Gumla: बेटियों ने तोड़ी समाज की बेड़ियां, मां की अर्थी को दिया कंधा

Updated at : 24 Mar 2026 9:23 PM (IST)
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Gumla News

मां की अर्थी को कंधा देती बेटियां

Gumla: शहर के डीएसपी रोड निवासी कौशल्या देवी के निधन के बाद उनकी पांच बेटियों ने ही उनका अंतिम संस्कार किया. कौशल्या देवी का कोई पुत्र नहीं है. बेटियों ने अपने कंधे पर मां की अर्थी को श्मशान पहुंचाया और वहां मुखाग्नि भी दी. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

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दुर्जय पासवान
Gumla: समाज में आज भी अंतिम संस्कार की रस्मों को पुरुषों का एकाधिकार माना जाता है, लेकिन गुमला की पांच बेटियों ने इस धारणा को तोड़कर एक नयी मिसाल पेश की है. बेटियों ने यह साबित किया कि संस्कार और कर्तव्य निभाने के लिये जेंडर की नहीं बस मजबूत इरादों की जरूरत होती है. शहर के डीएसपी रोड की रहने वाली 76 वर्षीय कौशल्या देवी का निधन 23 मार्च दिन सोमवार को लगभग 12 बजे अपराह्न् हो गया. निधन के बाद उनकी पांचों बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाते हुए अपनी मां को न केवल कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार भी संपन्न किया.

कौशल्या देवी का कोई पुत्र नहीं

कौशल्या देवी का कोई पुत्र नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी पांचों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर समाज के प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचाया. उनके निधन के बाद बेटियों ने तय किया कि वे किसी रिश्तेदार का इंतजार करने के बजाय स्वयं अपनी मां को अंतिम विदाई देंगी. कौशल्या देवी की बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार राजकीय मध्य विद्यालय गुमला में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. वहीं विद्या ओहदार हजारीबाग थाना में थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं. तृतीय बेटी ज्योति ओहदार योग शिक्षिका के रूप में अपना योगदान दे रही हैं. चतुर्थ बेटी अर्चना ओहदार रेलवे में नर्स के पद पर कार्यरत हैं. सबसे छोटी बेटी अल्पना ओहदार गोड्डा में शिक्षिका के पद पर कार्य कर रही हैं.

श्मशान तक बेटियों के कंधे पर गयी मां की अर्थी

आमतौर पर ऐसी स्थितियों में किसी पुरुष संबंधी को मुखाग्नि देने के लिए खोजा जाता है, लेकिन इन पांचों बहनों ने अपने मजबूत कंधों पर मां के पार्थिव शरीर को मरघट तक पहुंचाया. शहर के लोगों ने जब इस दृश्य को देखा तो अर्थी के चार कोनों पर बेटियों को खड़ा देखकर हर किसी की आंखें नम हो गयी और लोगों ने उनके इस साहसिक निर्णय की सराहना की.

मां ने ही दी मजबूती

बेटी नीलिमा ओहदार ने कहा कि जिस मां ने हमें लाड प्यार से पाल-पोसकर हमारे कंधों को इतना मजबूत बनाया कि आज हम सभी बेटियां समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सेवा भावना से कार्य कर रही हैं. उनका अंतिम सफर भी इस मजबूत कंधों पर ही क्यों नहीं हो सकता? हमारे लिए हमारी मां ही सब कुछ थीं.

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AmleshNandan Sinha

लेखक के बारे में

By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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