घुसपैठियों के कारण आदिवासी समाज खतरे में है : रघुवर दास

Updated at : 30 May 2025 10:19 PM (IST)
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घुसपैठियों के कारण आदिवासी समाज खतरे में है : रघुवर दास

हेमंत सरकार को डर है कि कहीं उसकी सरकार न गिर जाये

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गुमला. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास शुक्रवार को गुमला पहुंचे. सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन सरकार पेसा कानून लागू करने से डर रही है. हेमंत सरकार को डर है कि कहीं उसकी सरकार न गिर जाये. जबकि भाजपा शुरू से ही पेसा कानून लागू करने के पक्ष में रहा है. श्री दास ने कहा है कि घुसपैठियों व धर्मांतरण के कारण आज आदिवासी समाज खतरे में हैं. इधर गुमला पहुंचने पर भाजपा नेताओं ने श्री दास का स्वागत किया. सैकड़ों आम लोग भी रघुवर दास से मिल कर अपनी बातों को रखा.

घुसपैठियों के कारण झारखंड की संस्कृति पर हो रहा हमला

रघुवर दास ने कहा है कि घुसपैठियों के कारण झारखंड की संस्कृति पर हमला हो रहा है. पूर्वजों की परंपरा, संस्कृति, वेशभूषा, रहन-सहन को खत्म करने की योजना चल रही है. उन्होंने कहा है कि जब आदिवासी ही नहीं रहेंगे, तो फिर पेसा कानून किसके लिए बनेगी. इसलिए झारखंड सरकार की जिम्मेवारी बनती है कि पेसा कानून लागू करें. इसाई व इस्लाम से राज्य के आदिवासियों को जो खतरा है, उसे बचायें.

पेसा कानून लागू नहीं होने से 14 सौ करोड़ रुपये रुका: रघुवर दास ने कहा है कि पेसा कानून झारखंड राज्य व जनजाति समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है. पेसा कानून लागू नहीं होने के कारण भारत सरकार द्वारा 2024-2025 का 15वीं वित्त आयोग की जो 14 सौ करोड़ रुपये की राशि है. उसे केंद्र सरकार ने रोक दी है. जबतक पेसा कानून लागू नहीं होता. यह पैसा मिलना मुश्किल लग रहा है. इसलिए हेमंत सोरेन सरकार से अनुरोध है. पेसा कानून को लागू करें, ताकि हमारे जनजाति समुदाय के लोगों के विकास के लिए केंद्र सरकार से 14 सौ करोड़ रुपये मिल सके.

पड़हा जतरा में शामिल हुए रघुवर दास

रघुवर दास गुमला के चैनपुर प्रखंड स्थित घोर नक्सल प्रभावित पीपी बामदा में आयोजित पड़हा जतरा समारोह में भाग लिए. यहां 40 वर्षों से पड़हा व्यवस्था के तहत जतरा लगते आ रहा है. श्री दास ने आदिवासी समाज के लोगों से कहा कि पड़हा आदिवासियों की सामाजिक, धार्मिक व न्यायिक स्वशासन व्यवस्था है. उन्होंने जतरा में कहा कि अबुआ राज्य के बबुआ मुख्यमंत्री पेसा कानून लागू नहीं कर रहे हैं.

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