गुमला का रहस्यमयी शिव मंदिर! बिना सीमेंट-छड़ के पत्थरों से बना, सदियों से टिका है मंदिर

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प्राचीन शिव मंदिर जो सिर्फ पत्थर से बना है| Prabhat Khabar Network

गुमला के पहाड़गांव स्थित प्राचीन शिव मंदिर और गुप्त गंगा की महिमा निराली है. सावन में यहां बिहार, बंगाल और ओड़िशा से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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गुमला. गुमला जिले में कई ऐसे प्राचीन शिवस्थल हैं, जिनके इतिहास और स्थापना काल की स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है. इन्हीं में कामडारा प्रखंड के सरिता पंचायत स्थित पहाड़गांव आमटोली का प्राचीन शिव मंदिर भी शामिल है. जंगल और पहाड़ों के बीच प्रकृति की गोद में स्थित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का इतिहास पुराना है. मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शंभु विराजमान हैं.

न सीमेंट, न छड़, पत्थरों से बना है प्राचीन मंदिर

मंदिर का निर्माण भी प्राचीन पद्धति से पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर किया गया है. इसमें सीमेंट और छड़ का इस्तेमाल नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आंधी-तूफान के बावजूद मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, इसे लोग भगवान शिव की कृपा मानते हैं. मंदिर से सटे गुप्त गंगा का विशेष महत्व है. यहां से सालों भर पानी बहता रहता है. श्रद्धालु गुप्त गंगा से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. सावन माह में मंदिर परिसर में मेला लगता है और पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता है.

मन्नत मांगने दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त

इस दौरान बिहार, बंगाल, ओड़िशा सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि मंदिर में पूरी श्रद्धा से मन्नत मांगने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि कई दिग्गज नेता और बड़े अधिकारी भी यहां पूजा-अर्चना के लिए आते रहे हैं. मंदिर परिसर में हाल के वर्षों में बजरंगबली, माता पार्वती, भगवान गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाये गये हैं, जहां सालों भर श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं.

विकास की पहल शुरू हुई, लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी

स्थानीय लोगों ने प्राचीन शिव मंदिर और गुप्त गंगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग जिला प्रशासन से की है. गुमला के निवर्तमान उप विकास आयुक्त हेमंत सती ने भी मंदिर के विकास और इसकी पहचान को व्यापक बनाने की पहल शुरू की थी. हालांकि उनके स्थानांतरण के बाद यह प्रयास अधूरा रह गया.

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सड़क और रेल दोनों मार्गों से पहुंचना आसान

यह मंदिर कामडारा प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर पहाड़गांव में स्थित है. यहां सड़क के साथ रेल मार्ग से भी पहुंचा जा सकता है. पकरा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब एक किमी है. सड़क मार्ग से बाकूटोली होते हुए बक्सपुर मोड़ और पकरा मंदिर टोली के रास्ते मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.

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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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