Ghaghra Sarhul: घाघरा में धूमधाम से मनाया गया सरहुल का त्योहार, बच्चों ने निकाली झांकी
घाघरा में सरहुल की झांकी निकालते स्कूली बच्चे. फोटो: प्रभात खबर
Ghaghra Sarhul: घाघरा में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया, जहां पारंपरिक नृत्य, जुलूस और बच्चों की आकर्षक झांकी ने लोगों का मन मोह लिया. कार्यक्रम में प्रकृति पूजा, सांस्कृतिक विरासत और एकता का संदेश दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
घाघरा से अजीत साहू की रिपोर्ट
Ghaghra Sarhul: झारखंड के घाघरा प्रखंड में सरहुल का पर्व मंगलवार को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. सरना संचालन समिति की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत झखरा कुम्भा में पहान चन्दर उरांव और पुजार बादल उरांव द्वारा पूजा-अर्चना से हुई.
आपके शहर में
खोड़हा दलों का पारंपरिक नृत्य और भव्य जुलूस
पूजा के बाद प्रखंड के अलग-अलग गांवों से आए दर्जनों खोड़हा दल झखरा कुम्भा में एकत्रित हुए. इसके बाद सभी दल पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-गीत करते हुए जुलूस के रूप में निकले. यह जुलूस चांदनी चौक और ब्लॉक चौक होते हुए करम डिपा पहुंचा, जहां यह एक सभा में तब्दील हो गया. पूरे रास्ते माहौल उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा.
बच्चों की झांकी ने मोहा सबका मन
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा निकाली गई झांकी रही. बच्चों ने पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति से जुड़े विषयों को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया और सभी ने उनकी सराहना की.
सामाजिक संगठनों ने लगाया स्टॉल, हुआ सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान मां जगदम्बा ज्वेलर्स सहित कई सामाजिक संगठनों द्वारा स्टॉल लगाए गए, जहां खोड़हा दलों और प्रतिभागियों को जलपान कराया गया. सरना संचालन समिति की ओर से सभी खोड़हा दलों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ा.
सरहुल पर्व: प्रकृति और संस्कृति का प्रतीक
कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरहुल पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला. शिवकुमार भगत (टुनटुन) ने कहा कि यह पर्व प्रकृति प्रेम, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है. यह हमें जंगल, जल और जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है. साथ ही आने वाली पीढ़ियों को इस परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया.
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
सीआरपीएफ डीआईजी रविंद्र भगत ने कहा कि सरहुल सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान है. साल वृक्ष की पूजा कर हम प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं. उन्होंने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है और सरहुल हमें यही सीख देता है.
इसे भी पढ़ें: पति को छोड़ प्रेमी संग रहना चाहती थी दो बच्चों की मां, भरी पंचायत में माता-पिता ने कर दी पिटाई
एकता और सद्भाव का संदेश
अनिरुद्ध चौबे ने लोगों से इस पर्व की भावना को अपनाने और समाज में प्रेम, एकता व सद्भाव बढ़ाने की अपील की. इस अवसर पर कई गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे. पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति, भाईचारे और उत्साह की झलक साफ देखने को मिली.
इसे भी पढ़ें: गढ़वा में गैस की कालाबाजारी पर बड़ी कार्रवाई, एसडीएम ने धंधेबाज को पकड़ दुकान किया सील
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए