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शिकायतकर्ता को 1,64,452 रुपये का भुगतान करे कंपनी

Updated at : 02 Feb 2026 10:32 PM (IST)
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शिकायतकर्ता को 1,64,452 रुपये का भुगतान करे कंपनी

शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना के लिए 5000 व लिटिगेशन कोस्ट के लिए 1000 रुपये अलग से देना होगा

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गुमला. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष ओमप्रकाश पांडेय, सदस्य सरला गंझू व सैयद अली हसन फातमी ने भारतीय स्टेट बैंक जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश प्राप्ति के दो माह के अंदर शिकायतकर्ता शमीम खान को 146452 रुपये एक मुश्त भुगतान करने का आदेश पारित किया है. शिकायतकर्ता मोहम्मद शमीम खान ने दिनांक 25 अप्रैल 2025 को जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा कर कहा है कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक जेनरल इंश्योरेंस कंपनी से अपने वाहन (जेएच-01इक्यू- 2721) का 12297 रुपये भुगतान कर बीमा कराया था. बीमा की अवधि 20 मई 2024 से 19 मई 2025 तक थी. इस बीमा अवधि के अंदर दिनांक 23 दिसंबर 2024 को उनकी वाहन के ड्राइवर ऋषभ प्रसाद साहू अपनी बहन को लाने के लिए कुसमी छत्तीसगढ़ भेजा था. लेकिन जाते समय कुसमी में घुमावदार घाटी में वाहन पलट गया, जिसेसे क्रेन से निकाल कर खूंटी के शोरूम में मरम्मत के लिए भेजा था. इसकी सूचना कंपनी को शिकायतकर्ता ने पत्र लिख कर की थी और बीमित राशि का दावा किया था. लेकिन बीमा कंपनी ने फोरम की अदालत में लिखित जवाब देते हुए कहा कि मोहम्मद शमीम खान ने अपनी गाड़ी ऋषभ कुमार साव को बेच दिया था और ऋषभ कुमार साव ने उसी गाड़ी को पुनः सूरज कुमार को बेच दिया है. इसलिए शिकायतकर्ता गाड़ी का मालिक नहीं है. ऐसे में इसके दावा को स्वीकार नहीं किया जा सकता है. इसके उत्तर में शमीम खान ने प्रमाणित किया कि उसने गाड़ी की बिक्री नहीं हुई है. उन्होंने यदि गाड़ी बिक्री की होती, तो गाड़ी का नामांतरण क्रेता के नाम से होता. ऐसे में वह शिकायत भी नहीं कर सकता था. लेकिन बीमा कंपनी ने उसे मानने के लिए इंकार कर दिया, जिससे जिला उपभोक्ता फोरम की अदालत ने मामले की समग्र सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को आदेश दिया कि शिकायतकर्ता की मांग जायज है. इसलिए बीमित राशि 1,44,452 रुपये के साथ-साथ क्रेन का भाड़ा और डेंटिंग पेंटिंग का खर्च 20,000 समेत कुल 1,64,452 रुपये भुगतान करने का आदेश पारित किया है. साथ ही शिकायतकर्ता के मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के रूप में 5000 और मुकदमा खर्च के रूप में 1000 शिकायतकर्ता को भुगतान करने का आदेश किया है. यदि आदेश की तिथि से दो माह के अंदर राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो छह प्रतिशत ब्याज की दर के साथ पूरी राशि का भुगतान करना पड़ेगा.

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