Ghaghra Sarhul: घाघरा में धूमधाम से मनाया गया सरहुल का त्योहार, बच्चों ने निकाली झांकी

Updated at : 07 Apr 2026 10:28 PM (IST)
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Ghaghra Sarhul

घाघरा में सरहुल की झांकी निकालते स्कूली बच्चे. फोटो: प्रभात खबर

Ghaghra Sarhul: घाघरा में सरहुल पर्व धूमधाम से मनाया गया, जहां पारंपरिक नृत्य, जुलूस और बच्चों की आकर्षक झांकी ने लोगों का मन मोह लिया. कार्यक्रम में प्रकृति पूजा, सांस्कृतिक विरासत और एकता का संदेश दिया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी रही. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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घाघरा से अजीत साहू की रिपोर्ट

Ghaghra Sarhul: झारखंड के घाघरा प्रखंड में सरहुल का पर्व मंगलवार को पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. सरना संचालन समिति की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए. कार्यक्रम की शुरुआत झखरा कुम्भा में पहान चन्दर उरांव और पुजार बादल उरांव द्वारा पूजा-अर्चना से हुई.

खोड़हा दलों का पारंपरिक नृत्य और भव्य जुलूस

पूजा के बाद प्रखंड के अलग-अलग गांवों से आए दर्जनों खोड़हा दल झखरा कुम्भा में एकत्रित हुए. इसके बाद सभी दल पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य-गीत करते हुए जुलूस के रूप में निकले. यह जुलूस चांदनी चौक और ब्लॉक चौक होते हुए करम डिपा पहुंचा, जहां यह एक सभा में तब्दील हो गया. पूरे रास्ते माहौल उत्साह और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहा.

बच्चों की झांकी ने मोहा सबका मन

इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बच्चों द्वारा निकाली गई झांकी रही. बच्चों ने पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति से जुड़े विषयों को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में अलग ही रंग भर दिया और सभी ने उनकी सराहना की.

सामाजिक संगठनों ने लगाया स्टॉल, हुआ सम्मान समारोह

कार्यक्रम के दौरान मां जगदम्बा ज्वेलर्स सहित कई सामाजिक संगठनों द्वारा स्टॉल लगाए गए, जहां खोड़हा दलों और प्रतिभागियों को जलपान कराया गया. सरना संचालन समिति की ओर से सभी खोड़हा दलों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह और बढ़ा.

सरहुल पर्व: प्रकृति और संस्कृति का प्रतीक

कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरहुल पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला. शिवकुमार भगत (टुनटुन) ने कहा कि यह पर्व प्रकृति प्रेम, परंपरा और संस्कृति का प्रतीक है. यह हमें जंगल, जल और जमीन की रक्षा करने का संदेश देता है. साथ ही आने वाली पीढ़ियों को इस परंपरा से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया.

पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

सीआरपीएफ डीआईजी रविंद्र भगत ने कहा कि सरहुल सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान है. साल वृक्ष की पूजा कर हम प्रकृति के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं. उन्होंने कहा कि आज के समय में पर्यावरण संरक्षण बेहद जरूरी है और सरहुल हमें यही सीख देता है.

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एकता और सद्भाव का संदेश

अनिरुद्ध चौबे ने लोगों से इस पर्व की भावना को अपनाने और समाज में प्रेम, एकता व सद्भाव बढ़ाने की अपील की. इस अवसर पर कई गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे. पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक संस्कृति, भाईचारे और उत्साह की झलक साफ देखने को मिली.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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