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गुमला विधानसभा सीट पर भाजपा को पछाड़ झामुमो ने किया था कब्जा, 24 साल से जिंदा है बाइपास का मुद्दा

Updated at : 14 Jul 2024 2:09 PM (IST)
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jharkhand assembly election 2024 gumla assembly constituency

Jharkhand Assembly Election: गुमला विधानसभा का रिपोर्ट कार्ड.

Jharkhand Assembly Election: गुमला विधानसभा सीट पर भाजपा को हराकर झामुमो ने कब्जा किया था. 1995 से दोनों दलों के बीच मुकाबला हो रहा है.

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Jharkhand Assembly Election|Gumla Assembly Constituency|गुमला, दुर्जय पासवान : गुमला विधानसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है. वर्ष 1951 में गुमला विधानसभा सीट अस्तित्व में आयी. तब से अब तक क्षेत्र से 16 विधायक चुने गये हैं. गुमला के पहले विधायक सुकरू उरांव थे.

गुमला में सबसे ज्यादा विधायक उरांव जनजाति से

इस सीट पर उरांव जनजाति के विधायकों का सबसे ज्यादा बार कब्जा रहा है. गुमला में सबसे अधिक छह बार भाजपा के विधायक चुने गये हैं. वहीं, कांग्रेस व झामुमो के कब्जे में तीन-तीन बार यह सीट रही है. कांग्रेस के बैरागी उरांव तीन बार विधायक बनने वाले एकमात्र नेता हैं. सुकरू उरांव, रोपना उरांव व भूषण तिर्की दो-दो बार विधायक बने हैं. 1990 के बाद कोई भी जीत की हैट्रिक नहीं लगा सका.

1995 से गुमला विधानसभा सीट पर झामुमो बनाम भाजपा

वर्ष 1995 से 2019 तक के झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच मुकाबला होता रहा है. गुमला विधानसभा क्षेत्र में गुमला, रायडीह, चैनपुर, डुमरी व जारी प्रखंड शामिल है. सभी पांच प्रखंडों की कई समस्याओं को अब तक समाधान का इंतजार है. गुजरे 24 वर्षों से बाइपास सड़क का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. गुमला को रेल लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है. परमवीर चक्र विजेता शहीद अलबर्ट एक्का के नाम से सृजित अलबर्ट एक्का जारी प्रखंड अभी भी विकास के लिए कदमताल कर रहा है. गुमला में पलायन भी बड़ा मुद्दा है.

गुमला शहर का एरियल व्यू.

2019 के चुनाव परिणाम

प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोट
भूषण तिर्कीझामुमो67130
मिशिर कुजूरभाजपा59537

2014 के चुनाव परिणाम

प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोट
शिवशंकर उरांवभाजपा50473
भूषण तिर्कीझामुमो46441

2009 के चुनाव परिणाम

प्रत्याशी का नामपार्टी का नामप्राप्त वोट
कमलेश उरांवभाजपा39555
भूषण तिर्कीझामुमो27468

गुमला के करमटोली से बांसडीह होते हुए कांसीर तक सड़क बन गयी. परंतु, अभी भी कई ऐसे आदिम जनजाति गांव है. जहां विकास नहीं हुआ है. पानी, बिजली, सड़क व सिंचाई की समस्या है. जिसे दूर करने की जरूरत है.

देवकी देवी, महिला समाजसेवी

तेजी से विकास कार्य हुए : भूषण तिर्की

गुमला विधायक भूषण तिर्की ने अपने पांच साल के कार्यकाल को विकास का कार्यकाल बताया है. उन्होंने कहा कि गुमला के हर क्षेत्र में विकास के काम हुए हैं. अस्पताल में डॉक्टर की कमी दूर हुई है. अस्पताल में कई सेवाओं को चालू किया गया है. बेड की संख्या बढ़ाने का प्रयास हो रहा है. सबसे महत्वपूर्ण सड़क करमटोली भाया बांसडीह घाटी से कांसीर तक बन गयी. मांझाटोली से चैनपुर, सोकराहातू घाटी से कुरूमगढ़ व कुरूमगढ़ से चैनपुर तक की महत्वपूर्ण सड़क पूरी हो गयी है. अभी चैनपुर से जारी, चैनपुर से डुमरी तक सड़क बन रही है. युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए लोन दिलाया गया.

गुमला शहर के कई मुहल्लों में बिजली पोल नहीं है. लोग बांस के सहारे बिजली तार अपने घर तक ले गये हैं. जिससे हादसा का डर बना रहता है. जहां पोल व तार नहीं है. वहीं पोल व तार लगाने की बहुत जरूरत है.

पिंकी कुमारी, गृहिणी, खड़िया पाड़ा

5 साल गायब रहे विधायक : मिशिर कुजूर

वर्ष 2019 के चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे भाजपा नेता मिशिर कुजूर ने कहा है कि गुमला विधायक भूषण तिर्की का कार्यकाल विकास के नाम पर शून्य रहा है. पांच साल में उन्होंने सिर्फ और सिर्फ अल्पसंख्यक समाज की राजनीति की. कुछ चुनिंदा अल्पसंख्यक विद्यालय है. जहां पर वह लाइट बत्ती, पीसीसी सड़क आदि का अपने विधायक निधि से ही निर्माण करवा पाये हैं. बाकी ग्रामीण क्षेत्रों में अगर देखा जाये, तो कहीं पर उनका काम नहीं दिखता है. गुमला नगर में पेयजल की समस्या पर भी वह पांच साल में गंभीर नहीं दिखे. गुमला में बिजली की समस्या है. उसे भी दूर नहीं कर सके.

मुस्लिम बहुल इलाकों में सड़क, पानी व बिजली की समस्या है. पोल व तार है. परंतु, आये दिन हादसे होते हैं. कई मुहल्ले में सड़क व नाली नहीं है. बरसात में काफी परेशानी होती है. पीने के पानी की भी समस्या है.

सैय्यदा खातून, महिला समाजसेवी

गुमला विधानसभा क्षेत्र में हुए 3 महत्वपूर्ण कार्य

  • करमटोली से लेकर बांसडीह घाटी होते हुए कांसीर तक सड़क बन गयी.
  • गुमला चंदाली में नया समाहरणालय भवन का निर्माण अंतिम चरण में है.
  • सोकराहातू घाटी से कुरूमगढ़ व कुरूमगढ़ से चैनपुर तक सड़क बन गयी है.

गुमला विधानसभा क्षेत्र के चुनावी मुद्दे

  • गुमला अभी तक रेल लाइन से नहीं जुड़ सका है. जबकि यह पुरानी मांग है. लोग 75 साल से गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं.
  • शहीद बख्तर साय व शहीद मुंडल सिंह के रायडीह प्रखंड स्थित वासुदेव कोना गांव व युद्ध स्थल उपेक्षित है. लोग युद्ध स्थल गढ़ पहाड़ में पार्क बनाने की मांग कर रहे हैं.
  • गुमला शहर के कई इलाकों में पानी की सप्लाई नहीं होती है. जबकि वर्षों पहले पाइप बिछाया गया है. परंतु, उक्त पाइप से अब तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हुई है.
  • बिजली भी गुमला विधानसभा की बड़ी समस्या है. पावर हाउस में कम क्षमता का ट्रांसफार्मर होने की वजह से गुमला को पर्याप्त बिजली नहीं मिलती है.
  • गुमला के कार्तिक उरांव कॉलेज में शिक्षक व संसाधन का अभाव है. लोहरदगा, सिमडेगा व गुमला जिला को मिलाकर विश्वविद्यालय बनाने की मांग भी लगातार उठती रही है.

मैं साइकिल से चुनाव प्रचार करता था : बैरागी उरांव

गुमला विधानसभा से तीन बार विधायक बन कर इतिहास बनानेवाले बैरागी उरांव की उम्र अब 81 वर्ष हो गयी है. 1943 ईस्वी में इनका जन्म हुआ था. केओ कॉलेज गुमला में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर रहते हुए उन्होंने गुमला विधानसभा से चुनाव लड़ कर जीता था. श्री बैरागी उरांव 1972, 1980 व 1985 में चुनाव जीते थे. श्री उरांव ने कहा सबसे पहले 1972 में जब चुनाव हुआ था. उस समय गुमला में चार पहिया गाड़ी शहर में मात्र दो लोगों के पास थी. एक चंदर साव व दूसरा घुड़ा भगत थे. इन लोगों के पास जीप गाड़ी थी. एक दिन के चुनाव प्रचार के लिए ये लोग 60 रुपये भाड़ा लेते थे. हालांकि मैं जब चुनाव लड़ा था तो साइकिल व बैलगाड़ी से प्रचार करता था. उस समय गुमला विधानसभा क्षेत्र में गुमला, कामडारा व बसिया प्रखंड आता था. चूंकि कॉलेज में पढ़ा रहा था, तो गुमला में ही रहता था. जबकि मेरा घर चैनपुर प्रखंड में है. गुमला से मैं बसिया व कामडारा प्रखंड के कई दुर्गम गांव 60 से 70 किमी दूर तक साइकिल से ही प्रचार करने निकल जाता था. रात को गांवों में प्रचार के दौरान गांव में रूक जाता था. उस समय प्रचार करने का मजा ही अलग था. जिस गांव में जाते थे. लोग मेहमान बनाने को आतुर रहते थे. 1972 के चुनाव में मैंने 30 हजार रुपये खर्च कर चुनाव जीता था. श्री उरांव ने कहा कि 1972 में विधायक फंड नहीं हुआ करता था. हम प्रशासन से मिलकर विकास का काम किये हैं.

शहीद के गांवों का विकास हो : संतोष झा

सेव योर लाइफ गुमला के सचिव संतोष झा ने कहा है कि गुमला विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों का जरूर विकास हुआ है. परंतु, अभी भी कई ऐसी समस्याएं है. जिसको दूर करना जरूरी है. जैसे अधूरी बाइपास सड़क को पूरा होना जरूरी है. गुमला को रेलवे लाइन से जोड़ा जाये. गुमला में फार्मेसी कॉलेज की स्थापना हो. अस्पताल में बेड की संख्या बढ़ायी जाये. डॉक्टर की कमी को दूर की जाये. शहीद के गांवों का विकास हो.

गुमला विधानसभा सीट से अब तक के विधायक

चुनाव का वर्षविजेता उम्मीदवारपार्टी का नाम
1951सुकरू उरांवझारखंड पार्टी (जेएचपी)
1957सुकरू उरांवजेएचपी
1962पुनई उरांवजेपी
1967रोपना उरांवजनसंघ
1969रोपना उरांवजनसंघ
1972बैरागी उरांवकांग्रेस
1977जयराम उरांवनिर्दलीय
1980बैरागी उरांवकांग्रेस
1985बैरागी उरांवकांग्रेस
1990जीतवाहन बड़ाइकभाजपा
1995बेरनार्ड मिंजझामुमो
2000सुदर्शन भगतभाजपा
2005भूषण तिर्कीझामुमो
2009कमलेश उरांवभाजपा
2014शिवशंकर उरांवभाजपा
2019भूषण तिर्कीझामुमो

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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