प्रयास हुआ, लेकिन हल नहीं निकला.
क्या कहते हैं शेख अब्दुल्ला
बड़कागांव थाना क्षेत्र अंतर्गत बादम गांव निवासी सामाजिक व्यक्ति शेख अब्दुल्ला ने बताया कि इन दोनों का तलाक अवैध है, लेकिन लड़का दूसरी शादी करने को लेकर उतारू है, जिसके कारण कोई भी बात सुनने को तैयार नहीं है. इसको लेकर 20 दिनों का समय लिया गया था और इस बीच मामला थाना पहुंच गया.
तलाक के मामले में मुझे न्यायालय पर भरोसा:फातमा
तलाक के मामले में बादम कमेटी की ओर से टालमटोल की गयी. 20 दिनों के बाद निर्णय लेने की बात कही गयी. तब तक वह फिर से निकाह कर लेता. ऐसी स्थिति में मैं परिजनों के साथ बड़कागांव थाना पहुंचीं और न्याय की गुहार लगायी. मुझे न्यायालय पर भरोसा है.
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