बोराडीह में आज तक प्रशासन नहीं गया
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Sep 2016 7:30 AM (IST)
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पालकोट(गुमला) : पालकोट प्रखंड की डहुपानी पंचायत में बोराडीह गांव है. घोर उग्रवाद प्रभावित है. जंगल व पहाड़ों के बीच है. आजादी के 69 वर्ष हो गये, परंतु आज तक प्रशासन इस गांव में नहीं पहुंचा है. यही वजह है कि गांव के लोग अपनी दुख तकलीफ को सहते हुए जी रहे हैं. लोटवा व […]
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पालकोट(गुमला) : पालकोट प्रखंड की डहुपानी पंचायत में बोराडीह गांव है. घोर उग्रवाद प्रभावित है. जंगल व पहाड़ों के बीच है. आजादी के 69 वर्ष हो गये, परंतु आज तक प्रशासन इस गांव में नहीं पहुंचा है. यही वजह है कि गांव के लोग अपनी दुख तकलीफ को सहते हुए जी रहे हैं.
लोटवा व खड़पानी होते हुए बोराडीह गांव जाते हैं. सड़क के नाम पर पगडंडी व पहाड़ है. कई जगह पुलिया नहीं है. भारी बारिश होने पर ग्रामीण टापू की तरह रहने को विवश हैं. आज भी इस क्षेत्र के लोग विकास के रहनुमाओं का इंतजार कर रहे हैं. ग्रामीणों की माने, तो जिनको वे वोट देते हैं, चुनाव जीतने के बाद गांव झांकने तक नहीं आते.
गांव की प्रमुख समस्याएं
पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं है. स्वास्थ्य उपकेंद्र नहीं है. स्कूल है, तो जैसे-तैसे चल रहा है. सड़क व पुलिया नहीं है. बिजली नहीं है. बच्चों को पढ़ाई में दिक्कत होती है. सोलर लाइट मिली है, पर वह बेकाम का है.
प्रशासन गांव नहीं आयी है
सिसिलिया खड़ियाइन ने कहा : अब हमलोग बुढ़ा हो गये हैं. प्रशासन आज तक गांव नहीं आया है. विकास के नाम पर यहां कुछ नहीं हुआ है. नेता लोग चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं. सिसिलिया
सड़क, पुलिया व बिजली नहीं है
ग्रामीण गंदुर खड़िया ने कहा : गांव में सड़क नहीं है. पगडंडी पर चलते हैं. कहीं सड़क है, तो कच्ची है. पुलिया नहीं है. बिजली नहीं है. किसी के घर में शौचालय नहीं है. किसी तरह जीविका चला रहे हैं. गंदुर
गांव में कोई सुविधा नहीं है
छात्रा नीलिमा कुमारी ने कहा कि माता-
पिता कृषक हैं. किसी प्रकार मुझे पढ़ा रहे हैं. मेरा गांव आज भी आदिम युग की तरह जी रहा है, क्योंकि यहां किसी प्रकार की सुविधा नहीं है. नीलिमा
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