:::::: खुशहाल हैं ग्रामीण

Published at :07 Dec 2015 6:09 PM (IST)
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:::::: खुशहाल हैं ग्रामीण

:::::: खुशहाल हैं ग्रामीण पंचायत भवन बनते केे साथ ध्वस्त हुआस्वास्थ्य उपकेंद्र बना पर शुरू नहीं हुआहाल : तबेला गांव का.7 गुम 15 में पंचायत भवन, अधूरे में ही ध्वस्त हुआ7 गुम 16 में स्वास्थ्य उपकेंद्र, एक दिन भी नहीं चला7 गुम 17 में तबेला गांव जाने की पगडंडी रास्ताप्रतिनिधि, गुमलाचैनपुर प्रखंड के बारडीह पंचायत […]

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:::::: खुशहाल हैं ग्रामीण पंचायत भवन बनते केे साथ ध्वस्त हुआस्वास्थ्य उपकेंद्र बना पर शुरू नहीं हुआहाल : तबेला गांव का.7 गुम 15 में पंचायत भवन, अधूरे में ही ध्वस्त हुआ7 गुम 16 में स्वास्थ्य उपकेंद्र, एक दिन भी नहीं चला7 गुम 17 में तबेला गांव जाने की पगडंडी रास्ताप्रतिनिधि, गुमलाचैनपुर प्रखंड के बारडीह पंचायत में तबेला गांव है. घने जंगल व पहाड़ों के बीच है. चैनपुर से 30 किमी दूर है. इस गांव तक जाने के लिए सड़क नहीं है. बारडीह तक कहीं कच्ची व कहीं पथरीली सड़क है. बारडीह से तबेला तक जाने के लिए पगडंडी है. वह भी खेत से होकर. इस गांव में नक्सली आते-जाते रहते हैं. यहां के लोग खेतीबारी करते हैं. इसी से इनका जीवन चल रहा है. समस्या है तो स्वास्थ्य सुविधा, बिजली व सड़क की. गांव में पांच साल पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बना है, पर शुरू नहीं हुआ. बगल में पंचायत भवन है. पर बनते के साथ ही ध्वस्त हो गया. देखनेवाला कोई नहीं है. आजादी के 67 साल गुजर गया. आज तक सरकारी मुलाजिम गांव तक नहीं पहुंचे हैं. यहां तक कि विधायक व सांसद कौन हैं, गांव के लोग नहीं जानते. ग्रामीण विद्युतिकरण योजना फेल है. यहां न पोल लगा है न तार है. आज भी लोग ढिबरी युग में जी रहे हैं. कभी पंचायत हुआ करता था तबेलागांव के जेनोबियस एक्का, इसाइया तिग्गा, समरदन तिर्की ने कहा : इस बार गांव की सरकार चुने हैं. चुनाव के बाद नये मुखिया व पंचायत समिति से विकास की उम्मीद है. इन लोगों ने यह भी कहा : कभी तबेला पंचायत हुआ करता था. लेकिन बाद में तबेला को मौजा बना दिया और बारडीह को पंचायत. इस कारण इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है. नक्सली आते हैं, लेकिन कभी ग्रामीणों को परेशान नहीं किये हैं. :::: भवन बनाने में अनियमितताहाल : तबेला स्कूल का.7 गुम 13 में अधूरा स्कूल भवन7 गुम 12 में खुले आसमान के नीचे बैठे बच्चेप्रतिनिधि, गुमलातबेला में हाई स्कूल है. वर्ग एक से दस तक पढ़ाई होती है. शिक्षक दस हैं. छात्रों की संख्या 70 है. यह पहला स्कूल होगा, जहां चारों ओर अधूरा स्कूल भवन है. भवन की जो स्थिति है, कोई पांच तो कोई दस वर्ष से अधूरा है. अधूरे भवन को पूरा करने के बजाये यहां नया भवन की स्वीकृति देकर पुन: भवन बनवाया जा रहा है. यहां सिर्फ भवन बनाने में सरकारी राशि की लूट हो रही है. इस बात को स्कूल के कुछ शिक्षक भी स्वीकार करते हैं. लेकिन वे डर से कुछ बोलने से कतरा रहे हैं. सबसे चौंकानेवाली बात कि स्कूल के एचएम सप्ताह में एक दिन आते हैं. कभी-कभी तो वे महीनों तक गायब रहते हैं. स्कूल की दुर्दशा यह है कि संसाधन के अभाव में बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं. पांच साल पहले तक स्कूल में 250 छात्र थे. पर धीरे-धीरे घट कर छात्रों की संख्या 70 हो गयी है. स्कूल के प्रधानमंत्री जीतेंद्र लोहरा ने कहा कि खेल ग्राउंड जरूरी है. स्कूल का चहारदीवारी हो तथा अधूरे भवन पूरा हो.

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