बिल क्लिंटन और अपने संबंध को अब #MeToo की शुरुआत बता रही हैं मोनिका लेविंस्की, सच ऐसे हुआ था उजागर

Edited by Rajneesh Anand
Updated:
विज्ञापन

मोनिका लेविंस्की और बिल क्लिंटन

Monica Lewinsky : जनवरी 1998 अमेरिका के इतिहास का ऐसा पन्ना, जिसकी चर्चा आज भी होती है, तो लोग उसका हिस्सा बनना चाहते हैं. यह वह समय था जब अमेरिका के 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिवा लेविंस्की के बीच यौन संबंध का खुलासा हुआ था और पूरे अमेरिका में नैतिकता की बहस छिड़ गई थी. अमेरिका जैसे खुले समाज में यह कोई अनोखी घटना नहीं थी, लेकिन राष्ट्रपति पद पर बैठे व्यक्ति से जनता इस नैतिकता की मांग करती है. वही मोनिका लेविंस्की एक बार फिर खबरों में हैं और कहा है कि दरअसल मेरे और बिल क्लिंटन के बीच जो कुछ हुआ वो #MeToo का आगाज था, उन्हें उस वक्त इस्तीफा दे देना चाहिए था.

विज्ञापन

Monica Lewinsky : मोनिका लेविंस्की यह नाम अमेरिका की राजनीति में एक बार इस कदर गूंजा था कि पूरे देश में भूचाल आ गया था. दरअसल 1998 में व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिका लेविंस्की और तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के बीच यौन संबंध का खुलासा हुआ था. उस वक्त बिल क्लिंटन की छवि को बहुत धक्का लगा था, वही मोनिका लेविंस्की जो अब 51 साल की हो चुकी हैं, सामने आकर यह कहा है कि बिल क्लिंटन को संबंधों का खुलासा होने के बाद इस्तीफा दे देना चाहिए था.

एलेक्स कूपर के पॉडकास्ट कॉल हर डैडी में बोलीं मोनिका लेविंस्की वो यौन उत्पीड़न नहीं था

मोनिका लेविंस्की ने इतने साल बाद एलेक्स कूपर के पॉडकास्ट कॉल हर डैडी पर अपने और बिल क्लिंटन के संबंधों पर बात की. उन्होंने कहा कि यह सही है कि उनके और बिल क्लिंटन के बीच जो कुछ हुआ, वह यौन उत्पीड़न नहीं था, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि उस वक्त मैं किस स्थिति में थी और बिल क्लिंटन किस स्थिति में थे. मैं महज 22 साल की इंटर्न थी और वो 49 साल के अमेरिकी राष्ट्रपति. उन्हें अपनी शक्ति और मर्यादा को समझना चाहिए था.संबंधों के बारे में झूठ-सच कहने से बेहतर होता कि वे अपने पद से इस्तीफा दे देते. लेविंस्की का कहना था कि व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में उसके राष्ट्रपति क्लिंटन के साथ नौ बार संबंध बने थे.

कब और कैसे हुआ था क्लिंटन और लेविंस्की के संबंधों का खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्की के बीच संबंधों का खुलासा जनवरी 1998 में एक केस के सिलसिले में हुआ था. जैसे ही यह मामला सामने आया, आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था. क्लिंटन ने मीडिया के सामने यह कहा था कि मेरे साथ मिस लेविस्की के यौन संबंध कभी नहीं रहे हैं. हालांकि बाद में जब डीएनए रिपोर्ट सामने आई तो अंतत: बिल क्लिंटन को सच स्वीकारना पड़ा था. हाल  में एक इंटरव्यू के दौरान क्लिंटन ने यह स्वीकार किया था कि लेविंस्की के साथ उनके संबंध तनाव कम करने के लिए बनाए गए थे, लेकिन वह गलत था.

पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी :Magadha Empire : सुनिए मगध की कहानी, एक था राजा बिम्बिसार जिसने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक गठबंधन किया

Mughal Harem Stories : हिंदू रानियां राजनीतिक समझौते की वजह से मुगल हरम तक पहुंचीं, लेकिन नहीं मिला सम्मान

औरंगजेब ने आंखें निकलवा दीं, पर छावा संभाजी ने नहीं कुबूल किया इस्लाम, क्या है शिवाजी के बेटे की पूरी कहानी?

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

डीएनए रिपोर्ट का आधार बना था लेविंस्की का ब्लू ड्रेस

जनवरी 1998 में जब  बिल क्लिंटन और मोनिका लेविंस्की के बीच यौन संबंध का स्कैम सामने आया, तो एफबीआई और स्वतंत्र वकील केनेथ स्टार ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान लेविंस्की की एक दोस्त ने एक नीली ड्रेस पेश की, जिसपर क्लिंटन के शुक्राणु मौजूद थे. दरअसल मोनिका लेविंस्की ने 28 फरवरी 1997 को वह ब्लू ड्रेस पहनी थी और क्लिंटन से मुलाकात की थी. उसी दौरान दोनों के बीच संबंध बने. इस ड्रेस को अपनी दोस्त की सलाह पर लेविंस्की ने बिला धोए अपने पास रखा था, जो क्लिंटन के खिलाफ बड़ा हथियार बना. जब क्लिंटन के डीएनए की जांच की गई, तो वह कपड़े पर मिले शुक्राणु से मैच कर गया, जिसके बाद क्लिंटन को सच स्वीकारना पड़ा था.

बिल क्लिंटन ने मांगी थी माफी

Hillary Clinton and Bill Clinton
बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन

डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद बिल क्लिंटन को सच स्वीकारना पड़ा और उन्होंने इस संबंध को स्वीकारते हुए अमेरिकी जनता और अपनी पत्नी हिलेरी क्लिंटन से माफी मांगी थी. उन्होंने यह कहा था कि जो कुछ वह नहीं होना चाहिए था और वह गलत था. माफी मांगने के बावजूद बिल क्लिंटन की छवि को बहुत नुकसान हुआ और उन्हें झूठ बोलने का आरोप सहना पड़ा, इससे उनको नैतिक क्षति हुई.  

बिल क्लिंटन पर चला महाभियोग

डीएनए रिपोर्ट सामने आने और क्लिंटन के द्वारा सच स्वीकार किए जाने के बाद उनपर महाभियोग चलाया गया, लेकिन आरोप साबित नहीं हुआ और क्लिंटन को बरी कर दिया गया, लेकिन उनकी छवि को बहुत नुकसान पहुंचा. क्लिंटन पर महाभियोग की प्रक्रिया दिसंबर 1998 में शुरू की गई थी और उन्हें फरवरी 1999 में आरोपों से बरी कर दिया गया था, लेकिन यह पूरा साल उनके लिए बहुत कठिन रहा था.

कैसी थी हिलेरी क्लिंटन की प्रतिक्रिया

बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच अपने पति का साथ दिया और यह कहा कि उनपर आरोप साजिश के तहत लगाए जा रहे हैं, लेकिन जब क्लिंटन ने आरोपों को स्वीकारा तो उन्हें बहुत धक्का भी लगा. उन्होंने अपनी आत्मकथा में इस बात का जिक्र किया है कि वे सदमे में थीं, लेकिन उन्होंने तलाक का रास्ता नहीं चुना. हां, उन्होंने अपनी व्यस्तता बढ़ा दी और सार्वजनिक जीवन में ज्यादा मुखर हो गईं. हिलेरी क्लिंटन ने राष्ट्रपति का चुनाव भी लड़ा.

पढ़ें प्रभात खबर की प्रीमियम स्टोरी :History of Munda Tribes 4 : मुंडा समाज में कानून की दस्तक था ‘किलि’, जानें कैसे हुई थी शुरुआत

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola