बाल विवाह रोकने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण : डीएसडब्ल्यूओ

Updated at : 23 Mar 2026 9:02 PM (IST)
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बाल विवाह रोकने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण : डीएसडब्ल्यूओ

गुमला जिले में सोमवार को नगर भवन में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के अंतर्गत शिक्षकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी.

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: बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के अंतर्गत शिक्षकों का जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न 23 गुम 22 में दीप जलाते अतिथि प्रतिनिधि, गुमला गुमला जिले में सोमवार को नगर भवन में बाल विवाह मुक्त झारखंड अभियान के अंतर्गत शिक्षकों के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी. इस कार्यशाला में जिले के विभिन्न प्रखंडों से लगभग 400 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया. कार्यक्रम का उदघाटन डीएसडब्ल्यूओ आरती कुमारी, बीपीओ ओमप्रकाश दास, नीति आयोग की एवीए फेलो मंजू रजक, एबीएफ अंजलि तिवारी और किशोर न्याय बोर्ड सदस्य त्रिभुवन शर्मा ने संयुक्त रूप से किया. डीएसडब्ल्यूओ आरती कुमारी ने जमीनी स्तर की वास्तविकताओं को साझा करते हुए बताया कि जिला प्रशासन ने विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से कई बाल विवाहों को सफलतापूर्वक रोका है. उन्होंने कहा कि इन उदाहरणों को साझा करने का उद्देश्य शिक्षकों को यह समझाना है कि वर्तमान स्थिति क्या है और इससे प्रभावी तरीके से कैसे निपटा जा सकता है. उन्होंने सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, विशेषकर सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने शिक्षकों को समाज के प्रेरक बताते हुए कहा कि बाल विवाह रोकने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा है कार्यशाला में यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुप्रथा है, जो बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है. यह प्रथा बच्चों के अवसरों को छीन लेती है और उनके समग्र विकास में बाधा उत्पन्न करती है. इसलिए विद्यालयों में नियमित रूप से जागरूकता सत्र आयोजित करने की आवश्यकता है, ताकि बच्चों को समय-समय पर इस विषय में आवश्यक जानकारी मिलती रहे. किशोर न्याय बोर्ड गुमला के सदस्य त्रिभुवन शर्मा ने लगभग डेढ़ घंटे का विस्तृत प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया. इसमें बाल विवाह निषेध अधिनियम, बच्चों के अधिकार, रिपोर्टिंग की प्रक्रिया, केस हैंडलिंग और रोकथाम के व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गयी. शिक्षकों को बताया गया कि किसी संभावित बाल विवाह की स्थिति में वे प्रशासन, चाइल्डलाइन, पुलिस और संबंधित विभागों के साथ किस प्रकार समन्वय स्थापित कर सकते हैं. प्रशिक्षण के दौरान केस स्टडी, उदाहरण और इंटरैक्टिव चर्चा के माध्यम से शिक्षकों को व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान किया गया. कार्यक्रम के अंत में ओपन मंच सत्र आयोजित हुआ, जिसमें चार शिक्षकों ने अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा किये. उन्होंने बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने प्रयासों से बाल विवाह रोका और किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा.

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VIKASH NATH

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