सड़क के इंतजार में बीत गये 79 साल, अब भी पगडंडी ही सहारा

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डहुटोली गांव में गांव जाने वाली सड़क| Prabhat Khabar Network

झारखंड के डहुटोली गांव में आजादी के 79 साल बाद भी पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीण पगडंडियों के सहारे चलने को मजबूर हैं, विकास की राह देख रहे हैं 150 लोग।

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सतीश कुमार की रिपोर्ट

गुमला,कामडारा . देश की आजादी के 79 साल बीत गये. झारखंड राज्य के गठन को भी 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं. इस दौरान राज्य में कई सरकारें बनीं और कई मुख्यमंत्री बदले, लेकिन कामडारा प्रखंड की टुरुंडू पंचायत अंतर्गत डहुटोली गांव की तस्वीर आज तक नहीं बदल सकी. गांव के ग्रामीण आज भी विकास की राह देख रहे हैं. सबसे बड़ी समस्या गांव तक पहुंचने वाली सड़क की है. ग्रामीण लंबे समय से गांव तक पहुंच पथ निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है. कामडारा प्रखंड मुख्यालय से करीब छह किमी की दूरी पर स्थित टुरुंडू पंचायत मुख्यालय से लगभग एक किमी अंदर डहुटोली गांव बसा है. गांव तक पहुंचने के लिए आज तक कच्ची सड़क तक नहीं बन सकी है. ग्रामीण रोजाना ऊबड़-खाबड़ पथरीले रास्ते और पगडंडियों के सहारे मुख्य सड़क तक आने-जाने को मजबूर हैं. बरसात में स्थिति और बदतर हो जाती है.

खेतों की पगडंडी से स्कूल जाते हैं बच्चे

गांव के स्कूली बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्हें खेतों और पगडंडियों से होकर प्रतिदिन विद्यालय आना-जाना पड़ता है. बारिश के दिनों में कीचड़ और फिसलन के कारण बच्चों के साथ ग्रामीणों की भी मुश्किलें बढ़ जाती हैं. डहुटोली गांव में करीब 34 घर हैं और इसकी आबादी लगभग 150 है. विकास के नाम पर फिलहाल गांव में सिर्फ बिजली पहुंची है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन उनकी समस्या पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया.

सोलर जलमीनार भी बेकार

पेयजल समस्या भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बनी हुई है. ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन वर्ष पूर्व गांव में सोलर युक्त जलमीनार का निर्माण कराया गया था, लेकिन रखरखाव और मरम्मत के अभाव में वह अब बेकार पड़ी है. वर्तमान में ग्रामीण पेयजल के लिए कुएं पर निर्भर हैं. गर्मी के दिनों में कुआं सूख जाता है, जबकि बरसात में बारिश का पानी भर जाने से परेशानी बढ़ जाती है.

आंगनबाड़ी केंद्र ही बच्चों का सहारा

गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र जरूर संचालित है, जहां स्थानीय छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा के साथ पोषाहार मिलता है. हालांकि गांव के अंदर पीसीसी सड़क नहीं होने से बारिश के दिनों में गलियां पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं. इससे आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचने में भी ग्रामीणों व बच्चों को परेशानी होती है.

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उपायुक्त से मिलकर सड़क निर्माण की पहल का आश्वासन

गांव की समस्याओं को लेकर कामडारा के जिप सदस्य दीपक कंडुलना से बातचीत की गयी. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने उन्हें गांव की समस्याओं से अवगत कराया है. उन्होंने बताया कि इस मामले में गुमला के उपायुक्त से बातचीत कर डहुटोली गांव तक सड़क निर्माण कराने और अन्य विकास कार्यों को लेकर पहल की जायेगी.

14 गुम 13 में डहुटोली गांव14 गुम 14 में गांव जाने वाली सड़क13 गुम 15 में दीपक कंडुलना | Prabhat Khabar Network
14 गुम 13 में डहुटोली गांव14 गुम 14 में गांव जाने वाली सड़क13 गुम 15 में दीपक कंडुलना | Prabhat Khabar Network
14 गुम 13 में डहुटोली गांव14 गुम 14 में गांव जाने वाली सड़क13 गुम 15 में दीपक कंडुलना | Prabhat Khabar Network
14 गुम 13 में डहुटोली गांव14 गुम 14 में गांव जाने वाली सड़क13 गुम 15 में दीपक कंडुलना | Prabhat Khabar Network


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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