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बढ़ते तापमान का कहर : आम, लीची और रबी फसल का उत्पादन होगा प्रभावित

Updated at : 14 Mar 2025 4:35 PM (IST)
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पेड़ से झरने लगे आम के मंजर. फोटो : प्रभात खबर

Climate Change: गुमला जिले में क्लाइमेट चेंज का असर दिखने लगा है. बढ़ते तापमान की वजह से कृषि वैज्ञानिक आम, लीची और रबी की फसलों का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जता रहे हैं.

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Climate Change| गुमला, जगरनाथ पासवान : बढ़ते तापमान का असर अभी से दिखने लगा है. आम, लीची और रबी फसल का उत्पादन प्रभावित होने का डर गुमला जिले के किसानों को सताने लगा है. सर्दी का मौसम होने के बावजूद फरवरी के महीने में वैसी ठंड नहीं पड़ी, जितनी पड़नी चाहिए थी. तापमान में असामान्य रूप से हुए बदलाव की वजह से गेहूं, दलहन और सब्जियों की फसलें खराब होने की आशंका जतायी जा रही है. ये फसलें अभी पूरी तरह से तैयार नहीं हुई है. यदि यही स्थिति बनी रही, तो फसलों की उत्पादकता पर विपरीत असर पड़ेगा.

19 फरवरी के बाद से लगातार बढ़ता गया अधिकतम तापमान

कृषि विज्ञान केंद्र बिशुनपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर अटल तिवारी कहते हैं कि तापमान में असामान्य रूप से बदलाव देखने को मिल रहा है. विशेषकर 19 फरवरी के बाद से बदलाव देखने को मिल रहा है. 19 फरवरी के बाद से अधिकतम तापमान लगातार 28 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है. यह जलवायु परिवर्तन का असर है. इसकी वजह से रबी की फसलें प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि रबी की फसलें मुख्यतः ठंडे मौसम की फसल होती है. इनकी खेती अक्टूबर से मार्च तक होती है.

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गेहूं, दलहन और सब्जियों को हो सकता है नुकसान

कृषि वैज्ञानिक अटल तिवारी कहते हैं कि गेहूं के लिए 24-26 डिग्री सेल्सियस अधिकतम और 10-12 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान उपयुक्त है. बढ़े हुए तापमान से अर्ली मैच्योरिटी होगी, जिससे दाने का वजन और गुणवत्ता प्रभावित होगी. उत्पादन में 10-15 प्रतिशत तक की कमी हो सकती है. इसी प्रकार दलहन फसलों के फूलने और फल बनने की अवस्था में अत्यधिक तापमान परागण को प्रभावित करता है. इससे 15-20 प्रतिशत तक पैदावार में गिरावट हो सकती है. अधिक तापमान से सब्जियों की फसलों में पानी की मांग बढ़ेगी, जिससे सिंचाई की जरूरत पड़ेगी. फल और फूल गिरने की समस्या हो सकती है.

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फसलों को नुकसान से बचाने के लिए क्या करें किसान

कृषि वैज्ञानिक ने फसलों को नुकसान से बचाने के लिए उपाय एवं प्रबंधन की रणनीतियां पर जोर दिया. कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए किसानों को निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए.

  • गेहूं की फसल की सिंचाई का सही प्रबंधन करें और अंतिम सिंचाई थोड़ी देर से करें, ताकि फसल में अधिक समय तक नमी बनी रहे.
  • दलहन फसलों के लिए शाम के समय हल्की सिंचाई करें. जैविक खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करें, ताकि पौधों की सहनशीलता बढ़ सके.
  • सब्जियों के लिए ड्रिप इरिगेशन तकनीक अपनायें. इससे पानी की बचत होगी और पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी मिलेगी. नेट हाउस या शेड नेट का उपयोग करें, ताकि फसलों को अधिक गर्मी से बचाया जा सके.

पोषक तत्वों का प्रबंधन जरूरी : कृषि वैज्ञानिक

आम और लीची की चर्चा करते हुए कृषि वैज्ञानिक अटल तिवारी ने कहा कि वर्तमान जलवायु में बदलावों का आम एवं लीची की खेती पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है. तापमान में असामान्य वृद्धि और मानसूनी अनिश्चितता इन फसलों के उत्पादन, गुणवत्ता और आर्थिक लाभ पर प्रतिकूल असर डाल सकते हैं. आम और लीची के मंजर बनने में दिक्कत हो सकती है. यदि मंजर बन भी जाये, तो अत्यधिक गर्मी से फूल के झड़ने की आशंका रहती है. इससे उत्पादन कम हो सकता है. किसानों को जल प्रबंधन, जैविक रोग कीट प्रबंधन और समुचित पोषक तत्व प्रबंधन जैसी रणनीतियों को अपनाकर इन प्रभावों को कम करना चाहिए.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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