Table of Contentsगुमला में सबसे ज्यादा विधायक उरांव जनजाति से1995 से गुमला विधानसभा सीट पर झामुमो बनाम भाजपा2019 के चुनाव परिणाम2014 के चुनाव परिणाम2009 के चुनाव परिणामतेजी से विकास कार्य हुए : भूषण तिर्की5 साल गायब रहे विधायक : मिशिर कुजूरगुमला विधानसभा क्षेत्र में हुए 3 महत्वपूर्ण कार्यगुमला विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्देमैं साइकिल से चुनाव प्रचार करता था : बैरागी उरांवशहीद के गांवों का विकास हो : संतोष झागुमला विधानसभा सीट से अब तक के विधायक Jharkhand Assembly Election|Gumla Assembly Constituency|गुमला, दुर्जय पासवान : गुमला विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. वर्ष 1951 में गुमला विधानसभा सीट अस्तित्व में आयी. तब से अब तक क्षेत्र से 16 विधायक चुने गये हैं. गुमला के पहले विधायक सुकरू उरांव थे. गुमला में सबसे ज्यादा विधायक उरांव जनजाति से इस सीट पर उरांव जनजाति के विधायकों का सबसे ज्यादा बार कब्जा रहा है. गुमला में सबसे अधिक छह बार भाजपा के विधायक चुने गये हैं. वहीं, कांग्रेस व झामुमो के कब्जे में तीन-तीन बार यह सीट रही है. कांग्रेस के बैरागी उरांव तीन बार विधायक बनने वाले एकमात्र नेता हैं. सुकरू उरांव, रोपना उरांव व भूषण तिर्की दो-दो बार विधायक बने हैं. 1990 के बाद कोई भी जीत की हैट्रिक नहीं लगा सका. 1995 से गुमला विधानसभा सीट पर झामुमो बनाम भाजपा वर्ष 1995 से 2019 तक के झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) व झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच मुकाबला होता रहा है. गुमला विधानसभा क्षेत्र में गुमला, रायडीह, चैनपुर, डुमरी व जारी प्रखंड शामिल है. सभी पांच प्रखंडों की कई समस्याओं को अब तक समाधान का इंतजार है. गुजरे 24 वर्षों से बाइपास सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. गुमला को रेल लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है. परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का के नाम से सृजित अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड अभी भी विकास के लिए कदमताल कर रहा है. गुमला में पलायन भी बड़ा मुद्दा है. गुमला शहर का एरियल व्यू. 2019 के चुनाव परिणाम प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोटभूषण तिर्कीझामुमो67130मिशिर कुजूरभाजपा59537 2014 के चुनाव परिणाम प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोटशिवशंकर उरांवभाजपा50473भूषण तिर्कीझामुमो46441 2009 के चुनाव परिणाम प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोटकमलेश उरांवभाजपा39555भूषण तिर्कीझामुमो27468 गुमला के करमटोली से बांसडीह होते हुए कांसीर तक सड़क बन गयी. परंतु, अभी भी कई ऐसे आदिम जनजाति गांव है. जहां विकास नहीं हुआ है. पानी, बिजली, सड़क व सिंचाई की समस्या है. जिसे दूर करने की जरूरत है. देवकी देवी, महिला समाजसेवी तेजी से विकास कार्य हुए : भूषण तिर्की गुमला विधायक भूषण तिर्की ने अपने पांच साल के कार्यकाल को विकास का कार्यकाल बताया है. उन्होंने कहा कि गुमला के हर क्षेत्र में विकास के काम हुए हैं. अस्पताल में डॉक्टर की कमी दूर हुई है. अस्पताल में कई सेवाओं को चालू किया गया है. बेड की संख्या बढ़ाने का प्रयास हो रहा है. सबसे महत्वपूर्ण सड़क करमटोली भाया बांसडीह घाटी से कांसीर तक बन गयी. मांझाटोली से चैनपुर, सोकराहातू घाटी से कुरूमगढ़ व कुरूमगढ़ से चैनपुर तक की महत्वपूर्ण सड़क पूरी हो गयी है. अभी चैनपुर से जारी, चैनपुर से डुमरी तक सड़क बन रही है. युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोन दिलाया गया. गुमला शहर के कई मुहल्लों में बिजली पोल नहीं है. लोग बांस के सहारे बिजली तार अपने घर तक ले गये हैं. जिससे हादसा का डर बना रहता है. जहां पोल व तार नहीं है. वहीं पोल व तार लगाने की बहुत जरूरत है. पिंकी कुमारी, गृहिणी, खड़िया पाड़ा 5 साल गायब रहे विधायक : मिशिर कुजूर वर्ष 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे भाजपा नेता मिशिर कुजूर ने कहा है कि गुमला विधायक भूषण तिर्की का कार्यकाल विकास के नाम पर शून्य रहा है. पांच साल में उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यक समाज की राजनीति की. कुछ चुनिंदा अल्पसंख्यक विद्यालय है. जहां पर वह लाइट बत्ती, पीसीसी सड़क आदि का अपने विधायक निधि से ही निर्माण करवा पाये हैं. बाकी ग्रामीण क्षेत्रों में अगर देखा जाये, तो कहीं पर उनका काम नहीं दिखता है. गुमला नगर में पेयजल की समस्या पर भी वह पांच साल में गंभीर नहीं दिखे. गुमला में बिजली की समस्या है. उसे भी दूर नहीं कर सके. मुस्लिम बहुल इलाकों में सड़क, पानी व बिजली की समस्या है. पोल व तार है. परंतु, आये दिन हादसे होते हैं. कई मुहल्ले में सड़क व नाली नहीं है. बरसात में काफी परेशानी होती है. पीने के पानी की भी समस्या है. सैय्यदा खातून, महिला समाजसेवी गुमला विधानसभा क्षेत्र में हुए 3 महत्वपूर्ण कार्य करमटोली से लेकर बांसडीह घाटी होते हुए कांसीर तक सड़क बन गयी. गुमला चंदाली में नया समाहरणालय भवन का निर्माण अंतिम चरण में है. सोकराहातू घाटी से कुरूमगढ़ व कुरूमगढ़ से चैनपुर तक सड़क बन गयी है. गुमला विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे गुमला अभी तक रेल लाइन से नहीं जुड़ सका है. जबकि यह पुरानी मांग है. लोग 75 साल से गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं. शहीद बख्तर साय व शहीद मुंडल सिंह के रायडीह प्रखंड स्थित वासुदेव कोना गांव व युद्ध स्थल उपेक्षित है. लोग युद्ध स्थल गढ़ पहाड़ में पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं. गुमला शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं होती है. जबकि वर्षों पहले पाइप बिछाया गया है. परंतु, उक्त पाइप से अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है. बिजली भी गुमला विधानसभा की बड़ी समस्या है. पावर हाउस में कम क्षमता का ट्रांसफार्मर होने की वजह से गुमला को पर्याप्त बिजली नहीं मिलती है. गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज में शिक्षक व संसाधन का अभाव है. लोहरदगा, सिमडेगा व गुमला जिला को मिलाकर विश्वविद्यालय बनाने की मांग भी लगातार उठती रही है. मैं साइकिल से चुनाव प्रचार करता था : बैरागी उरांव गुमला विधानसभा से तीन बार विधायक बन कर इतिहास बनानेवाले बैरागी उरांव की उम्र अब 81 वर्ष हो गयी है. 1943 ईस्वी में इनका जन्म हुआ था. केओ कॉलेज गुमला में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर रहते हुए उन्होंने गुमला विधानसभा से चुनाव लड़ कर जीता था. श्री बैरागी उरांव 1972, 1980 व 1985 में चुनाव जीते थे. श्री उरांव ने कहा सबसे पहले 1972 में जब चुनाव हुआ था. उस समय गुमला में चार पहिया गाड़ी शहर में मात्र दो लोगों के पास थी. एक चंदर साव व दूसरा घुड़ा भगत थे. इन लोगों के पास जीप गाड़ी थी. एक दिन के चुनाव प्रचार के लिए ये लोग 60 रुपये भाड़ा लेते थे. हालांकि मैं जब चुनाव लड़ा था तो साइकिल व बैलगाड़ी से प्रचार करता था. उस समय गुमला विधानसभा क्षेत्र में गुमला, कामडारा व बसिया प्रखंड आता था. चूंकि कॉलेज में पढ़ा रहा था, तो गुमला में ही रहता था. जबकि मेरा घर चैनपुर प्रखंड में है. गुमला से मैं बसिया व कामडारा प्रखंड के कई दुर्गम गांव 60 से 70 किमी दूर तक साइकिल से ही प्रचार करने निकल जाता था. रात को गांवों में प्रचार के दौरान गांव में रूक जाता था. उस समय प्रचार करने का मजा ही अलग था. जिस गांव में जाते थे. लोग मेहमान बनाने को आतुर रहते थे. 1972 के चुनाव में मैंने 30 हजार रुपये खर्च कर चुनाव जीता था. श्री उरांव ने कहा कि 1972 में विधायक फंड नहीं हुआ करता था. हम प्रशासन से मिलकर विकास का काम किये हैं. शहीद के गांवों का विकास हो : संतोष झा सेव योर लाइफ गुमला के सचिव संतोष झा ने कहा है कि गुमला विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों का जरूर विकास हुआ है. परंतु, अभी भी कई ऐसी समस्याएं है. जिसको दूर करना जरूरी है. जैसे अधूरी बाइपास सड़क को पूरा होना जरूरी है. गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ा जाये. गुमला में फार्मेसी कॉलेज की स्थापना हो. अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ायी जाये. डॉक्टर की कमी को दूर की जाये. शहीद के गांवों का विकास हो. गुमला विधानसभा सीट से अब तक के विधायक चुनाव का वर्षविजेता उम्मीदवारपार्टी का नाम1951सुकरू उरांवझारखंड पार्टी (जेएचपी)1957सुकरू उरांवजेएचपी1962पुनई उरांवजेपी1967रोपना उरांवजनसंघ1969रोपना उरांवजनसंघ1972बैरागी उरांवकांग्रेस1977जयराम उरांवनिर्दलीय1980बैरागी उरांवकांग्रेस1985बैरागी उरांवकांग्रेस1990जीतवाहन बड़ाइकभाजपा1995बेरनार्ड मिंजझामुमो2000सुदर्शन भगतभाजपा2005भूषण तिर्कीझामुमो2009कमलेश उरांवभाजपा2014शिवशंकर उरांवभाजपा2019भूषण तिर्कीझामुमो Also Read सिमडेगा विधानसभा सीट पर कांग्रेस-भाजपा के लिए फैक्टर रही है झारखंड पार्टी, ये हैं बड़े चुनावी मुद्दे Jharkhand Assembly Election: चक्रधरपुर में झामुमो-भाजपा की होती रही है भिड़ंत, जिला बनाने की मांग मुख्य मुद्दा लिट्टीपाड़ा में 44 साल से अपराजेय झामुमो, शुद्ध पेयजल को आज भी तरस रहे लोग Jharkhand Assembly Election|हजारीबाग में हारे थे बिहार के मुख्यमंत्री केबी सहाय, क्या हैं विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे घाटशिला विधानसभा सीट पर कांग्रेस को हराकर झामुमो ने गाड़ा झंडा, भाजपा को हराकर जीते रामदास सोरेन Jharkhand: सिमरिया एससी सीट पर 4 बार जीती भाजपा, विस्थापन और सिंचाई आज भी बड़ी समस्या