विक्षिप्त नहीं मरता, तो कई की जान जाती : ग्रामीण

Published at :17 Jan 2016 4:44 AM (IST)
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विक्षिप्त नहीं मरता, तो कई की जान जाती : ग्रामीण

घाघरा : घाघरा के देवाकी अंबाटोली के ग्रामीणों ने कहा कि अगर विक्षिप्त को नहीं मारते, तो वह गांव के कई और लोगों की जान ले लेता. पार्वतिया की हत्या करने के बाद वह टांगी लेकर खेत में बैठ गया था. इससे पहले उसने कई लोगों को मारने के लिए दौड़ाया भी था. ग्रामीणों ने […]

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घाघरा : घाघरा के देवाकी अंबाटोली के ग्रामीणों ने कहा कि अगर विक्षिप्त को नहीं मारते, तो वह गांव के कई और लोगों की जान ले लेता. पार्वतिया की हत्या करने के बाद वह टांगी लेकर खेत में बैठ गया था.
इससे पहले उसने कई लोगों को मारने के लिए दौड़ाया भी था. ग्रामीणों ने कहा कि हमने अपनी सुरक्षा के लिए उसे मारा है. यहां बता दें कि पार्वतिया पर विक्षिप्त महतो उरांव ने टांगी से कई बार वार किया है. चेहरे को बुरी तरह काट दिया. मृतका का पति कलेश्वर उरांव ने कहा कि वह सुबह को खेत गया था. कुछ लोगों ने आकर बताया कि उसकी पत्नी को उसके चचेरे भाई महतो उरांव ने टांगी से काट कर हत्या कर दी है.
कलेश्वर दौड़े-दौड़े घर पहुंचा. लेकिन तब तक पार्वतिया की मौत हो चुकी थी. वह महतो को खोजने लगा, तब तक ग्रामीणों ने उसे मार डाला. बेटी प्रियंका ने कहा कि महतो उसे मार रहा था. जब उसकी मां बचाने आयी तो उसने उसे मार दिया. प्रियंका वहां से भाग कर जान बचायी है. सूचना पर पुलिस तुरंत पहुंच गयी थी. शुरू में पुलिस को लगा कि दोनों घायल हैं. अस्पताल पहुंचाना होगा. लेकिन पुलिस के पहुंचते तक दोनों की मौत हो चुकी थी.
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