Jharkhand: सिमरिया एससी सीट पर 4 बार जीती भाजपा, विस्थापन और सिंचाई आज भी बड़ी समस्या

सिमरिया एससी विधानसभा सीट का रिपोर्ट कार्ड.
Jharkhand Assembly Election: झारखंड में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज हो गई है. आज हम आपको बता रहे हैं सिमरिया एसटी सीट का रिपोर्ट कार्ड.
Jharkhand Assembly Election|चतरा, दीनबंधू/मो तसलीम : झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मी तेज हो गयी है. इंडिया और एनडीए गठबंधन सियासी बिसात पर गोटियां चलाने लगे हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दो दिग्गज केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व सरमा को प्रभारी बनाकर झारखंड भेज दिया है.
इंडिया कैंप में चल रहा बैठकों का दौर
इंडिया कैंप में बैठकों का दौर चल रहा है. राज्य में पांच जनवरी -2025 तक सरकार गठन की समय सीमा तय है. नियत समय पर चुनाव हुए, तो नवंबर-दिसंबर में चुनाव होना है. अटकलें हैं कि झारखंड में विधानसभा का चुनाव हरियाणा और महाराष्ट्र के साथ अक्तूबर में हो सकता है. प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) झारखंड की सभी 81 विधानसभाओं का रिपोर्ट कार्ड छाप रहा है. विधानसभा रिपोर्ट में राजनीतिक समीकरण, एजेंडे और लोगों के मुद्दों को विस्तार से पढ़ें. पेश है- सिमरिया एससी विधानसभा सीट का रिपोर्ट कार्ड.

2019 में 12 साल बाद टूटा भाजपा का वनवास
वर्ष 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सिमरिया विधानसभा सीट जीतकर किशुनदास ने भाजपा का 12 वर्षों का वनवास तोड़ा था. इस सीट से उपेंद्रनाथ दास 4 बार विधायक रहे. पहली बार वर्ष 1977 में वह जीएनपी के टिकट पर जीते थे. इसके बाद 1990, 1995 व 2005 में उपेंद्रनाथ दास भाजपा के विधायक बने. लेकिन उपेंद्रनाथ दास के निधन के बाद इस सीट से उप चुनाव में भाकपा के रामचंद्र राम जीत गये थे. इसके बाद हुए दोनों चुनाव में झारखंड विकास मोरचा का कब्जा रहा था. 2019 में भाजपा के किशुनदास विधायक बने.

1977 में अस्तित्व में आया था सिमरिया विधानसभा
सिमरिया विधानसभा क्षेत्र 1977 में अस्तित्व में आया था. पहले यह इलाका बड़कागांव विधानसभा क्षेत्र में ही आता था. यहां से भाजपा चार, कांग्रेस दो, जेवीएम दो और राजद, भाकपा, जीएनपी को एक-एक बार जीत मिली है. सिमरिया विधानसभा क्षेत्र की जनता समय-समय पर अपना प्रतिनिधि तो बदला है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है.
विस्थापन और सिंचाई है सिमरिया की सबसे बड़ी समस्या
यहां की मुख्य समस्या विस्थापन व सिंचाई हैं. क्षेत्र के विस्थापित किये गये रैयतों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा हैं. कई समस्याओं से रैयत जूझ रहे हैं. इसी तरह सिंचाई का साधन नहीं होने से हजारों एकड़ भूमि परती है. किसान खेती नहीं कर पाते हैं. जबकि अधिकांश लोग कृषि कर अपना जीविकोपार्जन करते हैं. नियमित व पर्याप्त बिजली नहीं मिलती हैं.

वर्षों से बंद है प्राथमिक शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय
सिमरिया का प्राथमिक शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय कई वर्षों से बंद पड़ा हैं. महाविद्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त कर लोग शिक्षक बनते थे. यह रोजगार का बड़ा साधन था. प्राथमिक शिक्षण प्रशिक्षण महाविद्यालय को चालू कराने का मुद्दा हमेशा गरम रहा है. इसके लिए यहां कई बार आंदोलन भी किया गया है. सिमरिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सात प्रखंड आते हैं, जिसमें सिमरिया, टंडवा, लावालौंग, पत्थलगड्डा, गिद्धौर, इटखोरी व मयूरहंड प्रखंड शामिल है.
जनता की उम्मीद पर खरा उतरे हैं : विधायक किशुन कुमार दास

भाजपा विधायक किशुन कुमार दास ने कहा कि चुनाव के वक्त जनता से जो भी वादा किया था, वह पूरा किया. बिजली, सड़क की मांग पूरी की गयी. जोरकारी पावर ग्रिड से पूरे जिले में बिजली बहाल की गयी. विधानसभा क्षेत्र में सड़कों का जाल बिछाया गया हैं. डीएमएफटी फंड से क्षेत्र में कई विकास कार्य किये. 22 प्लस टू स्कूल भवन, चहारदीवारी का निर्माण कराया गया. टंडवा में इंडोर स्टेडियम का निर्माण किया गया. टंडवा व गाड़ीलौंग के लिए 19 करोड़ की पेयजलापूर्ति योजना की प्रक्रिया चल रही है, बहुत जल्द टेंडर किया जायेगा. क्षेत्र के लोगो के सुख-दुख में हमेशा साथ रहा. समस्याओं का समाधान किया.
पांच वर्षों में नहीं हुआ क्षेत्र का विकास : मनोज चंद्रा
सिंचाई का कोई साधन नहीं हैं. किसान बारिश पर निर्भर हैं. सालोभर खेती नहीं कर पाते हैं. सिंचाई का साधन रहता, तो खेती कर अच्छी आमदनी करते.
तारकेश्वर राणा, किसान
वर्ष 2019 के विस चुनाव में दूसरे स्थान पर रहनेवाले मनोज चंद्रा ने कहा कि पांच साल में क्षेत्र का कोई विकास नहीं हुआ. चुनाव के वक्त किया गया वादा आज भी पूरा नहीं हो पाया है. मुआवजा नीति नहीं बनी, जिसके कारण कोल वाहनों के कहर से मौत के गाल समा रहे लोगों के परिजनों को समुचित मुआवजा नहीं मिल रहा है. बिजली, पानी, सड़क जैसी समस्या आज भी क्षेत्र में बरकरार हैं. क्षेत्र के विकास को लेकर विधायक द्वारा कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया गया.

नियमित बिजली नहीं मिलती हैं. शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है. बिजली की कमी से क्षेत्र के लोगों का जनजीवन और उद्योग -व्यवसाय प्रभावित है.
ज्ञानी ठाकुर, ग्रामीण
बोले एक्सपर्ट
क्षेत्र में विस्थापन, सिंचाई व बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है. एशिया की सबसे बड़ी कोयला परियोजना मगध व आम्रपाली टंडवा में स्थापित है. पर यहां के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. आज भी रैयत नौकरी व मुआवजा की मांग को लेकर आंदोलित हैं. मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं. क्षेत्र का विकास होना चाहिए, ताकि लोगो का जीवन स्तर ऊपर उठ सके.
सरयू राणा
वर्ष 2019 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| किशुन कुमार दास | भाजपा | 61438 |
| मनोज कुमार चंद्रा | आजसू | 50442 |
वर्ष 2014 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| गणेश गंझू | जेवीएम | 67404 |
| सुजीत कुमार भारती | भाजपा | 51764 |
वर्ष 2009 के चुनाव परिणाम
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी का नाम | प्राप्त मत |
| जयप्रकाश भोक्ता | जेवीएम | 34007 |
| गणेश गंझू | जेएमएम | 25982 |
सिमरिया के अब तक के विधायक
| चुनाव का वर्ष | विधायक का नाम | पार्टी का नाम |
| 1990 | उपेंद्रनाथ दास | भाजपा |
| 1995 | उपेंद्रनाथ दास | भाजपा |
| 2000 | योगेंद्रनाथ बैठा | राजद |
| 2005 | उपेंद्रनाथ दास | भाजपा |
| 2007 (उपचुनाव) | रामचंद्र राम | भाकपा |
| 2009 | जयप्रकाश सिंह भोक्ता | जेवीएम |
| 2014 | गणेश गंझू | जेवीएम |
| 2019 | किशुन दास | भाजपा |
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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